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इस बार इको फ्रेंडली प्रतिमाओं के साथ मनेगा दुर्गापूजा समारोह

Sun, 10 Sep 2017 11:47 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़ Updated Sun, 10 Sep 2017 11:47 PM IST
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now eco friendly idol in durga pooja
प्रतापगढ़ - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
इस बार दुर्गापूजा के मौके पर इको फ्रेंडली प्रतिमाएं देखने को मिलेंगी। मां दुर्गा के सिंहासन के रूप में वृक्ष भी नजर आएंगे। कोलकाता और मुंबई से आए मूर्तिकार इन दिनों दुर्गा पूजा के जरिए पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने की कवायद में जुटे हैं। प्रतिमाओं के निर्माण में प्रदूषण को ध्यान में रखते हुए प्लास्टिक और रबर पेंट के बजाए हर्बल कलर का इस्तेमाल किया जा रहा है।
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पितृपक्ष समाप्त होते ही शारदीय नवरात्रि की शुरुआत हो जाएगी। 21 सितंबर से शहर से लेकर गांव तक जगह-जगह पंडालों में मां दुर्गा की प्रतिमाएं स्थापित कर पूजन किया जाएगा। इस महापर्व को लेकर तैयारियां अभी से शुरू हैं। पंडाल समितियां नौ दिवसीय महापर्व के आयोजन की तैयारी को लेकर चर्चा कर रही हैं तो मूर्तिकार पंडालों में स्थापित होने वाली दुर्गा प्रतिमाओं को आकार देने में जुटे हैं। उनका कहना है कि सालभर की कमाई का यह पीक समय होता है। शहर के चिलबिला, पीडब्ल्यूडी कार्यालय के बगल, बाबागंज, स्टेशनरोड आदि स्थानों पर पंडाल बनाकर कारीगर प्रतिमाओं को तैयार कर रहे हैं।
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कोलकाता और मुंबई से आए कारीगरों में बेहतर प्रतिमा तैयार करने को लेकर होड़ मची हुई है। गौर करने वाली बात यह है कि तगड़ी प्रतिस्पर्धा होने के बाद भी मूर्तिकार इस बार दुर्गापजा के जरिए पर्याव्ररण संरक्षण का संदेश देने के प्रयास में जुटे हैं। इसके लिए इको फ्रेंडली प्रतिमाएं तैयार की जा रही हैं। जल को दूषित करने वाले केमिकल, पेंट वाले कलर, प्लास्टिक कोटेड पेंट, रबर पेंट के  इस्तेमाल से गुरेज किया जा रहा है। मूर्तिकार एसके पाल ने बताया कि पहले पेंट वाले कलर, प्लास्टिक कोटेड कलर, रबर पेंट सहित चमकाने व सजाने में वर्निश, किरकि री आदि का प्रयोग खूब किया जाता था। ये तव्व पानी में घुलते नहीं थे और दूषित करते थे। हालांकि इनके इस्तेमाल से प्रतिमाओं को तैयार करने में मेहनत कम करनी पड़ती थी। रंग-बिरंगे पेंटों के सहारे कम समय में आकर्षक प्रतिमाएं तैयार कर ली जाती थीं। उनमें भव्यता आ जाती थी। मगर इस बार मूर्तियों को चमकाने में के मिकल पेंट के बजाए हर्बल रंग का इस्तेमाल हो रहा है। मूर्तिकार लल्लन, तपुसपाल, दीपांकर, सुजाईपाल, भीमपाल ने बताया कि हर्बल कलर के इस्तेमाल और जीतोड़ मेहनत कर प्रतिमाओं को चमकाने का प्रयास किया जा रहा है।  रहे है।
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