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100 विद्यार्थियों ने जीआईसी थल से नाम कटाया
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
Updated Sun, 23 Jul 2017 10:55 PM IST
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स्व. हरीदत्त पंत राजकीय इंटर कॉलेज थल से इस बार 100 विद्यार्थियों ने नाम कटा लिया है। यह विद्यार्थी अब अन्य विद्यालयों में प्रवेश ले चुके हैं। पिछले वर्ष विद्यालय की छात्र संख्या 450 थी, जो इस बार मात्र 350 रह गई है। अभी भी कई विद्यार्थी विद्यालय छोड़कर जाने की तैयारी में हैं। विद्यालय में शिक्षकों के कई पद रिक्त होने से पढ़ाई पर असर पड़ रहा है। राज्य में नई सरकार गठन के बाद शिक्षकों के रिक्त पद भरे जाने की उम्मीद में लगे अभिभावकों को अब निराशा होने लगी है।
बताया गया है कि थल इंटर कॉलेज में इस समय अंग्रेजी, अर्थशास्त्र, रसायन विज्ञान और संस्कृत विषय में प्रवक्ता के पद रिक्त हैं। इसी तरह एलटी ग्रेड में गणित के दो और हिंदी, संस्कृत के एक-एक शिक्षक का पद खाली चल रहा है। विद्यालय प्रबंध समिति की अध्यक्ष विमला चंद ने प्रदेश के शिक्षा मंत्री को पत्र लिखकर कहा है कि यदि शिक्षकों के रिक्त पद जल्दी नहीं भरे गए तो आने वाले समय में छात्र संख्या और कम हो सकती है। उन्होंने आग्रह किया है कि सरकारी शिक्षा व्यवस्था सुधारने की दिशा में जल्दी ठोस कदम उठाए जाएं। प्रधानाचार्य लक्ष्मीदत्त कापड़ी ने बताया कि जो शिक्षक तैनात हैं, वह सभी विषयों को पढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं लेकिन पद खाली होने से कई बार समस्या आने लगती है। उन्होंने बताया कि रिक्त पदों की सूची लगातार सीईओ के माध्यम से शिक्षा निदेशालय को भेजी जा रही है। संपन्न घरों के लोग तो अपने बच्चों को शहरों में भेज रहे हैं, लेकिन गरीब परिवारों के लोग ऐसा नहीं कर पाने की स्थिति में नहीं है।
बताया गया है कि थल इंटर कॉलेज में इस समय अंग्रेजी, अर्थशास्त्र, रसायन विज्ञान और संस्कृत विषय में प्रवक्ता के पद रिक्त हैं। इसी तरह एलटी ग्रेड में गणित के दो और हिंदी, संस्कृत के एक-एक शिक्षक का पद खाली चल रहा है। विद्यालय प्रबंध समिति की अध्यक्ष विमला चंद ने प्रदेश के शिक्षा मंत्री को पत्र लिखकर कहा है कि यदि शिक्षकों के रिक्त पद जल्दी नहीं भरे गए तो आने वाले समय में छात्र संख्या और कम हो सकती है। उन्होंने आग्रह किया है कि सरकारी शिक्षा व्यवस्था सुधारने की दिशा में जल्दी ठोस कदम उठाए जाएं। प्रधानाचार्य लक्ष्मीदत्त कापड़ी ने बताया कि जो शिक्षक तैनात हैं, वह सभी विषयों को पढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं लेकिन पद खाली होने से कई बार समस्या आने लगती है। उन्होंने बताया कि रिक्त पदों की सूची लगातार सीईओ के माध्यम से शिक्षा निदेशालय को भेजी जा रही है। संपन्न घरों के लोग तो अपने बच्चों को शहरों में भेज रहे हैं, लेकिन गरीब परिवारों के लोग ऐसा नहीं कर पाने की स्थिति में नहीं है।
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