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बागेश्वर में पार्वती के संग विराजते हैं भोलेनाथ

Wed, 22 Feb 2017 10:40 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो बागेश्वर
अमर उजाला ब्यूरो बागेश्वर Updated Wed, 22 Feb 2017 10:40 PM IST
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Bageshwar with Parvati houses the Bholenath
बागेश्वर में भगवान बागनाथ के मंदिर का विहंगम दृश्य। - फोटो : अमर उजाला
 नीलेश्वर और भीलेश्वर की मनोरम पहाड़ी के मध्य सरयू, गोमती और विलुप्त सरस्वती के संगम पर बसी बागनाथ की नगरी को उत्तराखंड की दूसरी काशी कहा जाता है। यहां भोलेनाथ माता पार्वती के संग विराजते हैं। महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर यहां मेला लगता है। दूर-दूर से आने वाले शिव भक्त पवित्र संगम पर डुबकी लगाकर भगवान बागनाथ को जलार्पण कर पुण्य अर्जित करते हैं। शिव महापुराण के अनुसार जो भी भक्त मंदिर में बेलपत्री के साथ 108 लोटा जल अर्पित करके रूद्री पाठ करते हैं। भोलेनाथ उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी कर देेते हैं।
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शिव महापुराण के अनुसार बागनाथ की नगरी को उनके प्रियगण चंडीश ने बसाया था। चंडीश द्वारा बसाया गया यह नगर शिवजी को न केवल भा गया बल्कि उन्होंने इसे उत्तराखंड की दूूसरी काशी का भी दर्जा और खुद माता पार्वती के संग रहने का निश्चय किया। पहले मंदिर बहुत छोटा था चंद शासनकाल 1602 में राजा लक्ष्मी चंद ने मंदिर का भव्य निर्माण कराया। मकर संक्रांति और महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर यहां मेला लगता है। शिव भक्त संगम पर हर-हर महादेव के घोष के साथ डुबकी लगाते हैं।
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सूर्य को अर्घ्य देने के बाद वह भोलेनाथ, काल भैरवनाथ और बाणेश्वर भगवान को जलार्पण करते हैं। मंदिर में पूजा पाठ के लिए नुमाइशखेत के पांडे परिवार नियुक्त हैं। उनके नौकरी पेशा और अन्य कारोबार में लगे होने के कारण उन्होंने इसके लिए अपने भांजे को दायित्व सौंपा है। पंडित हेम चंद्र जोशी ने बताया कि शिवजी को जल अर्पित करते समय ऊं नम: शिवाय के महामंत्र का उच्चारण अवश्य करना चाहिए। हाथ में बेलपत्री के साथ 108 लोटा जल चढ़ाने से शिवजी अपने भक्तों के सारे कष्ट हर लेते हैं। जलार्पण के बाद रुद्री पाठ करना अत्यंत कल्याणकारी है।
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शिवजी को  चावल, मेवा, फल और सफेद वस्त्र जबकि कालभैरव नाथ को खिचड़ी और अपनी सामर्थ्य के अनुसार भेंट अर्पित करनी चाहिए। पूजा सपत्नीक की जाए तो और भी विशेष है। मंदिर के लिए पुजारी रावल परिवार नियुक्त हैं। श्रद्धालु अपनी मनौती पूरी होने पर मंदिर में घंटियां, शंख और पूजा के काम आने वाले बर्तन चढ़ाते हैं जबकि माघ महीने में महाखिचड़ी और खीर के भोग का भी आयोजन करते हैं। लोगों का विश्वास है कि जो भी भक्त मंदिर में सच्चे मन से जलार्पण के बाद पूजा अर्चना करता है भोलेनाथ उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी कर देते हैं।  
 
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