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कोकरन हेंसन पुरस्कार से सम्मानित हुए युवा वैज्ञानिक डॉ. गिरीश
अमर उजाला ब्यूरो, धरमघर (बागेश्वर)।
Updated Wed, 02 Aug 2017 11:29 PM IST
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डा.गिरीश चंद्र कांडपाल
- फोटो : amar ujala
भारतीय अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद के वानिकी सांख्यिकी प्रभाग देहरादून में कार्यरत वैज्ञानिक डॉ. गिरीश चंद्र कांडपाल को कोकरन-हेंसन पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। डॉ. कांडपाल को यह पुरस्कार मोरक्को में विगत दिनों आयोजित 61वें विश्व सांख्यिकी सम्मेलन में प्रदान किया गया। यह पुरस्कार प्राप्त करने वाले वह तीसरे भारतीय हैं।
बागेश्वर के द्यारिनो गांव निवासी युवा वैज्ञानिक डॉ. गिरीश चंद्र कांडपाल को सर्वे सांख्यिकी में सर्वश्रेष्ठ शोध के लिए कोकरन-हेंसन पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार अंतरराष्ट्रीय सांख्यिकी संगठन की ओर से रैंक्ड सेट सैंपलिंग से डेवलपमेंट प्रोग्राम का रेस्पांस एस्टीमेट करने के लिए प्रदान किया गया।
यह पुरस्कार हर दो साल में एक बार विकासशील देशों के युवा शोधकर्ताओं को सर्वे सांख्यिकी में सर्वश्रेष्ठ शोध के लिए दिया जाता है। पुरस्कार प्राप्त करने वाले वह तीसरे भारतीय हैं। पुरस्कार के लिए मोरक्को में भारतीय राजदूत डॉ. खेया भट्टाचार्या ने भी उन्हें सम्मानित किया।
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अंतरराष्ट्रीय सांख्यिकी संगठन के निदेशक प्रो. पेड्रो सिल्वा ने उन्हें संगठन के लिए सक्रिय कार्य करने का न्योता दिया है। डॉ. कांडपाल ने इंटर तक की शिक्षा जीआईसी स्यांकोट और जीआईसी बागेश्वर से, जबकि एमएससी व पीएचडी एसएसजे कैंपस अल्मोड़ा से की।
युवा वैैज्ञानिक ने इस उपलब्धि का श्रेय अपने पिता पूरन चंद्र कांडपाल, माता गोविंदी कांडपाल, परिषद के महानिदेशक डॉ. एस गैरोला, प्रोफेसर नीरज तिवारी, रमन नौटियाल, डॉ. राजीव पांडे और डॉ. भोज को दिया है।
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बागेश्वर के द्यारिनो गांव निवासी युवा वैज्ञानिक डॉ. गिरीश चंद्र कांडपाल को सर्वे सांख्यिकी में सर्वश्रेष्ठ शोध के लिए कोकरन-हेंसन पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार अंतरराष्ट्रीय सांख्यिकी संगठन की ओर से रैंक्ड सेट सैंपलिंग से डेवलपमेंट प्रोग्राम का रेस्पांस एस्टीमेट करने के लिए प्रदान किया गया।
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यह पुरस्कार हर दो साल में एक बार विकासशील देशों के युवा शोधकर्ताओं को सर्वे सांख्यिकी में सर्वश्रेष्ठ शोध के लिए दिया जाता है। पुरस्कार प्राप्त करने वाले वह तीसरे भारतीय हैं। पुरस्कार के लिए मोरक्को में भारतीय राजदूत डॉ. खेया भट्टाचार्या ने भी उन्हें सम्मानित किया।
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अंतरराष्ट्रीय सांख्यिकी संगठन के निदेशक प्रो. पेड्रो सिल्वा ने उन्हें संगठन के लिए सक्रिय कार्य करने का न्योता दिया है। डॉ. कांडपाल ने इंटर तक की शिक्षा जीआईसी स्यांकोट और जीआईसी बागेश्वर से, जबकि एमएससी व पीएचडी एसएसजे कैंपस अल्मोड़ा से की।
युवा वैैज्ञानिक ने इस उपलब्धि का श्रेय अपने पिता पूरन चंद्र कांडपाल, माता गोविंदी कांडपाल, परिषद के महानिदेशक डॉ. एस गैरोला, प्रोफेसर नीरज तिवारी, रमन नौटियाल, डॉ. राजीव पांडे और डॉ. भोज को दिया है।