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एक महीने बाद भी खत्म नहीं हुईं जीएसटी की खामियां
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Wed, 02 Aug 2017 03:30 PM IST
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gst
- फोटो : सोशल मीडिया
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जीएसटी लागू हुए एक महीना बीत गया है लेकिन बनारस में 90 हजार व्यापारियों और उद्यमियों में से 15 हजार से ज्यादा को अभी तक जीएसटी नंबर ही नहीं मिल पाया है। इसके चलते बाजार और व्यवस्था में कई मुद्दों पर संशय की स्थिति बनी हुई है।
हालांकि उद्यमी-व्यापारी जीएसटी विशेषज्ञों और अपने नेताओं के चक्कर काट रहे हैं। असमंजस के कारण केराना मार्केट सहित सभी बाजारों में थोक माल कम मात्रा में मंगाया जा रहा है।
व्यापारियों ने जीएसटी नंबर के लिए नई व्यवस्था लागू होने से पहले ही आवेदन किया था लेकिन अभी तक जीएसटी नंबर न मिलने और प्रावधानों की स्पष्ट जानकारी न होने से समस्या बरकरार है। इनमें पांच हजार व्यापारी ऐसे हैं, जिन्हें पैन अपडेट न होने से जीएसटी नंबर नहीं मिल सका है।
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वैसे जीएसटी नंबर नहीं मिलने तक व्यापारियों को टिन नंबर पर व्यवसाय करने की छूट दी गई है। व्यापारियों की समस्याओं के समाधान के लिए हेल्प डेस्क बनाई गई हैं लेकिन कई सवालों के जवाब यहां भी नहीं मिल पा रहे हैं।
उधर, ज्वाइंट कमिश्नर वीके शुक्ला और असिस्टेंट कमिश्नर सीमा सरोज ने बताया कि जीएसटी नंबर देने के साथ-साथ व्यापारियों को जीएसटी के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
व्यापारियों को डरा रहा ई-वे बिल
केंद्र सरकार ने प्रदेश सरकार को तीन महीने तक की छूट देने की बात कही है लेकिन अचानक ई-वे बिल की व्यवस्था लागू कर दी गई। जीएसटी नंबर न मिल पाने की वजह से 15 अगस्त तक ई-वे बिल में राहत तो दे दी गई है पर अभी व्यापारी इसके लिए तैयार नही हैं।
चार्टर्ड एकाउंटेंट सुदेशना बासु बताती हैं कि ऑनलाइन सेल्फ हेल्प डेस्क पर सभी जानकारी उपलब्ध है। व्यापारी यहां रजिस्ट्रेशन आसानी से करा सकते हैं। जानकारों का कहना है कि रिटर्न और ई-वे बिल एक-दो बार भरने के बाद समस्याएं कम हो जाएंगी।
रिटर्न ने बढ़ाया तनाव
अगस्त शुरू होते ही जीएसटी के तहत रिटर्न भरने का तनाव भी व्यापारियों के चेहरे पर झलकने लगा है। हालांकि विभाग का कहना है कि रिटर्न भरने का फार्मेट काफी सरल है। इस बार जीएसटीआर के तहत रिटर्न भरना होगा। जुलाई का रिटर्न 30 अगस्त और अगस्त का रिटर्न 30 सितंबर तक दाखिल करना है।
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हालांकि उद्यमी-व्यापारी जीएसटी विशेषज्ञों और अपने नेताओं के चक्कर काट रहे हैं। असमंजस के कारण केराना मार्केट सहित सभी बाजारों में थोक माल कम मात्रा में मंगाया जा रहा है।
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व्यापारियों ने जीएसटी नंबर के लिए नई व्यवस्था लागू होने से पहले ही आवेदन किया था लेकिन अभी तक जीएसटी नंबर न मिलने और प्रावधानों की स्पष्ट जानकारी न होने से समस्या बरकरार है। इनमें पांच हजार व्यापारी ऐसे हैं, जिन्हें पैन अपडेट न होने से जीएसटी नंबर नहीं मिल सका है।
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वैसे जीएसटी नंबर नहीं मिलने तक व्यापारियों को टिन नंबर पर व्यवसाय करने की छूट दी गई है। व्यापारियों की समस्याओं के समाधान के लिए हेल्प डेस्क बनाई गई हैं लेकिन कई सवालों के जवाब यहां भी नहीं मिल पा रहे हैं।
उधर, ज्वाइंट कमिश्नर वीके शुक्ला और असिस्टेंट कमिश्नर सीमा सरोज ने बताया कि जीएसटी नंबर देने के साथ-साथ व्यापारियों को जीएसटी के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
व्यापारियों को डरा रहा ई-वे बिल
केंद्र सरकार ने प्रदेश सरकार को तीन महीने तक की छूट देने की बात कही है लेकिन अचानक ई-वे बिल की व्यवस्था लागू कर दी गई। जीएसटी नंबर न मिल पाने की वजह से 15 अगस्त तक ई-वे बिल में राहत तो दे दी गई है पर अभी व्यापारी इसके लिए तैयार नही हैं।
चार्टर्ड एकाउंटेंट सुदेशना बासु बताती हैं कि ऑनलाइन सेल्फ हेल्प डेस्क पर सभी जानकारी उपलब्ध है। व्यापारी यहां रजिस्ट्रेशन आसानी से करा सकते हैं। जानकारों का कहना है कि रिटर्न और ई-वे बिल एक-दो बार भरने के बाद समस्याएं कम हो जाएंगी।
रिटर्न ने बढ़ाया तनाव
अगस्त शुरू होते ही जीएसटी के तहत रिटर्न भरने का तनाव भी व्यापारियों के चेहरे पर झलकने लगा है। हालांकि विभाग का कहना है कि रिटर्न भरने का फार्मेट काफी सरल है। इस बार जीएसटीआर के तहत रिटर्न भरना होगा। जुलाई का रिटर्न 30 अगस्त और अगस्त का रिटर्न 30 सितंबर तक दाखिल करना है।
बदल गया बाजार, सही दाम का इंतजार
रेडीमेड गारमेंट्स में लगे रेट के टैग बदले
- फोटो : अमर उजाला
जीएसटी लागू होने के बाद बहुत से उत्पाद और सेवाएं महंगी हो गई हैं। सब्जियों के दाम बढ़ा दिए गए हैं। रेडीमेड गारमेंट्स में लगे रेट के टैग बदल दिए गए हैं। यही हाल तंबाकू उत्पादों का है। अलग-अलग दूकानों पर सिगरेट और गुटका अलग-अलग दाम में बेचा जा रहे हैं।
इसी प्रकार रेस्टोरेंट में खान-पान में ग्राहकों को अभी राहत नहीं दी जा रही है। कम बजट के होटलों के रेट में भी कोई अंतर नहीं आया है। दाल, तेल और बिस्कुट जीएसटी के बाद सस्ते हो गए हैं।
ब्रांडेड उत्पादों में नियमत: जीएसटी कम या अधिक किया गया है। पहले जूते-चप्पलों पर 14.5 फीसदी टैक्स लगता था लेकिन अब जीएसटी के बाद 500 से कम कीमत वाले जूते-चप्पलों पर पांच फीसदी और उससे ज्यादा पर 18 फीसदी टैक्स लग रहा है।
यानी जीएसटी से पहले 400 रुपये का जो जूता 458 रुपये में मिलता, वह अब 420 रुपये में ही खरीदा जा सकता है। दूसरी तरफ 600 रुपये का जूता जीएसटी से पहले 687 रुपये में आता लेकिन अब 708 रुपये में उपलब्ध है।
बिग बाजार में लोग इस तरह की शॉपिंग का लुत्फ उठा रहे हैं। महमूरगंज की रेवती बताती हैं कि जीएसटी के बाद कई सामानों के लिए उन्हें कम पैसे खर्च करने पड़े हैं।
