नोटबंदी का दर्द आज तक झेल रहे लोग, जानिए बैंकों का हाल
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पिछले साल 8 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में नोटबंदी की घोषणा की। 1000-500 के नोट बंद कर दिए गए थे। इसके बाद बैंकों में मानो भूचाल आ गया हो। खूब आपाधापी मची। हंगामे और तोड़फोड़ हुई। बैंकों के बाहर लंबी लाइन में लगे कई लोगों की मौत हुई। व्यापारी, कारोबारी, नौकरी पेशा सहित समाज का हर तबका प्रभावित हुआ, लेकिन धीरे धीरे हालात पटरी पर आए, लेकिन नोटबंदी का दर्द आज भी लोग झेल रहे हैं।
जिले में कुल 35 बैंक हैं। जिनकी 444 शाखाएं हैं। करीब 35 हजार करोड़ का कारोबार है। नोटबंदी के दौरान पुराने नोट बदलवाने और नगद निकासी को दो महीने तक लोगों ने मुश्किलें झेली। घंटो लाइन में खड़े रहे, लेकिन स्थिति सामान्य होने के बाद बैंकों ने अपने शुल्क में बढ़ोत्तरी कर दी, लेकिन सुविधाएं कुछ नहीं बढ़ाई।
नोटबंदी में दिए सिक्के, अब लेने से कतरा रहे
नोटबंदी के दौरान बैंकों में नगदी का टोटा हुआ तो लोगों को दो ,पांच और 10 के सिक्कों से भुगतान दिया गया लेकिन अब खुद बैंक ही इन सिक्कों को लेने से मना कर रहे हैं। बैंक में सिक्के जमा कराने जा रहे व्यापारियों को लौटाया जाता है। उनसे हैंडलिंग चार्ज की मांग हो रही है। व्यापारी धरने प्रदर्शन कर रहे हैं।
एटीएम से निकासी पर भी पड़ी मार
नोटबंदी से पहले एटीएम से बिना शुल्क पांच बार कैश निकाला जा सकता था। दूसरे बैंक के एटीएम से भी पांच बार कैश निकासी की सुविधा थी, लेकिन अब ये सीमा घटाकर तीन बार कर दी गई है। दूसरे बैंक के एटीएम से तीन बार से अधिक कैश निकालने पर शुल्क लगा दिया गया है।
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आन लाइन ट्रांजक्शन पर भी बढ़ा टैक्स
सरकार आन लाइन ट्रांजेक्शन पर जोर दे रही है, लेकिन उधर बैंकों में आन लाइन ट्रांजेक्शन पर भी शुल्क बढ़ गया है। एनईएफटी या अन्य ऑन लाइन माध्यम से कैश ट्रांसफर करने पर पहले बैंक चार्ज पर सर्विस टैक्स के तौर पर करीब 12 प्रतिशत शुल्क देना पड़ता था, लेकिन जीएसटी के बाद ये शुल्क 18 प्रतिशत हो गया है।
लोन को चक्कर कटा रहे बैंक
उप्र व्यापार प्रतिनिधि मंडल के प्रांतीय महामंत्री लोकेश अग्रवाल के अनुसार बैंकों ने नोटबंदी के दौरान सिक्कों की थैलियां देकर भुगतान किया। अब व्यापारी इन्हें जमा कराने बैंक जाता है तो उन्हें लेने से मना किया जाता है। उल्टा उनसे हैंडलिंग चार्ज की मांग हो रही है। प्रधानमंत्री मुद्रा लोन लेने व्यापारी बैंक जाता है तो उसे चक्कर कटाए जाते हैं।
रोहटा रोड निवासी पेंशनर्स धर्मवीरी ने बताया कि नोटबंदी के दौरान पेंशन के लिए बहुत परेशानी उठानी पड़ी, लेकिन अब राहत है। बैंक में आराम से काम हो रहा है। उनके साथ आए उनके पुत्र प्रवीण ने बताया कि सरकार को एटीएम से निकासी की संख्या पहले की तरह पांच करे तो बेहतर होगा।
आन लाइन ट्रांजेक्शन शुल्क हटाए सरकार
केडी हैंडीफेब्स के संचालक सुनील दत्त शर्मा कहते हैं कि नोटबंदी का अच्छा रिजल्ट आया, लेकिन सरकार यदि ऑन लाइन ट्रांजेक्शन से शुल्क हटा दे तो उसकी ये स्कीम और सफल हो सकती है।
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