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खुद को कृष्णावतार बताकर धड़ से अलग कर दिया शिष्य का गला, हत्या के बाद गायब हो गया गुरू
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Fri, 18 Aug 2017 12:03 AM IST
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आरोपी सुंदरलाल कुशवाहा (फाइल फोटो) , मृतक घनश्याम का फाइल फोटो
दैवीय शक्तियां हासिल करने के लिए खुद को कृष्णावतार बताने वाले गुरू ने अष्टमी की रात अपने ही शिष्य/पुजारी की ही बलि चढ़ा दी। घटना के बाद शव को घर से दूर एक खंडहर में छिपा दिया। अगले दिन हत्यारोपी परिवार समेत गांव छोड़कर फरार हो गया। शव से बदबू उठने पर पड़ोसी महिला ने खंडहर में झांककर देखा तो उसके होश होड़ गए। मामला यूपी के हमीरपुर जिले का है। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। घटना से गांव में सनसनी है। वहीं मृतक परिवार में कोहराम मचा है।
हमीरपुर भरुआसुमेरपुर थानाक्षेत्र के बांक गांव निवासी सुंदरलाल कुशवाहा उर्फ सद्गुरुदेव महाराज पिछले करीब 15 वर्षों से अपने को कृष्णावतार बताकर संत वेष में रहने लगा। उसने अपना मायाजाल गांव समेत जनपद व पड़ोसी जिलों में फैला लिया। पिछले एक माह से वह अपने मकान में बनी गद्दी में समाधि ले रखी थी। कृष्ण जन्माष्टमी के दिन उसने अपने शिष्य/पुजारी घनश्याम उर्फ श्यामबाबा उर्फ सोहंग देव (45) निवासी पतारा थाना कुरारा हाल मुकाम कस्बा सुमेरपुर कपरिया मुहाल को अपना शिष्य बना लिया। उसे गांव में रखने लगा।
15 अगस्त को जन्माष्टमी के दिन धूमधाम से गाजेबाजे के साथ विशाल शोभायात्रा निकाली। इसके बाद गांव के बाहर खुद बनाए गए यज्ञस्थल मौहरदेवी के स्थान पर जमकर रासलीला की। इसके बाद गांव के अंदर घर पर बनी गद्दी पर शिष्यों के साथ पहुंच गया। जन्माष्टमी की रात पूजा अर्चना करने के बाद पुजारी/शिष्य श्यामबाबा को पूर्ण नग्न कर धारदार हथियार से गला रेत कर बलि चढ़ा दी और शव को घर के पिछवाड़े पड़े खंडहर में फेंक दिया। 16 अगस्त की सुबह गुरू सुंदरलाल अपनी पत्नी व बच्चों को लेकर गांव से फरार हो गया।
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शव से बदबू उठने पर पड़ोस में रहने वाली एक महिला ने खंडहर में झांक कर देखा तो उसे शव दिखाई दिया इस पर उसने गांव के चौकीदार लल्लू यादव को जानकारी दी। चौकीदार ने थानाध्यक्ष महेंद्र कुमार वर्मा को सूचना दी। जिस पर थानाध्यक्ष पुलिस फोर्स के साथ मौके पर गए। नरबलि की आशंका होने पर थानाध्यक्ष ने उच्चाधिकारियों को अवगत कराया। जिस पर सीओ सदर एसएन वैभव पांडेय, एएसपी लालसाहब यादव मौके पर पहुंचकर घटनास्थल का जायजा लिया। इसके बाद उच्चाधिकारियों ने घटनास्थल से खून व अन्य चीजों के नमूने के लिए फॉरेसिक टीम को बुलाया। जिस पर फॉरेसिक एक्सपर्ट मोहम्महद अजहर अपनी टीम के साथ गांव पहुंचे और नमूने व फोटो लिए। पुलिस ने मृतक के परिजनों को अवगत कराया। जिस पर मौके पर पहुंचे परिजनों में कोहराम मच गया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
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हमीरपुर भरुआसुमेरपुर थानाक्षेत्र के बांक गांव निवासी सुंदरलाल कुशवाहा उर्फ सद्गुरुदेव महाराज पिछले करीब 15 वर्षों से अपने को कृष्णावतार बताकर संत वेष में रहने लगा। उसने अपना मायाजाल गांव समेत जनपद व पड़ोसी जिलों में फैला लिया। पिछले एक माह से वह अपने मकान में बनी गद्दी में समाधि ले रखी थी। कृष्ण जन्माष्टमी के दिन उसने अपने शिष्य/पुजारी घनश्याम उर्फ श्यामबाबा उर्फ सोहंग देव (45) निवासी पतारा थाना कुरारा हाल मुकाम कस्बा सुमेरपुर कपरिया मुहाल को अपना शिष्य बना लिया। उसे गांव में रखने लगा।
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15 अगस्त को जन्माष्टमी के दिन धूमधाम से गाजेबाजे के साथ विशाल शोभायात्रा निकाली। इसके बाद गांव के बाहर खुद बनाए गए यज्ञस्थल मौहरदेवी के स्थान पर जमकर रासलीला की। इसके बाद गांव के अंदर घर पर बनी गद्दी पर शिष्यों के साथ पहुंच गया। जन्माष्टमी की रात पूजा अर्चना करने के बाद पुजारी/शिष्य श्यामबाबा को पूर्ण नग्न कर धारदार हथियार से गला रेत कर बलि चढ़ा दी और शव को घर के पिछवाड़े पड़े खंडहर में फेंक दिया। 16 अगस्त की सुबह गुरू सुंदरलाल अपनी पत्नी व बच्चों को लेकर गांव से फरार हो गया।
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शव से बदबू उठने पर पड़ोस में रहने वाली एक महिला ने खंडहर में झांक कर देखा तो उसे शव दिखाई दिया इस पर उसने गांव के चौकीदार लल्लू यादव को जानकारी दी। चौकीदार ने थानाध्यक्ष महेंद्र कुमार वर्मा को सूचना दी। जिस पर थानाध्यक्ष पुलिस फोर्स के साथ मौके पर गए। नरबलि की आशंका होने पर थानाध्यक्ष ने उच्चाधिकारियों को अवगत कराया। जिस पर सीओ सदर एसएन वैभव पांडेय, एएसपी लालसाहब यादव मौके पर पहुंचकर घटनास्थल का जायजा लिया। इसके बाद उच्चाधिकारियों ने घटनास्थल से खून व अन्य चीजों के नमूने के लिए फॉरेसिक टीम को बुलाया। जिस पर फॉरेसिक एक्सपर्ट मोहम्महद अजहर अपनी टीम के साथ गांव पहुंचे और नमूने व फोटो लिए। पुलिस ने मृतक के परिजनों को अवगत कराया। जिस पर मौके पर पहुंचे परिजनों में कोहराम मच गया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा।