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देव भाषा के गीतों पर तलवारबाजी से जुगलबंदी
ब्यूरो, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Sun, 21 May 2017 01:53 AM IST
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सुर गंगा संगीत महोत्सव में कव्वाली
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देवभाषा के गीतों पर युवतियों ने तलवारबाजी और भाला से शौर्य का अनूठा प्रदर्शन किया। संस्कृत भाषा में नृत्य नाटिका के बाद कजरी और अन्य गीतों की प्रस्तुति यादगार बन गई। सुर गंगा संगीत महोत्सव की यह निशा देव भाषा को समर्पित थी।
देव भाषा पर आधारित संगीत निशा की शुरुआत श्रीपर्णा नंदी के नृत्य से हुआ। उन्होंने गणेश स्त्रोत- नमामि गणेश...पर नृत्य प्रस्तुत किया। इसके बाद पाणिनी कन्या महाविद्यालय की छात्राओं ने वेद ऋचाओं के गान से माहौल देवमय बना दिया।
उदिता, मैत्री, पूजा, अपूर्वा ने संस्कृत में कजरी की प्रस्तुति की। बीएचयू की छात्रा स्नेहलता उपाध्याय ने मां संकटा स्त्रोत की प्रस्तुति दी। महिषासुर मर्दिनी पर आधारित नृत्य नाटिकी के बाद बीएचयू के अश्विनी पांडेय ने महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की कविता -वर दे वर दे वीणा वादिनी... सुनाया। बीएचयू के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय के छात्र श्याम सुंदर पराशर ने -देवी सुरेश्वरि भगवती गंगे...को सुरों से सजाया।
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प्रिया कुमारी ने श्रीराम स्तुति -नमामि भक्त वत्सलम... पेश किया तो अश्विनी पांडेय एवं अभिषेक शर्मा ने गीत पृष्ठ वंदनम विदूहम कवचम्...की प्रस्तुति की। अभिषेक शर्मा ने मंगल गीत -जय - जय देव हरे.. सुनाया। पाणिनी कन्या महाविद्यालय की मुदिता, वैष्णवी, मैत्री, श्रद्धा ने संस्कृत में कव्वाली पेश किया। महाविद्यालय की ही छात्राओं ने प्रयाण गीत पर आधारित नारी शक्ति का प्रदर्शन किया। प्रयाण गीत पर पूजा, नंदिनी, धृति एवं दामिनी ने तलवारबाजी की। प्रो. हरिप्रसाद अधिकारी के निर्देशन में संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के छात्रों आशीष मणि त्रिपाठी, अभिषेक उपाध्याय, संतोष ब्रह्मचारी, रविकांत भारद्वाज, अभिषेक मणि त्रिपाठी ने मंगलाचरण और फिर संस्कृत गीत प्रस्तुत किया। प्रशस्ति तिवारी ने कथक से मोहित कर लिया।
दुर्गा सप्तशती के रतिसूक्तम पर आधारित मां दुर्गा के स्वरूपों की प्रस्तुति दी। तबले पर श्याम कुमार मिश्रा, गायन पर शिवम ने संगत की। इस मौके पर सतुआ बाबा संतोष दास, ईश्वर दास, राम लोचन दास, सर्वेश्वर शरण, अवधबिहारी दास, बालक दास, आचार्य नन्दिता शास्त्री जी का अभिनन्दन किया गया।
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देव भाषा पर आधारित संगीत निशा की शुरुआत श्रीपर्णा नंदी के नृत्य से हुआ। उन्होंने गणेश स्त्रोत- नमामि गणेश...पर नृत्य प्रस्तुत किया। इसके बाद पाणिनी कन्या महाविद्यालय की छात्राओं ने वेद ऋचाओं के गान से माहौल देवमय बना दिया।
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उदिता, मैत्री, पूजा, अपूर्वा ने संस्कृत में कजरी की प्रस्तुति की। बीएचयू की छात्रा स्नेहलता उपाध्याय ने मां संकटा स्त्रोत की प्रस्तुति दी। महिषासुर मर्दिनी पर आधारित नृत्य नाटिकी के बाद बीएचयू के अश्विनी पांडेय ने महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की कविता -वर दे वर दे वीणा वादिनी... सुनाया। बीएचयू के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय के छात्र श्याम सुंदर पराशर ने -देवी सुरेश्वरि भगवती गंगे...को सुरों से सजाया।
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प्रिया कुमारी ने श्रीराम स्तुति -नमामि भक्त वत्सलम... पेश किया तो अश्विनी पांडेय एवं अभिषेक शर्मा ने गीत पृष्ठ वंदनम विदूहम कवचम्...की प्रस्तुति की। अभिषेक शर्मा ने मंगल गीत -जय - जय देव हरे.. सुनाया। पाणिनी कन्या महाविद्यालय की मुदिता, वैष्णवी, मैत्री, श्रद्धा ने संस्कृत में कव्वाली पेश किया। महाविद्यालय की ही छात्राओं ने प्रयाण गीत पर आधारित नारी शक्ति का प्रदर्शन किया। प्रयाण गीत पर पूजा, नंदिनी, धृति एवं दामिनी ने तलवारबाजी की। प्रो. हरिप्रसाद अधिकारी के निर्देशन में संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के छात्रों आशीष मणि त्रिपाठी, अभिषेक उपाध्याय, संतोष ब्रह्मचारी, रविकांत भारद्वाज, अभिषेक मणि त्रिपाठी ने मंगलाचरण और फिर संस्कृत गीत प्रस्तुत किया। प्रशस्ति तिवारी ने कथक से मोहित कर लिया।
दुर्गा सप्तशती के रतिसूक्तम पर आधारित मां दुर्गा के स्वरूपों की प्रस्तुति दी। तबले पर श्याम कुमार मिश्रा, गायन पर शिवम ने संगत की। इस मौके पर सतुआ बाबा संतोष दास, ईश्वर दास, राम लोचन दास, सर्वेश्वर शरण, अवधबिहारी दास, बालक दास, आचार्य नन्दिता शास्त्री जी का अभिनन्दन किया गया।