पिछले दस साल से जयपुरी रजाइयों पर कोई भी टैक्स नहीं था लेकिन जीएसटी के बाद एक हजार से कम कीमत वाली रजाई पर पांच फीसदी, एक हजार से ज्यादा कीमत वाली रजाई पर 12 फीसदी, फाइबर रुई से बनी रजाई पर 28 फीसदी, देसी रुई से बनी रजाई पर 18 फीसदी टैक्स लग रहा है।
रिटर्न की तारीख बढ़ने से आम लोगों को राहत
इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की आखिरी तारीख 31 जुलाई से बढ़ाकर पांच अगस्त कर देने से आम लोगों को खासा राहत हुई है। इसके बाद लोग ऑनलाइन रिटर्न दाखिल कर रहे हैं। दिक्कत आने पर ही एक्सपर्ट की मदद ले रहे हैं।
आईटीआर की वेबसाइट में आ रही दिक्कतों ओर अन्य वजहों से अब इसे फाइल करने की तारीख बढ़ा दी गई है। आम तौर पर एक वेतनभोगी कर्मचारी की नजर में इनकम टैक्स फाइल करनेे के लिए नियोक्ता द्वारा किया गया फार्म-16 ही अहम होता है।
ऑनलाइन इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने के लिए सबसे पहले इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की वेबसाइट पर जाकर स्वयं का रिजस्ट्रेशन कराएं। इसका यूजर आईडी आपका पैन नंबर होगा। ऑनलाइन आईटीआर फाइल करने के दो खास तरीके हैं।
पहले तरीके के सबसे पहले लॉग इन करें और डाउनलोड में जाकर जरूरी फॉर्म को सेलेक्ट करें। इसमें जरूरी जानकारियां भरें और जनरेट एक्सएमएल पर क्लिक करें। दूसरे तरीके के लिए वेबसाइट पर क्विक ई-फाइल सेक्शन में जाएं, लॉग-इन करें, फॉर्म सेलेक्ट करें और फिर असेसमेंट इयर सेलेक्ट करें।
अन्य डिटेल भरें। आगे आपको इनकम के सोर्स को चुनना होगा। सैलरी, पेंशन, प्रॉपर्टी है तो आईटीआर 1 फॉर्म सेलेक्ट करें जिसको सहज नाम से भी जाना जाता है। इसके अलावा यदि किसी कैपिटल गेन से कमाई होती है तो आईटीआर फॉर्म 2 सेलेक्ट करें।
आईटीआर की वेबसाइट में आ रही दिक्कतों ओर अन्य वजहों से अब इसे फाइल करने की तारीख बढ़ा दी गई है। आम तौर पर एक वेतनभोगी कर्मचारी की नजर में इनकम टैक्स फाइल करनेे के लिए नियोक्ता द्वारा किया गया फार्म-16 ही अहम होता है।
ऑनलाइन इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने के लिए सबसे पहले इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की वेबसाइट पर जाकर स्वयं का रिजस्ट्रेशन कराएं। इसका यूजर आईडी आपका पैन नंबर होगा। ऑनलाइन आईटीआर फाइल करने के दो खास तरीके हैं।
पहले तरीके के सबसे पहले लॉग इन करें और डाउनलोड में जाकर जरूरी फॉर्म को सेलेक्ट करें। इसमें जरूरी जानकारियां भरें और जनरेट एक्सएमएल पर क्लिक करें। दूसरे तरीके के लिए वेबसाइट पर क्विक ई-फाइल सेक्शन में जाएं, लॉग-इन करें, फॉर्म सेलेक्ट करें और फिर असेसमेंट इयर सेलेक्ट करें।
अन्य डिटेल भरें। आगे आपको इनकम के सोर्स को चुनना होगा। सैलरी, पेंशन, प्रॉपर्टी है तो आईटीआर 1 फॉर्म सेलेक्ट करें जिसको सहज नाम से भी जाना जाता है। इसके अलावा यदि किसी कैपिटल गेन से कमाई होती है तो आईटीआर फॉर्म 2 सेलेक्ट करें।