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लोकसभा चुनाव से पहले लिखी गयी भाजपा में घमासान की पटकथा
Updated Wed, 23 Aug 2017 02:31 AM IST
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मेरठ। भाजपा में यूं तो पहले से सब कुछ ठीक नहीं था। लेकिन जिला पंचायत अध्यक्ष उपचुनाव लोकसभा चुनाव से पहले एक बड़े घमासान की पटकथा लिख गया। जिस तरह स्थानीय भाजपाई संगठन के सामने सरधना विधायक ठा. संगीत सोम ने अकेले ताल ठोकी है, उससे एक तरफ जहां उनके खिलाफ लामबंदी बढ़ गयी है, तो कार्रवाई की मांग तेज होने से घमासान मचने के आसार भी तेज हो गए हैं।
सरधना विधायक ठा. संगीत सोम को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भाजपा का प्रभावशाली नेता माना जाता है। वह पहली बार पार्टी की नीति से अलग चले हों, ऐसा नहीं है। लेकिन पार्टी ने पहले इस तरफ ध्यान नहीं दिया। स्थानीय संगठन से भी उनका कोई खास सरोकार कभी नजर नहीं आया। ऐसे में लगातार उनके और संगठन के साथ ही स्थानीय जनप्रतिनिधियों के बीच खाई बढ़ती गयी। कई मौके ऐसे आए, जब उनका संगठन के पदाधिकारियों से जमकर विवाद भी हुआ। यही नहीं, डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी जब प्रदेश अध्यक्ष थे तो उनका उनसे भी छत्तीस का आंकड़ा रहा। इसके अलावा भी कई अन्य पदाधिकारियों से उनकी पटरी नहीं बैठी।
लेकिन इस जिला पंचायत अध्यक्ष उपचुनाव में वह पूरे संगठन और तमाम जनप्रतिनिधियों से उलझ बैठे। एक तरफ जहां जिला कमेटी, क्षेत्रीय कमेटी के साथ सांसद और चार विधायकों के साथ पूर्व एमएलसी, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष आदि तमाम नेता खड़े थे, तो दूसरी तरफ संगीत सोम अकेले थे। हालांकि सपा के पूर्व मंत्री शाहिद मंजूर का साथ उन्हें था। लेकिन भाजपा की तरफ से वह अकेले मैदान में थे। एक तरह से पूरे संगठन को उन्होंने न केवल अपने विरोध में खड़ा किया, बल्कि ऐसा लगा कि वह पूरे संगठन को अकेले चुनौती दे रहे हों।
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चुनाव के दौरान भी भाजपाइयों ने प्रांतीय और राष्ट्रीय नेतृत्व के साथ संघ परिवार में इसकी शिकायत दर्ज करायी। लेकिन अब चुनाव परिणाम आने के बाद भाजपाइयों के हौसले बुलंद हो चुके हैं। सांसद राजेंद्र अग्रवाल ने जिस तरह सीधे-सीधे संगीत सोम पर पार्टी विरोधी गतिविधि का आरोप लगाया है, उससे तय है कि यह बात अब यहीं नहीं रुकेगी, बल्कि आगे बढ़ेगी। ऐसे में भाजपा के भीतर किसी घमासान की सुगबुगाहट साफ नजर आ रही है। जिसका असर स्थानीय निकाय चुनाव पर कम। लेकिन लोकसभा चुनाव में ज्यादा नजर आएगा।
खास बात
सरधना विधायक ठा. संगीत सोम के खिलाफ लामबंद हुए भाजपाई
पूरे प्रकरण पर तैयार होने वाली रिपोर्ट के बाद की कार्रवाई पर टिकी सबकी नजर
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सरधना विधायक ठा. संगीत सोम को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भाजपा का प्रभावशाली नेता माना जाता है। वह पहली बार पार्टी की नीति से अलग चले हों, ऐसा नहीं है। लेकिन पार्टी ने पहले इस तरफ ध्यान नहीं दिया। स्थानीय संगठन से भी उनका कोई खास सरोकार कभी नजर नहीं आया। ऐसे में लगातार उनके और संगठन के साथ ही स्थानीय जनप्रतिनिधियों के बीच खाई बढ़ती गयी। कई मौके ऐसे आए, जब उनका संगठन के पदाधिकारियों से जमकर विवाद भी हुआ। यही नहीं, डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी जब प्रदेश अध्यक्ष थे तो उनका उनसे भी छत्तीस का आंकड़ा रहा। इसके अलावा भी कई अन्य पदाधिकारियों से उनकी पटरी नहीं बैठी।
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लेकिन इस जिला पंचायत अध्यक्ष उपचुनाव में वह पूरे संगठन और तमाम जनप्रतिनिधियों से उलझ बैठे। एक तरफ जहां जिला कमेटी, क्षेत्रीय कमेटी के साथ सांसद और चार विधायकों के साथ पूर्व एमएलसी, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष आदि तमाम नेता खड़े थे, तो दूसरी तरफ संगीत सोम अकेले थे। हालांकि सपा के पूर्व मंत्री शाहिद मंजूर का साथ उन्हें था। लेकिन भाजपा की तरफ से वह अकेले मैदान में थे। एक तरह से पूरे संगठन को उन्होंने न केवल अपने विरोध में खड़ा किया, बल्कि ऐसा लगा कि वह पूरे संगठन को अकेले चुनौती दे रहे हों।
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चुनाव के दौरान भी भाजपाइयों ने प्रांतीय और राष्ट्रीय नेतृत्व के साथ संघ परिवार में इसकी शिकायत दर्ज करायी। लेकिन अब चुनाव परिणाम आने के बाद भाजपाइयों के हौसले बुलंद हो चुके हैं। सांसद राजेंद्र अग्रवाल ने जिस तरह सीधे-सीधे संगीत सोम पर पार्टी विरोधी गतिविधि का आरोप लगाया है, उससे तय है कि यह बात अब यहीं नहीं रुकेगी, बल्कि आगे बढ़ेगी। ऐसे में भाजपा के भीतर किसी घमासान की सुगबुगाहट साफ नजर आ रही है। जिसका असर स्थानीय निकाय चुनाव पर कम। लेकिन लोकसभा चुनाव में ज्यादा नजर आएगा।
खास बात
सरधना विधायक ठा. संगीत सोम के खिलाफ लामबंद हुए भाजपाई
पूरे प्रकरण पर तैयार होने वाली रिपोर्ट के बाद की कार्रवाई पर टिकी सबकी नजर