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गोशाला पर ताला, कौन बने रखवाला

Thu, 30 Mar 2017 12:02 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला जालौन
ब्यूरो, अमर उजाला जालौन Updated Thu, 30 Mar 2017 12:02 AM IST
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Lock on the floor, who kept the keeper
आलमपुरा स्थित गाोशाला। - फोटो : Amar ujala

सीएम योगी भले ही रोज सुबह उठकर अपनी गोशाला में गायों की सेवा करते हों, लेकिन जनपद में गोशालाओं का बुरा हाल है। यहां की गोशालाओं में खूंटे तो हैं लेकिन बंधने के लिए गाय नहीं हैं। मेज कुर्सी तो पड़ी है, पर व्यवस्था चलाने वाले पदाधिकारी नदारद हैं। गोशाला भी खंडहर दिखता है। इसके विपरीत कालपी की गलियां ही नहीं बल्कि खेत और हाईवे तक पर अन्ना जानवरों की भीड़ कभी भी देखी जा सकती है। भाजपा की सरकार आने पर एक बार फिर से गोशाला को शुरू कराने की बात लोगों के दिलों में आ रही है। लेकिन उसे चलाने की पहल करने वाला कोई नजर नहीं आ रहा। यह हालत उस वक्त है, जब गौशाला से जुड़े लोगों का भी भाजपा से पुराना नाता है।

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1956 में कालपी के आलमपुर मोहल्ले में गोशाला की स्थापना की गई थी। शुरुआत में श्री जिला जालौन गौशाला समिति का गठन कर करीब 1000 गायों को गोशाला में रखा गया था। गायों की देखरेख के लिए 15 से 20 कर्मियों की टीम भी थी। यह टीम गायों को नहलाने से लेकर उनका गोबर तक उठाने का काम करती थी। फंड के आभाव में धीरे-धीरे गोशाला की व्यवस्थाओं के साथ गायों की संख्या भी कम होती चली गई। वर्ष 2003 में गोशाला की देखरेख के लिए भाजपा के तत्कालीन विधायक अरुण मेहरोत्रा को कमेटी का अध्यक्ष और भाजपा नेता सुभाष परमार को प्रबंधक नियुक्त किया गया।
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उस वक्त वर्तमान में भाजपा के विधायक नरेंद्र सिंह जादौन भी कमेटी के पदाधिकारी हुआ करते थे। इसी कार्यकाल में प्रदेश सरकार से गोशाला के विकास के लिए फंड भी आया। जिससे थोड़ा बहुत काम भी हुआ। लेकिन बाद में गोशाला को लेकर दो कमेटियों का विवाद सामने आ गया और फिर सभी ने एक साथ गोशाला से मुंह मोड़ लिया। विवाद पर आज कोई कुछ नहीं बोलना चाहता, लेकिन उसे चलाना सभी चाहते हैं। आज गोशाला का सिर्फ नामोनिशान ही बचा है। यहां न तो गाय दिखती हैं और न ही कोई कमेटी का पदाधिकारी। ऐसे में आसपास के लोगों ने गोशाला को अपने गैराज के रूप में इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है।
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सीएम की भावनाओं ने जगाई उम्मीद
क्षेत्र के समाजसेवियों का मानना है कि भाजपा सरकार सत्ता में आई है तो एक बार फिर उम्मीद जगी है। वनखंडीदेवी के महंत जमुनादास के मुताबिक, गोशाला खुलेगी तो उन्हें और उनके जैसे कई लोगों को गायों की सेवा करने का मौका मिलेगा। सामाजिक संस्थाओं से जुड़े जय खत्री और नरेंद्र तिवारी का कहना है कि गायों को सहारा मिलने के साथ-साथ ही क्षेत्र के अन्ना जानवरों की समस्या भी कुछ हद तक कम होगी।

जल्द खुलवाई जाएगी गोशाला- विधायक
विधायक नरेंद्र सिंह जादौन का कहना है कि बंद पड़ी गौशाला वाकई चिंता की विषय है। फिलहाल वे लखनऊ में हैं, जैसे ही वापस आएंगे, गोशाला को शुरू कराने का प्रयास किया जाएगा।  


दूर की जाएंगी सभी दिक्कतें- प्रबंधक
गोशाला की एक कमेटी के प्रबंधक सुभाष परमार का कहना है कि सरकार से गोशाला चालू कराने की मांग की जाएगी। कमेटियों का आपस में जो भी विवाद है, उसे खत्म कराकर गायों को आसरा देने का प्रयास किया जाएगा।

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