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सीएम की 571, पीएम की 172 शिकायतें दबाकर बैठे हैं अफसर
Updated Mon, 21 Aug 2017 07:31 PM IST
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प्रतापगढ़। शिकायतों के निस्तारण में फिसड्डी रहने वाले जिले में प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री से अपनी व्यथा सुनाने वालों की भी बात नहीं सुनी जा रही है। अधिकारियों की लापरवाही का आलम यह है कि वह शिकायतों का निस्तारण करने के बजाए दबाकर बैठ जाते हैं। जिसका नतीजा है कि 3,206 शिकायतें अभी भी लंबित हैं।
जिले में शिकायत करने वालों की संख्या में हर दिन इजाफा हो रहा है। शिकायतें प्रतिदिन इतनी क्यों बढ़ रही हैं, इस बात से अधिकारी अनभिज्ञ हैं। अधिकांश मामलों में यह देखने को मिल रहा है कि जिसकी शिकायत एसडीएम और डीएम के यहां हो रही है वही शिकायतें मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के पास भी पहुंच रही हैं। पीएम और सीएम के पास शिकायतें पहुंचती है तो वहां से डीएम के पास भेज दी जाती हैं। मगर अधिकारी हैं कि वह सिर्फ रिपोर्ट में लेने और देने तक ही सीमित रहते हैं। बीते सौ दिनों में आईं शिकायतों पर नजर डाली जाए तो कुल 19,137 शिकायतें जिले के अधिकारियों के पास पहुंचीं। इनमें से 15,931 शिकायतों का निस्तारण किया गया और 3206 शिकायतें अभी भी लंबित हैं।
दरअसल, कोई भी शिकायत आने के बाद अधिकारी अपने नीचे के अधिकारी से रिपोर्ट तलब करते हैं। रिपोर्ट तलबी का सिलसिला लगातार चलता रहता है, इससे शिकायतकर्ता परेशान होकर पुन: शिकायत करने पहुंच जाते हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पास ऑनलाइन और ऑफलाइन 1423 शिकायतें पहुंची, इनमें से 571 शिकायतों का अभी तक निस्तारण नहीं हो पाया है। इसी तरह प्रधानमंत्री कार्यालय से आने वाली 172 शिकायतों का भी निस्तारण नहीं हो सका है। पीड़ित व्यक्ति को राहत नहीं मिलने के कारण वह शिकायत पर शिकायत करता जाता है। जैसे मुख्यमंत्री के पास से आने वाली शिकायत डीएम के पास आती है, डीएम से इसे एसडीएम, एसडीएम से तहसीलदार, फिर नायब तहसीलदार, फिर राजस्व निरीक्षण, लेखपाल के पास भेजा जाता है। लेखपाल शिकायत का निस्तारण नहीं करता है, इसलिए पुन: वही प्रक्रिया प्रारंभ होती है। इससे फरियादियों को न्याय नहीं मिलता है। वहीं राम सिंह वर्मा सीआरओ और प्रभारी शिकायत प्रकोष्ठ का कहना है कि शिकायतों का निस्तारण किया जा रहा है, जितनी शिकायतें निपटाई जा रही हैं, उससे कहीं अधिक बढ़ती जा रही हैं। निस्तारण में दिलचस्पी नहीं दिखाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। पांच एसडीएम का वेतन रोका गया है। पांच विभागों के मुखिया को बैडइंट्री दी गई है।
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बीते 100 दिनों में शिकायतों और निस्तारण पर एक नजर
शिकायत के प्रकार प्राप्त शिकायतें निस्तारित लंबित
मुख्यमंत्री कार्यालय 1423 852 517
प्रधानमंत्री कार्यालय 672 500 172
डीएम 3757 3262 495
तहसील दिवस 9743 8578 1165
ऑनलाइन जिलेस्तर पर 2151 1429 722
राजस्व परिषद लखनऊ 140 116 24
मंडलायुक्त 49 39 10
एंटीभू-माफिया 71 45 26
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जिले में शिकायत करने वालों की संख्या में हर दिन इजाफा हो रहा है। शिकायतें प्रतिदिन इतनी क्यों बढ़ रही हैं, इस बात से अधिकारी अनभिज्ञ हैं। अधिकांश मामलों में यह देखने को मिल रहा है कि जिसकी शिकायत एसडीएम और डीएम के यहां हो रही है वही शिकायतें मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के पास भी पहुंच रही हैं। पीएम और सीएम के पास शिकायतें पहुंचती है तो वहां से डीएम के पास भेज दी जाती हैं। मगर अधिकारी हैं कि वह सिर्फ रिपोर्ट में लेने और देने तक ही सीमित रहते हैं। बीते सौ दिनों में आईं शिकायतों पर नजर डाली जाए तो कुल 19,137 शिकायतें जिले के अधिकारियों के पास पहुंचीं। इनमें से 15,931 शिकायतों का निस्तारण किया गया और 3206 शिकायतें अभी भी लंबित हैं।
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दरअसल, कोई भी शिकायत आने के बाद अधिकारी अपने नीचे के अधिकारी से रिपोर्ट तलब करते हैं। रिपोर्ट तलबी का सिलसिला लगातार चलता रहता है, इससे शिकायतकर्ता परेशान होकर पुन: शिकायत करने पहुंच जाते हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पास ऑनलाइन और ऑफलाइन 1423 शिकायतें पहुंची, इनमें से 571 शिकायतों का अभी तक निस्तारण नहीं हो पाया है। इसी तरह प्रधानमंत्री कार्यालय से आने वाली 172 शिकायतों का भी निस्तारण नहीं हो सका है। पीड़ित व्यक्ति को राहत नहीं मिलने के कारण वह शिकायत पर शिकायत करता जाता है। जैसे मुख्यमंत्री के पास से आने वाली शिकायत डीएम के पास आती है, डीएम से इसे एसडीएम, एसडीएम से तहसीलदार, फिर नायब तहसीलदार, फिर राजस्व निरीक्षण, लेखपाल के पास भेजा जाता है। लेखपाल शिकायत का निस्तारण नहीं करता है, इसलिए पुन: वही प्रक्रिया प्रारंभ होती है। इससे फरियादियों को न्याय नहीं मिलता है। वहीं राम सिंह वर्मा सीआरओ और प्रभारी शिकायत प्रकोष्ठ का कहना है कि शिकायतों का निस्तारण किया जा रहा है, जितनी शिकायतें निपटाई जा रही हैं, उससे कहीं अधिक बढ़ती जा रही हैं। निस्तारण में दिलचस्पी नहीं दिखाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। पांच एसडीएम का वेतन रोका गया है। पांच विभागों के मुखिया को बैडइंट्री दी गई है।
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मुख्यमंत्री कार्यालय 1423 852 517
प्रधानमंत्री कार्यालय 672 500 172
डीएम 3757 3262 495
तहसील दिवस 9743 8578 1165
ऑनलाइन जिलेस्तर पर 2151 1429 722
राजस्व परिषद लखनऊ 140 116 24
मंडलायुक्त 49 39 10
एंटीभू-माफिया 71 45 26