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अब हाईवे से सटे प्लाट में बनेगा सिद्धबाबा मंदिर
ब्यूरो /पीलीभीत
Updated Thu, 01 Jun 2017 10:20 PM IST
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अब हाईवे से सटे प्लाट में बनेगा सिद्धबाबा मंदिर
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असम हाईवे पर पीडब्ल्यूडी की जमीन पर बने सिद्धबाबा मंदिर को अतिक्रमण विरोधी अभियान के तहत तोड़े जाने के बाद हुए बवाल का अंतत: पटाक्षेप हो गया। बृहस्पतिवार को डीएम और एसपी के साथ विहिप, हिजामं समेत कई संगठनों के नेताओं की काफी देर तक बातचीत हुई। जिसके बाद पीछे के प्लाट पर मंदिर निर्माण कराने की बात पर फैसला हो सका। वार्ता के दौरान डीएम कार्यालय में मौजूद प्लाट स्वामी ने मंदिर के नाम जमीन देने की बात कही।
23 मई को पूरनपुर गेट पुलिस चौकी के पास बने सिद्धबाबा मंदिर को डीएम के आदेश पर नायब तहसीलदार अनुराग की अगुवाई में पहुंची टास्क फोर्स ने तोड़ दिया था। मंदिर के सरकारी जमीन पर बना होने की बात कही गई थी। इसके अलावा कुछ अफसरों ने सड़क चौड़ीकरण को लेकर कार्रवाई करने तो कुछ ने मंदिर होने की बात से ही इनकार करना शुरू कर दिया था। जबकि ग्रामीण मंदिर को 60 साल पुराना बताते हुए सड़कों पर उतरकर आक्रोश जता रहे थे। पथराव आगजनी के बाद 12 को जेल भेजा गया। विश्व हिंदू परिषद, हिंदू जागरण मंच समेत कई हिंदू संगठनों के नेताओं ने मंदिर निर्माण की मांग को लेकर बृहस्पतिवार से घटनास्थल पर अनशन का ऐलान किया था। जिसको लेकर बुधवार देर रात तक पुलिस-प्रशासनिक अफसर नेताओं को मनाने में जुटे रहे। इसके बाद बृहस्पतिवार सुबह अनशन शुरू होने से पहले ही डीएम शीतल वर्मा, एसपी देवरंजन वर्मा ने नेताओं को बुलाकर बातचीत शुरू की। इसमें उस प्लाट स्वामी सौरभ अग्रवाल को भी बुलाया गया। जिससे साठगांठ कर प्रशासनिक कार्रवाई करने का आरोप अधिकारियों पर लगा था। काफी देर तक डीएम-एसपी की नेताओं से बातचीत होती रही। करीब दो घंटे बाद इसका निस्तारण कर दिया गया। प्लाट स्वामी सौरभ अग्रवाल ने मंदिर बनाने के लिए अपने प्लाट में जगह देने की बात कही, जिसमें मंदिर का निर्माण कराया जाएगा। इसको बातचीत करने आए नेताओं के समक्ष रखा गया। इसके अलावा दर्ज किए गए मुकदमे की निष्पक्ष जांच करने का आश्वासन दिया। नतीजतन दस दिन से तूल पकड़ चुके मंदिर विवाद का पटाक्षेप हो सका। नेताओं ने भी इसको सही फैसला करार दिया। इस मौके पर एएसपी रोहित मिश्रा, एसडीएम सदर पूर्णिमा सिंह, सीओ सिटी निशांक शर्मा, सीओ पूरनपुर अनुराग दर्शन भी मौजूद रहे। प्रशासन से बातचीत करने पहुंचने वालों ने भाजपा नेता दीपक अग्रवाल, विहिप जिलाध्यक्ष अंबरीश मिश्रा, हिजामं के जिलाध्यक्ष वेदप्रकाश शुक्ला आदि थे।
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23 मई को पूरनपुर गेट पुलिस चौकी के पास बने सिद्धबाबा मंदिर को डीएम के आदेश पर नायब तहसीलदार अनुराग की अगुवाई में पहुंची टास्क फोर्स ने तोड़ दिया था। मंदिर के सरकारी जमीन पर बना होने की बात कही गई थी। इसके अलावा कुछ अफसरों ने सड़क चौड़ीकरण को लेकर कार्रवाई करने तो कुछ ने मंदिर होने की बात से ही इनकार करना शुरू कर दिया था। जबकि ग्रामीण मंदिर को 60 साल पुराना बताते हुए सड़कों पर उतरकर आक्रोश जता रहे थे। पथराव आगजनी के बाद 12 को जेल भेजा गया। विश्व हिंदू परिषद, हिंदू जागरण मंच समेत कई हिंदू संगठनों के नेताओं ने मंदिर निर्माण की मांग को लेकर बृहस्पतिवार से घटनास्थल पर अनशन का ऐलान किया था। जिसको लेकर बुधवार देर रात तक पुलिस-प्रशासनिक अफसर नेताओं को मनाने में जुटे रहे। इसके बाद बृहस्पतिवार सुबह अनशन शुरू होने से पहले ही डीएम शीतल वर्मा, एसपी देवरंजन वर्मा ने नेताओं को बुलाकर बातचीत शुरू की। इसमें उस प्लाट स्वामी सौरभ अग्रवाल को भी बुलाया गया। जिससे साठगांठ कर प्रशासनिक कार्रवाई करने का आरोप अधिकारियों पर लगा था। काफी देर तक डीएम-एसपी की नेताओं से बातचीत होती रही। करीब दो घंटे बाद इसका निस्तारण कर दिया गया। प्लाट स्वामी सौरभ अग्रवाल ने मंदिर बनाने के लिए अपने प्लाट में जगह देने की बात कही, जिसमें मंदिर का निर्माण कराया जाएगा। इसको बातचीत करने आए नेताओं के समक्ष रखा गया। इसके अलावा दर्ज किए गए मुकदमे की निष्पक्ष जांच करने का आश्वासन दिया। नतीजतन दस दिन से तूल पकड़ चुके मंदिर विवाद का पटाक्षेप हो सका। नेताओं ने भी इसको सही फैसला करार दिया। इस मौके पर एएसपी रोहित मिश्रा, एसडीएम सदर पूर्णिमा सिंह, सीओ सिटी निशांक शर्मा, सीओ पूरनपुर अनुराग दर्शन भी मौजूद रहे। प्रशासन से बातचीत करने पहुंचने वालों ने भाजपा नेता दीपक अग्रवाल, विहिप जिलाध्यक्ष अंबरीश मिश्रा, हिजामं के जिलाध्यक्ष वेदप्रकाश शुक्ला आदि थे।
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