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नन्हें हाथों ने तारकशी में दिखाया कमाल
Mainpuri
Updated Fri, 13 Jun 2014 05:30 AM IST
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मैनपुरी। करीब 15 सालों से घर में चल रहे हस्तशिल्प कार्य में कुमारी मेघा कश्यप ने ऐसा हाथ बंटाया कि उसकी पहचान प्रदेश स्तर पर बन गई। बचपन से ही पिता और भाई-बहनों के साथ शीशम की लकड़ी पर पीतल के तारों से मनमोहक आकृतियां उकेरने वाली मेघा अब इस काम में ऐसी सिद्धहस्त हुई कि उसे राज्य हस्तशिल्प पुरस्कार के लिए चयनित कर लिया गया। पुरस्कार के लिए चयनित होने से मेघा और परिवार के लोगों में खुशी है।
राज्य हस्तशिल्प प्रादेशिक पुरस्कार के लिए चयनित प्रदेश के 20 हस्त शिल्पियों में शामिल मेघा कश्यप के परिवार में 15 सालों से हस्तशिल्प का काम हो रहा है। मेघा के पिता रामसनेही कश्यप द्वारा कमाई के लिए शुरू किया गया तारकशी का काम अब उसकी और मैनपुरी की पहचान बन गया है। इससे पूर्व मेघा की बड़ी बहन पूनम को वर्ष 2001 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती द्वारा और भाई विकास कश्यप को 2005 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव द्वारा राज्य पुरस्कार से नवाजा जा चुका है। जबकि बहन निधि कश्यप ने 2007 में दक्षता पुरस्कार प्राप्त किया था।
मेघा ने बताया कि उसे बचपन से ही तारकशी करने का शौक लग गया। पढ़ाई के साथ पिता और भाई-बहनों के साथ नन्हें हाथों से शौक मेें शुरू किए गए काम में वह कब दक्ष हो गई इसका उसे भी पता नहीं चला। एमए तक पढ़ाई करने वाली मेघा ने पिछले साल तारकशी से एक टेबिल टॉप बनाई तो उसे देखकर घर के लोगों ने कहा कि इसे तो पुरस्कार मिल सकता है। मेघा ने जिला उद्योग केंद्र के माध्यम से पुरस्कार के लिए आवेदन कर दिया और उसे चयनित कर लिया गया।
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कड़ी मेहनत से बनती है आकृति
मेघा ने बताया कि तारकशी का काम शीशम की लकड़ी पर किया जाता है। कागज पर पहले आकृति बनाने के बाद उसे शीशम की लकड़ी पर रखकर पीतल के तार से हथौड़ी से चोट देकर आकृति को लकड़ी पर उभारा जाता है। बाद में लकड़ी की घिसाई कर उसे चिकना करने के बाद पालिस की जाती है। वह सौ से अधिक विभिन्न देवी-देवताओं के अलावा स्मारकों आदि को बना चुकी है।
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राज्य हस्तशिल्प प्रादेशिक पुरस्कार के लिए चयनित प्रदेश के 20 हस्त शिल्पियों में शामिल मेघा कश्यप के परिवार में 15 सालों से हस्तशिल्प का काम हो रहा है। मेघा के पिता रामसनेही कश्यप द्वारा कमाई के लिए शुरू किया गया तारकशी का काम अब उसकी और मैनपुरी की पहचान बन गया है। इससे पूर्व मेघा की बड़ी बहन पूनम को वर्ष 2001 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती द्वारा और भाई विकास कश्यप को 2005 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव द्वारा राज्य पुरस्कार से नवाजा जा चुका है। जबकि बहन निधि कश्यप ने 2007 में दक्षता पुरस्कार प्राप्त किया था।
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मेघा ने बताया कि उसे बचपन से ही तारकशी करने का शौक लग गया। पढ़ाई के साथ पिता और भाई-बहनों के साथ नन्हें हाथों से शौक मेें शुरू किए गए काम में वह कब दक्ष हो गई इसका उसे भी पता नहीं चला। एमए तक पढ़ाई करने वाली मेघा ने पिछले साल तारकशी से एक टेबिल टॉप बनाई तो उसे देखकर घर के लोगों ने कहा कि इसे तो पुरस्कार मिल सकता है। मेघा ने जिला उद्योग केंद्र के माध्यम से पुरस्कार के लिए आवेदन कर दिया और उसे चयनित कर लिया गया।
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कड़ी मेहनत से बनती है आकृति
मेघा ने बताया कि तारकशी का काम शीशम की लकड़ी पर किया जाता है। कागज पर पहले आकृति बनाने के बाद उसे शीशम की लकड़ी पर रखकर पीतल के तार से हथौड़ी से चोट देकर आकृति को लकड़ी पर उभारा जाता है। बाद में लकड़ी की घिसाई कर उसे चिकना करने के बाद पालिस की जाती है। वह सौ से अधिक विभिन्न देवी-देवताओं के अलावा स्मारकों आदि को बना चुकी है।