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एच-1 बी वीजा मामले में हड़बड़ी में नहीं है भारत
हिमांशु मिश्र/ अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Thu, 29 Jun 2017 06:09 AM IST
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच बेहतर केमिस्ट्री कायम करने केलिए भले ही पीएम के अमेरिका दौरे में भारत ने एच-1 बी वीजा मामले को नहीं उठाया। मगर वह जल्द ही इस दिशा में नए सिरे से प्रयास करेगा। चूंकि अमेरिकी की वीजा नीति में महज कार्यकारी आदेश से बदलाव नहीं लाया जा सकता। इसलिए भारत ने अमेरिका में सत्ता परिवर्तन के बाद पीएम मोदी के पहले दौरे में इस मुद्दे को तूल नहीं देने का फैसला किया। भारत को उम्मीद है कि ट्रंप के साथ पीएम मोदी की बनी शानदार केमिस्ट्री वीजा विवाद को दूर करने का रास्ता तैयार करेगी।
पीएम मोदी की अमेरिका यात्रा से जुड़े एक अधिकारी के मुताबिक एच-1 बी वीजा मामले में तत्काल निर्णय नहीं होने जा रहा है। इसके लिए नई सरकार को अमेरिकी कांग्रेस का समर्थन हासिल करना होगा। ऐसे में बदलाव केलिए एक लंबी प्रक्रिया अपनानी होगी। यही कारण है कि द्विपक्षीय बातचीत के लिए इसे महत्वपूर्ण मुद्दे के रूप में शामिल करने के बावजूद अंत में इसे एजेंडे से बाहर निकालने का फैसला किया गया।
उक्त अधिकारी के मुताबिक द्विपक्षीय वार्ता से पहले अमेरिका ने हिजबुल आतंकी सलाहुद्दीन को अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित कर विवादास्पद मुद्दों से दूरी बरतने का परोक्ष संदेश दिया था। इसी के मद्देनजर इस दौरे को दोनों शासनाध्यक्षों के बीच निजी संबंध को प्रगाढ़ करने की दिशा में आगे बढ़ाने का फैसला किया गया। यह भी संकेत था कि अगर भारत की ओर से एच-1 बी वीजा, अपने नागरिकों पर हमले की बात उठाई गई तो अमेरिका भारत में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा मामले को उठा सकता है।
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उक्त अधिकारी के मुताबिक वीजा समस्या का हल नौकरशाही स्तर पर निकालने की कोशिश होगी। इसकेबावजूद अगर वीजा नीति में बदलाव के लिए मामला अमेरिकी कांग्रेस पहुंचा तो सरकार रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टियों में भारत समर्थक लॉबी से मदद हासिल करेगी।
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पीएम मोदी की अमेरिका यात्रा से जुड़े एक अधिकारी के मुताबिक एच-1 बी वीजा मामले में तत्काल निर्णय नहीं होने जा रहा है। इसके लिए नई सरकार को अमेरिकी कांग्रेस का समर्थन हासिल करना होगा। ऐसे में बदलाव केलिए एक लंबी प्रक्रिया अपनानी होगी। यही कारण है कि द्विपक्षीय बातचीत के लिए इसे महत्वपूर्ण मुद्दे के रूप में शामिल करने के बावजूद अंत में इसे एजेंडे से बाहर निकालने का फैसला किया गया।
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उक्त अधिकारी के मुताबिक द्विपक्षीय वार्ता से पहले अमेरिका ने हिजबुल आतंकी सलाहुद्दीन को अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित कर विवादास्पद मुद्दों से दूरी बरतने का परोक्ष संदेश दिया था। इसी के मद्देनजर इस दौरे को दोनों शासनाध्यक्षों के बीच निजी संबंध को प्रगाढ़ करने की दिशा में आगे बढ़ाने का फैसला किया गया। यह भी संकेत था कि अगर भारत की ओर से एच-1 बी वीजा, अपने नागरिकों पर हमले की बात उठाई गई तो अमेरिका भारत में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा मामले को उठा सकता है।
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उक्त अधिकारी के मुताबिक वीजा समस्या का हल नौकरशाही स्तर पर निकालने की कोशिश होगी। इसकेबावजूद अगर वीजा नीति में बदलाव के लिए मामला अमेरिकी कांग्रेस पहुंचा तो सरकार रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टियों में भारत समर्थक लॉबी से मदद हासिल करेगी।