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देवबंदी उलमा बोले, वंदेमातरम गाना शरीयत के खिलाफ

Fri, 01 Dec 2017 08:47 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ Updated Fri, 01 Dec 2017 08:47 AM IST
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Deobandi Ulama said vande Mataram sing against Shariat
दारुल उलूम देवबंद

देवबंद। आगरा के मोहल्ला आजमपाड़ा के रहने वाले गुलचमन शेरवानी का राष्ट्रगीत वंदेमातरम और देश के तिरंगे झंडे से प्रेम करने के मामले में देवबंदी उलमा का कहना है कि उनका तिरंगे से प्रेम राष्ट्र से प्रेम है और सभी लोगों को तिरंगे का सम्मान करना चाहिए, लेकिन जहां तक वंदेमातरम का मसला है तो शरीयत इसे गाने की इजाजत नहीं देती। 

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ऑल इंडिया मजलिस उलमा के महासचिव मौलाना कारी रहीमुद्दीन कासमी का कहना है कि आगरा के गुलचमन शेरवानी का तिरंगे से मोहब्बत का मसला है तो यह मुल्क से वफादारी है। तिरंगा मुल्क की शान है और सभी को इसका सम्मान करना चाहिए, लेकिन अगर वंदेमातरम गाना या उसकी धुन पर कुछ करने का सवाल है तो इस्लाम धर्म इसका कतई इजाजत नहीं देता, लेकिन इसके साथ ही इस्लाम धर्म में यह भी कहा गया है कि मुल्क की जितनी मोहब्बत की जा सके वो कम है। उन्होंने कहा कि यहां मजहबी सवाल पैदा होता है कि मुल्क की इबादत करने को कहा जाए तो मुसलमान हरगिज इसके लिए तैयार नहीं होगा। मुफ्ती याद इलाही कासमी का कहना है कि तिरंगा राष्ट्रीय ध्वज है और हम सब इसका सम्मान करते हैं और समय समय पर इसको इस्लामिक शिक्षण संस्थानों और दूसरे कार्यक्रमों में शान के साथ फहराते हैं। जहां तक आगरा के गुलचमन शेरवानी का मसला है तो तिरंगे का कपड़ा बनाकर पहनना मेरी नजर में तिरंगे का अपमान है। वतन से मोहब्बत के लिए वंदेमातरम गाना या तिरंगे के कपड़े बनाकर पहनने की जरूरत नहीं है। हम अपने मुल्क से कितनी मोहब्बत करते हैं यह सभी जानते हैं।
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यह है पूरा मामला
आगरा के मोहल्ला आजमपाड़ा के रहने वाले गुलचमन शेरवानी का वंदेमातरम और देश के तिरंगे झंडे से उनको काफी प्रेम है कि उनके घर पर जो पेंट हुआ है वो तिरंगा है और उसने घर का नाम भी तिरंगा मंजिल रखा हुआ है। पत्नी बच्चे और खुद वो तिरंगे की ही ड्रेस पहनते हैं और तो और वो ईद बकरीद की तरह 15 अगस्त और 26 जनवरी को मनाते हैं। घर में भारत माता की फोटो लगी है जिस पर गुलचमन तिरंगा अगरबत्ती ही इस्तेमाल करते हैं। वह वंदेमातरम को राष्ट्रीय गीत घोषित करने की तिथि पर भारत माता की प्रतिमा पर नमाज पढ़ते हैं। गुलचमन शेरवानी ने शादी भी तिरंगे को हाथ में लेकर वंदेमातरम की धुन पर की थी। जिसके चलते कुछ मौलानाओं ने इनके खिलाफ फतवा जारी किया था। वह तभी से उनके खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा दर्ज कराने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इतना ही नहीं इसी के चलते गुलचमन ने अन्न भी त्याग रखा है।

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