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अमेरिकी चुनाव पर शोध, अपने चुनावों पर केस स्टडी तक नहीं

Sun, 26 Mar 2017 12:59 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, काशीपुर।
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, काशीपुर। Updated Sun, 26 Mar 2017 12:59 AM IST
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No case studies on your elections
आईआईएम काशीपुर - फोटो : अमर उजाला

काशीपुर। अमेरिका के चुनाव पर शोध और अपने यहां के चुनावों पर एक केस स्टडी तक नहीं। शनिवार को आईआईएम काशीपुर के दीक्षांत समारोह में मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने प्रबंध संस्थानों को कड़वी हकीकत से भी परिचित कराया। ऐसा करने के लिए जावड़ेकर ने हाल की देश की दो प्रमुख घटनाओं नोटबंदी और पांच राज्यों में हुए चुनावों का सहारा लिया। 

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उच्च शिक्षा में सुधार की बात केंद्र सरकार गाहे-बगाहे करती रही है। शनिवार को भारतीय प्रबंध संस्थान भी इसकी चपेट में आ गए। जावड़ेकर ने कहा कि देश के प्रबंध और शोध संस्थान लाइव रिसर्च से दूर भाग रहे हैं। यह अच्छा संकेत नहीं है। नोटबंदी का मसला उठाते हुए जावड़ेकर ने कहा कि आठ नवंबर, 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी का एलान किया था और देश से 86 प्रतिशत नोट गायब हो गए थे।

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उस समय देश के दो प्रतिष्ठित प्रबंध संस्थानों के निदेशकों को फोन करके कहा था कि इस पर केस स्टडी करो। निदेशकों का कहना था कि इसमें कम से कम एक माह का समय लगेगा। नोटबंदी पर हर व्यक्ति के किसी न किसी तरह के विचार हैं। इस फैसले की दुनिया भर मे चर्चा हुई और प्रबंध संस्थान एक केस स्टडी तक नहीं कर पाए। पांच राज्यों के चुनाव का जिक्र करते हुए जावड़ेकर ने कहा कि इन चुनावों में मतदाताओं के रुख पर पूरी दुनिया में मंथन हो रहा है।
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पांच राज्यों के चुनाव हमारे सामने और हमारे सामने हुए। इसके बावजूद विधानसभा चुनावों पर एक भी केस स्टडी अभी तक सामने नहीं आई। हम अमेरिका के चुनाव पर तो शोध तक कर लेते हैं, लेकिन अपने यहां हुए  चुनाव पर एक केस स्टडी तक नहीं कर पाते।


लगे हाथों जावडे़कर यह भी इशारा कर गए कि मंत्री तो वे प्रबंध संस्थानों के हैं, पर इनसे भी उन्हें दो खास मामलों में मदद नहीं मिली। विपक्ष के ईवीएम पर उठाए गए सवालों के जवाब में जावड़ेकर ने सदन में चुनाव संबंधित आंकड़े प्रस्तुत कर दिए थे। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता होने के नाते भी उन्हें नोटबंदी पर खासी माथापच्ची करनी पड़ी थी। 
 

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