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दस मई को दवा दुकानें रहेंगी बंद
Shahjahanpur
Updated Sun, 05 May 2013 05:30 AM IST
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जिला केमिस्ट एसोसिएशन की बैठक में प्रस्ताव पारित
- दवा व्यवसाय को एफडीआई से मुक्त कराने की मांग
अमर उजाला ब्यूरो
शाहजहांपुर। दशकों पुराने ड्रग कंट्रोल एक्ट में संशोधन कर मेडिकल स्टोर्स पर फार्मेसिस्ट की अनिवार्यता समाप्त किए जाने, दवा व्यवसाय को खाद्य एवं औषधि नियंत्रण कानून (एफडीआई) से मुक्त करने, वर्ष 2008 में संशोधित दवा कानून में सुधार होने, नई दवा नीति में विक्रेताओं का लाभांश यथावत रखे जाने आदि मांगों को लेकर जिले के दवा व्यापारी दस मई को सांकेतिक बंदी कर मुख्यालय पर प्रदर्शन करेंगे।
यह फैसला जिला केमिस्ट एसोसिएशन की शनिवार को एक होटल में हुई आपात बैठक में इस आशय का प्रस्ताव पारित हुआ। इस मौके पर एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष संतोष वर्मा और महामंत्री सुनील गुप्ता ने पत्रकारों के समक्ष कहा कि सन 1945 में बने औषधि नियंत्रण कानून में मेडिकल स्टोर्स पर फार्मेसिस्ट की अनिवार्यता इसलिए की गई क्योंकि तब दवाओं और सीरप के मिश्रण तैयार होते थे जिसमें मात्रा का संतुलन बनाए रखना जरूरी था। अब सारी दवाएं विभिन्न मात्राओं और पैकिंग में आ रही हैं जिन्हें हाईस्कूल पास कोई भी दवा विक्रेता डॉक्टर का पर्चा पढ़कर दे सकता है।
श्री गुप्ता ने कहा कि प्रदेश में 1.30 लाख दवा प्रतिष्ठान हैं जबकि फार्मेसिस्ट केवल 17 हजार। सन 2002 बैच के सारे फार्मेसिस्ट सरकारी सेवाओं में चले गए जिससे उनकी और कमी हो गई। इसके बावजूद विभाग ड्रग लाइसेंस लगातार दे रहा है, लेकिन किसी फार्मेसिस्ट का एक से अधिक दुकानों पर रजिस्ट्रेशन मिलने पर फार्मेसिस्ट के बजाय दवा विक्रेता को प्रताड़ित करने की कोशिश करता है।
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जिलाध्यक्ष श्री वर्मा ने कहा कि बगैर लाइसेंस नए मेडिकल स्टोर खुलते जा रहे हैं। ऐसे स्टोर्स की संगठन से ड्रग इंस्पेक्टर को सूची भी दी गई, लेकिन कार्यवाही नहीं हुई। दूसरी ओर लाइसेंसी विक्रेता की मामूली शिकायत पर इस तरह छापेमारी की जाती है, मानो बहुत बड़ा अपराध किया हो। अब दवा व्यवसाय एफडीआई के अधीन लाया जा रहा जबकि कोई भी दवा विक्रेता निर्माता की भूमिका में नहीं हैं। सरकार की इन्हीं अन्यायपूर्ण नीतियों के विरोध में आल इंडिया आर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट के आवाहन पर दस मई को देश भर के दवा प्रतिष्ठान बंद रहेंगे।
महामंत्री ने बताया कि बंदी सफल बनाने को मुख्यालय सहित सभी तहसीलों के दवा व्यापारी नौ मई को शाम दुपहिया वाहनों की रैली निकालेंगे। दस को जिला मुख्यालय पर खिरनीबाग स्थित अलका गेस्ट हाउस से जुलूस लेकर कलक्ट्रेट जाएंगे और वहां प्रदर्शन करके डीएम को प्रधानमंत्री और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री के नाम ज्ञापन देंगे। बैठक और वार्ता में सुलेमान खां, पुरुषोत्तम गुप्ता, नवीन गुप्ता, आलोक गुप्ता, विनोद तुली, संजय गुप्ता, विशाल गुप्ता, गोविंद मोहन, लक्ष्मण प्रसाद, कृष्ण मोहन, अमृत लाल आदि मौजूद रहे।
