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मां अन्नापूर्णा का दर्शन: एक साल बाद स्वर्णमयी प्रतिमा को देख श्रद्धालु निहाल, दरबार के खजाने से बांटे गए सिक्के

Tue, 02 Nov 2021 09:13 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Tue, 02 Nov 2021 09:13 PM IST
सार

काशी विश्वनाथ के आंगन में विराजमान मां अन्नपूर्णा का दरबार मंगलवार को मंगला आरती के बाद से भक्तों के लिए खोल दिया गया। माता के दर्शन के लिए भक्त सोमवार  दोपहर से ही कतारबद्ध हो गए थे। 

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Devotees became happy after seeing Mata Annapurneshwari
माता अन्नपूर्णेश्वरी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अन्न-धन की देवी मां अन्नापूर्णा के दरबार में धनतेरस पर भक्तों ने सुख सौभाग्य की कामना की। मंगलवार को माता के दरबार में उनके खजाने से सिक्के वितरित किए गए। मां के दर्शन कर भक्त निहाल हुए और श्रीवृद्धि के साथ ही कोरोना के खात्मे की प्रार्थना की। काशी विश्वनाथ के आंगन में विराजमान मां अन्नपूर्णा का दरबार मंगलवार को मंगला आरती के बाद से भक्तों के लिए खोल दिया गया।
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महंत शंकरपुरी ने मां की आरती उतारी। 21 डमरू की ध्वनि से माता का दरबार गूंज उठा। अन्नकूट तक भोर में चार से रात 11 बजे तक माता के दर्शन होंगे। भक्त सोमवार दोपहर से ही कतारबद्ध हो गए थे। मंगलवार देर शाम तक श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए लाइन में बारी का इंतजार कर रहे थे। 
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वर्ष में सिर्फ चार दिन होते हैं दर्शन
मान्यता है कि काशी नगरी के पालन-पोषण के लिए देवाधिदेव ने मां अन्नपूर्णा से भिक्षा मांगी थी। मंदिर के गर्भगृह में मां अन्नपूर्णा की ममतामयी छवियुक्त ठोस स्वर्ण प्रतिमा कमलासन पर विराजमान और रजत शिल्प में ढले भगवान शिव की झोली में अन्नदान की मुद्रा में हैं।                      
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मां के दर्शन के लिए कतार में खड़े लोग - फोटो : अमर उजाला
दाईं ओर मां लक्ष्मी और बाईं तरफ भूदेवी का स्वर्ण विग्रह है। इस दरबार के दर्शन वर्ष में सिर्फ चार दिन धनतेरस से अन्नकूट तक ही होते हैं। पहले दिन धान का लावा, बताशे के साथ मां के खजाने का सिक्का प्रसाद स्वरूप वितरित करने की परंपरा है।                          

ये है मान्यता

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मां के दरबार में प्रसाद वितरित करते महंत - फोटो : अमर उजाला
काशी में सदाशिव के साथ मां पार्वती अन्नपूर्णा के स्वरूप में विराजती हैं। दाएं ओर मां लक्ष्मी और बाएं ओर भूदेवी का स्वर्णविग्रह है। भगवान शिव स्वयं याचक के रूप में विराजमान हैं। धनतेरस पर माता के स्वर्णमयी स्वरूप के दर्शन आरंभ हो गए हैं। अन्नकूट तक भक्त माता के भव्य दरबार के दर्शन कर अन्न और धन के खजाने का प्रसाद प्राप्त कर सकते हैं। मान्यता है कि अन्न के प्रसाद को अन्न भंडार में रखने से अन्न की बढ़ोत्तरी होती है तो वहीं धन के खजाने को धन स्थान पर रखने से श्री की वृद्धि।
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