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पापुलर के साथ अब केले की खेती भी
Haridwar
Updated Fri, 12 Oct 2012 12:00 PM IST
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नारसन। किसानों ने पापुलर के साथ अब केले की खेती करनी भी शुरू कर दी है। उद्यान विभाग की सलाह पर क्षेत्र के कई किसान पापुलर के पेड़ों के बीच ‘टिश्यू कल्चर’ से तैयार खास किस्म के केले के पौधे रोपने में रुचि दिखा रहे हैं। ऐसे में, पांच साल में इनकम देने वाले पापुलर के पेड़ों के साथ ही हर साल केले की खेती करके किसान दोहरा लाभ उठा सकेंगे। फिलहाल 50 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में पापुलर संग केले के पौधे रोपने का लक्ष्य रखा गया है।
आमतौर पर जिन खेतों में पापुलर के पेड़ उगते हैं, वहां कोई दूसरी फसल पैदा नहीं हो पाती। ऐसे में, खेतों का अधिकांश हिस्सा खाली रहता है। पापुलर के पेड़ कम से कम पांच साल में तैयार होते हैं। लेकिन, कम मेहनत और देख-रेख की ज्यादा जरूरत नहीं होने की वजह से किसान इसकी खेती को ज्यादा तवज्जो दे रहे हैं। एक बार लगाने के बाद लगातार पांच फसलें निकल आने से यह मुनाफे का सौदा भी बन जाता है। इसलिए नारसन, मंगलौर, लक्सर, खानपुर, झबरेड़ा, भगवानपुर, पिरान कलियर क्षेत्र में काफी संख्या में किसान पापुलर की खेती कर रहे हैं। इसे देखते हुए उद्यान विभाग ने टिश्यू कल्चर से खास किस्म के केले के पौधे तैयार किए हैं, जो पापुलर के पेड़ों के नीचे भी बेहतर पैदावार देंगे। नारसन कलां गांव में कई काश्तकार उद्यान विभाग की सलाह पर सैकड़ों बीघा भूमि में केला लगा चुके हैं। काश्तकार पंकज, सतीश ब्रजवीर, तेजवीर आदि का कहना है कि एक बीघा जमीन में करीब 150 केले के पौधे रोपे गए हैं। केले को जंगली जानवर भी ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचाते।
कोट
पूरे जिले में पिछले साल 15 हेक्टेयर में केले के पौधे लगाए गए थे, जिनके रिजल्ट अच्छे रहे हैं। इस बार यह लक्ष्य 50 हेक्टेयर का रखा गया है। केले की यह पौध टिश्यू कल्चर से तैयार की गई है। यह पौधा आठ से बारह महीने में फल देने लगेगा। इससे काश्तकारों को दोहरा लाभ होगा।
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- संजय श्रीवास्तव, जिला उद्यान अधिकारी।
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आमतौर पर जिन खेतों में पापुलर के पेड़ उगते हैं, वहां कोई दूसरी फसल पैदा नहीं हो पाती। ऐसे में, खेतों का अधिकांश हिस्सा खाली रहता है। पापुलर के पेड़ कम से कम पांच साल में तैयार होते हैं। लेकिन, कम मेहनत और देख-रेख की ज्यादा जरूरत नहीं होने की वजह से किसान इसकी खेती को ज्यादा तवज्जो दे रहे हैं। एक बार लगाने के बाद लगातार पांच फसलें निकल आने से यह मुनाफे का सौदा भी बन जाता है। इसलिए नारसन, मंगलौर, लक्सर, खानपुर, झबरेड़ा, भगवानपुर, पिरान कलियर क्षेत्र में काफी संख्या में किसान पापुलर की खेती कर रहे हैं। इसे देखते हुए उद्यान विभाग ने टिश्यू कल्चर से खास किस्म के केले के पौधे तैयार किए हैं, जो पापुलर के पेड़ों के नीचे भी बेहतर पैदावार देंगे। नारसन कलां गांव में कई काश्तकार उद्यान विभाग की सलाह पर सैकड़ों बीघा भूमि में केला लगा चुके हैं। काश्तकार पंकज, सतीश ब्रजवीर, तेजवीर आदि का कहना है कि एक बीघा जमीन में करीब 150 केले के पौधे रोपे गए हैं। केले को जंगली जानवर भी ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचाते।
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पूरे जिले में पिछले साल 15 हेक्टेयर में केले के पौधे लगाए गए थे, जिनके रिजल्ट अच्छे रहे हैं। इस बार यह लक्ष्य 50 हेक्टेयर का रखा गया है। केले की यह पौध टिश्यू कल्चर से तैयार की गई है। यह पौधा आठ से बारह महीने में फल देने लगेगा। इससे काश्तकारों को दोहरा लाभ होगा।
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- संजय श्रीवास्तव, जिला उद्यान अधिकारी।