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- दवा व्यवसाय को एफडीआई से मुक्त कराने की मांग
अमर उजाला ब्यूरो
शाहजहांपुर। दशकों पुराने ड्रग कंट्रोल एक्ट में संशोधन कर मेडिकल स्टोर्स पर फार्मेसिस्ट की अनिवार्यता समाप्त किए जाने, दवा व्यवसाय को खाद्य एवं औषधि नियंत्रण कानून (एफडीआई) से मुक्त करने, वर्ष 2008 में संशोधित दवा कानून में सुधार होने, नई दवा नीति में विक्रेताओं का लाभांश यथावत रखे जाने आदि मांगों को लेकर जिले के दवा व्यापारी दस मई को सांकेतिक बंदी कर मुख्यालय पर प्रदर्शन करेंगे।
यह फैसला जिला केमिस्ट एसोसिएशन की शनिवार को एक होटल में हुई आपात बैठक में इस आशय का प्रस्ताव पारित हुआ। इस मौके पर एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष संतोष वर्मा और महामंत्री सुनील गुप्ता ने पत्रकारों के समक्ष कहा कि सन 1945 में बने औषधि नियंत्रण कानून में मेडिकल स्टोर्स पर फार्मेसिस्ट की अनिवार्यता इसलिए की गई क्योंकि तब दवाओं और सीरप के मिश्रण तैयार होते थे जिसमें मात्रा का संतुलन बनाए रखना जरूरी था। अब सारी दवाएं विभिन्न मात्राओं और पैकिंग में आ रही हैं जिन्हें हाईस्कूल पास कोई भी दवा विक्रेता डॉक्टर का पर्चा पढ़कर दे सकता है।
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श्री गुप्ता ने कहा कि प्रदेश में 1.30 लाख दवा प्रतिष्ठान हैं जबकि फार्मेसिस्ट केवल 17 हजार। सन 2002 बैच के सारे फार्मेसिस्ट सरकारी सेवाओं में चले गए जिससे उनकी और कमी हो गई। इसके बावजूद विभाग ड्रग लाइसेंस लगातार दे रहा है, लेकिन किसी फार्मेसिस्ट का एक से अधिक दुकानों पर रजिस्ट्रेशन मिलने पर फार्मेसिस्ट के बजाय दवा विक्रेता को प्रताड़ित करने की कोशिश करता है।
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जिलाध्यक्ष श्री वर्मा ने कहा कि बगैर लाइसेंस नए मेडिकल स्टोर खुलते जा रहे हैं। ऐसे स्टोर्स की संगठन से ड्रग इंस्पेक्टर को सूची भी दी गई, लेकिन कार्यवाही नहीं हुई। दूसरी ओर लाइसेंसी विक्रेता की मामूली शिकायत पर इस तरह छापेमारी की जाती है, मानो बहुत बड़ा अपराध किया हो। अब दवा व्यवसाय एफडीआई के अधीन लाया जा रहा जबकि कोई भी दवा विक्रेता निर्माता की भूमिका में नहीं हैं। सरकार की इन्हीं अन्यायपूर्ण नीतियों के विरोध में आल इंडिया आर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट के आवाहन पर दस मई को देश भर के दवा प्रतिष्ठान बंद रहेंगे।
महामंत्री ने बताया कि बंदी सफल बनाने को मुख्यालय सहित सभी तहसीलों के दवा व्यापारी नौ मई को शाम दुपहिया वाहनों की रैली निकालेंगे। दस को जिला मुख्यालय पर खिरनीबाग स्थित अलका गेस्ट हाउस से जुलूस लेकर कलक्ट्रेट जाएंगे और वहां प्रदर्शन करके डीएम को प्रधानमंत्री और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री के नाम ज्ञापन देंगे। बैठक और वार्ता में सुलेमान खां, पुरुषोत्तम गुप्ता, नवीन गुप्ता, आलोक गुप्ता, विनोद तुली, संजय गुप्ता, विशाल गुप्ता, गोविंद मोहन, लक्ष्मण प्रसाद, कृष्ण मोहन, अमृत लाल आदि मौजूद रहे।