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सुप्रीम कोर्ट का जज बताकर अफसरों से कराता था काम, खुले कई बड़े राज

Sun, 16 Jul 2017 10:13 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ Updated Sun, 16 Jul 2017 10:13 AM IST
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The judges of the Supreme Court were acting arbitrarily with the officers, all the secret now open
ठग के बारे में जानकारी देते एसपी सिटी

सुनिए मिस्टर, काम नहीं किया तो जांच होगी और तुम्हारा कॅरियर खराब हो जाएगा। पहले डाक से चिट्ठी भेजकर और फिर फोन कर अफसरों को हड़काकर मनमाना काम कराना उसका पेशा था। उत्तर प्रदेश और दिल्ली के मुख्यमंत्री के नाम के फर्जी लेटर पैड इस आरोपी ने छपवा रखे थे। इसके अलावा यह ठग खुद को कभी सुप्रीम कोर्ट का जज तो कभी मानवाधिकार आयोग का रजिस्ट्रार बताकर अफसरों को प्रभाव में लेता था। सात साल से एनसीआर में गैंग चलाकर मोटे पैसे वसूल चुका यह शातिर ठग शुक्रवार को लालकुर्ती पुलिस के हत्थे चढ़ गया।

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ऐसे खुली कलई
इंस्पेक्टर लालकुर्ती सुधीर कुमार के अनुसार रजबन बाजार निवासी ओमवती ने एक जुलाई को मारपीट और लूट के आरोप में दो लोगों पर नामजद केस दर्ज कराया था। दो जुलाई को एक व्यक्ति ने खुद को मानवाधिकार आयोग का रजिस्ट्रार बताकर उन्हें फोन कर ओमवती के केस में कार्रवाई करने के निर्देश दिए। कई बार उन्हें फोन कर धमकाया गया और रजिस्ट्रार के नाम से थाने में चिट्ठी तक भेज दी गई। यही नहीं, इस व्यक्ति ने एक सप्ताह पहले एसपी सिटी मानसिंह चौहान को भी फोन कर चेतावनी दे दी थी। शक के आधार पर पुलिस अफसरों ने गोपनीय जांच के बाद गंगानगर में दबिश देकर आरोपी अजय कुमार गर्ग (55 वर्ष) को गिरफ्तार कर लिया।

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दिल्ली और एनसीआर में संगठित गैंग

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आरोपी से बरामद सामान

इंटर पास बताए गए अजय का दिल्ली और एनसीआर में नेटवर्क फैला हुआ है। संगठित तरीके से चलाए जा रहे गैंग में एक सामाजिक संस्था से जुड़ी महिला समेत छह लोग हैं। जिनकी तलाश में दबिश दी जा रही हैं। इस गैंग ने मेरठ, गाजियाबाद, नोएडा, दिल्ली समेत कई जिलों में अपने ऑफिस तक खोल रखे हैं।

पीड़ितों के नाम पर ठगी
एसपी सिटी के अनुसार पूछताछ में सामने आया कि यह आरोपी ऐसे पीड़ित लोगों को टारगेट पर लेता था, जिनका थानों या सरकारी विभागों में काम अटका होता था। ऐसे पीड़ितों से मोटा पैसा लेकर यह आरोपी इसी तरह अफसरों को दबाव में लेकर काम कराता था। पुलिस ने तलाशी के दौरान उसके कमरे से छह मोबाइल फोन, दर्जनों सिम, उत्तर प्रदेश, दिल्ली के मुख्यमंत्री, मानवाधिकार आयोग के रजिस्ट्रार, डीएम और एसएसपी के अलावा कई सरकारी विभागों के बड़े अधिकारियों के नाम के लेटर पैड बरामद किए हैं।

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कैराना से भागा था

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लैटर पैड व उस पर लिखी गया पत्र

पूछताछ में आरोपी अजय गर्ग ने बताया कि वह मूल रूप से कैराना (शामली) का निवासी है। वर्ष 2004 में वह कैराना से भागकर मेरठ आया था। एसपी सिटी के अनुसार इस संबंध में एक टीम शामली भेजकर इसका सत्यापन कराया जा रहा है। 

सीएम की चिट्ठी कई बार भेजी
पुलिस के मुताबिक आरोपी अजय ने उत्तर प्रदेश और दिल्ली के मुख्यमंत्री के अलावा आयोग के रजिस्ट्रार के नाम से कई बार कई विभागों के अफसरों को चिट्ठी भेजी। फर्जी तरीके से कई काम भी कराए तो कई अधिकारियों पर शिकायत करके जांच भी बैठवाई। यही नहीं, काम न होने पर यह रिमाइंडर जारी कर जवाब मांगता था। अफसरों को चेतावनी दी जाती थी कि यदि कार्रवाई नहीं हुई तो उनका कॅरियर खराब कर दूंगा। 

एक बार जेल गया
जांच में सामने आया कि लिसाड़ी गेट पुलिस ने वर्ष 2010 में अजय गर्ग को पीके गोयल के नाम से धोखाधड़ी के मामले में जेल भेजा था। आरोपी ने साठगांठ कर पीके गोयल को मृत बताकर फाइल बंद करा दी थी। नाम पता भी उसने फर्जी बताया था।

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