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कर्ज में डूबे किसान ने लगाई फांसी
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
Updated Thu, 15 Jun 2017 01:19 AM IST
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कर्ज में डूबे सैनी के चक बख्तियारा के किसान रामबाबू द्विवेदी (55) ने आलू के फसल में लाखों रुपये का नुकसान होने पर मंगलवार देर रात गांव के बाहर बाग में फांसी लगाकर जान दे दी। बुधवार सुबह लोगों ने पेड़ पर लटकती लाश देखी तो सनसनी फैल गई। सूचना पर रोते-विलखते परिजन पहुंचे।
पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। रामबाबू ने तीन बैंकों से खेती के लिए कर्ज ले रखे थे। सपा युवजन सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष विकास यादव ने पीड़ित परिवार को दस हजार रुपये नगद व पार्टी फंड से एक लाख रुपये आर्थिक मदद दिलाने का आश्वासन दिया है।
चक बख्तियारा निवासी रामबाबू द्विवेदी के पास साढ़े चार बीघा खेत था। उन्होंने किसानी के लिए एसबीआई की देवीगंज शाखा से सवा लाख तथा उत्तर प्रदेश बड़ौदा ग्रामीण बैंक की सैनी और डोरमा शाखाओं से एक-एक लाख रुपये कर्ज लिए थे। बड़ी मेहनत से आलू की फसल तैयार की थी। बंपर पैदावार भी हुई लेकिन नोटबंदी की वजह से आलू इतना सस्ता हो गया कि लागत तक नहीं निकल सकी। इसस लगभग तीन लाख रुपये का नुकसान हो गया।
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औने-पौने दाम में आलू बिकने से वह बैंकों का कर्ज अदा नहीं कर सके थे। परिजनों का कहना है कि इससे वह मानसिक तनाव में थे। उन्हें उम्मीद थी कि सरकार उनका कर्ज माफ कर देगी। मगर स्पष्ट गाइड लाइन जारी न होने से बैंक रुपया जमा करने का दबाव बना रहे थे। इससे रामबाबू बेहद परेशान रहने लगे थे। मंगलवार देर रात बिना किसी को बताए घर से निकले और गांव के बाहर आम की बाग में लुंगी को फंदा बना फांसी लगा ली। भोर में बड़े बेटे देवेंद्र कुमार ने बिस्तर खाली देखा तो पिता की तलाश शुरू की। इसी दौरान पता चला कि गांव के बाहर उनका शव पेड़ से लटक रहा है।
खबर मिलते ही देवेंद्र मां उर्मिला देवी, भाई बृजेंद्र कुमार, राघवेंद्र व बहन अर्चना देवी के साथ मौके पर पहुंचा। शव देख सबके होश उड़ गए। सूचना पर पहुंची पुलिस ने जांच के बाद शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। शाम करीब पांच बजे एसडीएम सिराथू विवेक चतुर्वेदी मामले की जांच के लिए गांव पहुंचे। पूरी पड़ताल के बाद एसडीएम ने माना कि किसान कर्जदार था।
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पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। रामबाबू ने तीन बैंकों से खेती के लिए कर्ज ले रखे थे। सपा युवजन सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष विकास यादव ने पीड़ित परिवार को दस हजार रुपये नगद व पार्टी फंड से एक लाख रुपये आर्थिक मदद दिलाने का आश्वासन दिया है।
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चक बख्तियारा निवासी रामबाबू द्विवेदी के पास साढ़े चार बीघा खेत था। उन्होंने किसानी के लिए एसबीआई की देवीगंज शाखा से सवा लाख तथा उत्तर प्रदेश बड़ौदा ग्रामीण बैंक की सैनी और डोरमा शाखाओं से एक-एक लाख रुपये कर्ज लिए थे। बड़ी मेहनत से आलू की फसल तैयार की थी। बंपर पैदावार भी हुई लेकिन नोटबंदी की वजह से आलू इतना सस्ता हो गया कि लागत तक नहीं निकल सकी। इसस लगभग तीन लाख रुपये का नुकसान हो गया।
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औने-पौने दाम में आलू बिकने से वह बैंकों का कर्ज अदा नहीं कर सके थे। परिजनों का कहना है कि इससे वह मानसिक तनाव में थे। उन्हें उम्मीद थी कि सरकार उनका कर्ज माफ कर देगी। मगर स्पष्ट गाइड लाइन जारी न होने से बैंक रुपया जमा करने का दबाव बना रहे थे। इससे रामबाबू बेहद परेशान रहने लगे थे। मंगलवार देर रात बिना किसी को बताए घर से निकले और गांव के बाहर आम की बाग में लुंगी को फंदा बना फांसी लगा ली। भोर में बड़े बेटे देवेंद्र कुमार ने बिस्तर खाली देखा तो पिता की तलाश शुरू की। इसी दौरान पता चला कि गांव के बाहर उनका शव पेड़ से लटक रहा है।
खबर मिलते ही देवेंद्र मां उर्मिला देवी, भाई बृजेंद्र कुमार, राघवेंद्र व बहन अर्चना देवी के साथ मौके पर पहुंचा। शव देख सबके होश उड़ गए। सूचना पर पहुंची पुलिस ने जांच के बाद शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। शाम करीब पांच बजे एसडीएम सिराथू विवेक चतुर्वेदी मामले की जांच के लिए गांव पहुंचे। पूरी पड़ताल के बाद एसडीएम ने माना कि किसान कर्जदार था।