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भारतीय मूल का ये शख्स बना पूरे अमेरिका का डॉक्टर

Tue, 16 Dec 2014 09:30 AM IST
ब्रजेश उपाध्याय/बीबीसी संवाददाता, वॉशिंगटन
ब्रजेश उपाध्याय/बीबीसी संवाददाता, वॉशिंगटन Updated Tue, 16 Dec 2014 09:30 AM IST
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american born indian vivek murthy appointed as surgeon general of america

बंदूक लॉबी के भारी विरोध के बावजूद डॉक्टर विवेक मूर्ति अमेरिका के सबसे कम उम्र के और भारतीय मूल के पहले सर्जन जनरल बन गए हैं।

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सोमवार शाम अमेरिकी सेनेट ने क्रिसमस की छुट्टियों से ठीक पहले आखिरकार उन्हें अमेरिकी स्वास्थ्य सेवा प्रमुख का पद सौंप दिया। सर्जन जनरल को एक तरह से पूरे राष्ट्र का डॉक्टर भी कहा जाता है।

माना जा रहा है कि अगर उनके नाम पर वोटिंग अभी नहीं होती तो जनवरी में रिपबलिकन बहुमत वाले सेनेट में उनके नाम को मंजूरी मिलना असंभव होता।

ज्यादातर रिपब्लिकंस और कुछ डैमोक्रेट्स भी 37 साल के डॉक्टर मूर्ति की इस पद पर नियुक्ति के खिलाफ थे क्योंकि उन्होंने दो साल पहले एक ट्वीट के जरिए अमेरिका में बंदूक रखने के हक के खिलाफ बयान दिया था।
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राष्ट्रपति ओबामा की तरफ से मनोनीत किए जाने के एक साल बाद तक उनके नाम पर जबरदस्त खींचतान चलती रही और कई जगह तो कांग्रेस के मिडटर्म चुनावों में भी इस पर बहस हुई।
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जिन राज्यों में बंदूक लॉबी काफी मजबूत है, वहां उनके नाम पर खासा विरोध हुआ है।

बंदूक के खिलाफ हैं विवेक मूर्ति

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अपने ट्वीट में मूर्ति ने कहा था, “बंदूक की राजनीति खेल रहे नेताओं से थक चुका हूं। नेशनल राइफल एसोसिएशन के डर से वो लोगों की जान खतरे में डाल रहे हैं। बंदूक एक तरह से स्वास्थ्य समस्या है।”

वैसे तो सर्जन जनरल के पास ऐसे अधिकार नहीं होते कि वो अपने दम पर नीतियां बदल सकें पर स्वास्थ्य से जुडी बहस को वो एक अहम दिशा दे सकते हैं।

अस्सी के दशक में सर्जन जनरल रहे सी एवरेट कूप ने सिगरेट के खिलाफ बडी मुहिम शुरू की थी। एड्स का प्रसार रोकने के लिए सेक्स शिक्षा और कंडोम के इस्तेमाल की वकालत करके उन्होंने कंजरवेटिव अमेरिका में एक बड़ा बवाल खडा कर दिया था। बंदूक लॉबी को डर है कि मूर्ति भी बंदूकों के खिलाफ बहस तेज कर सकते हैं।

संयोग यह भी है कि उनकी नियुक्ति न्यूटाउन शहर के सैंडी हुक स्कूल में कत्लेआम की दूसरी बरसी पर हुई है। न्यूटाउन के एक स्कूल में एक सिरफिरे बंदूकधारी ने 20 बच्चों और छह शिक्षकों को गोली मारकर खुदकुशी कर ली थी।

पिछले दिनों स्वास्थ्य सेवाओं से जुडी कई संस्थाओं ने उनकी नियुक्ति के हक में भी अभियान चलाया है। ट्विटर पर उनके लिए #TopDocNow के नाम से भी मुहिम चलाई गई।

मूर्ति के माता-पिता कर्नाटक से हैं और उनका जन्म ब्रिटेन में हुआ था। वो तीन साल के थे जब उनके माता-पाता अमेरिका आ गए। मूर्ति ने हार्वड और येल विश्वविद्यालय से मेडिकल शिक्षा प्राप्त की है। साथ ही स्वास्थ्य सेवा प्रबंधन पर येल से ही एमबीए भी किया है।

ओबामा प्रशासन में किसी भारतीय मूल के अमेरिकी के लिए यह अब तक का सबसे बड़ा ओहदा है।

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