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सरल बनाई जाए संस्कृत की शिक्षा
ब्यूरो अमर उजाला चित्रकूट
Updated Wed, 11 Jan 2017 11:09 PM IST
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कार्यशाला में बोलते विवि के कुलाधिपति जगद्गुरुरामभद्राचार्य
- फोटो : अमर उजाला
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राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान परिषद ने उच्च प्राथमिक और उच्चतर माध्यमिक संस्कृत शिक्षकों के साथ ही छात्रों के लिए सरल पाठ्य सामग्री निर्माण विषय की तीन दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया। जिसमें वक्ताओं ने माना कि बिना संस्कृत के भारत देश की पहचान नहीं रहेगी। इसका विस्तार होना चाहिए।
जगद्गुरु रामभद्राचार्य विकलांग विश्वविद्यालय के सभागार में बुधवार को कार्यशाला के मुख्य अतिथि एनसीईआरटी के प्रोफेसर केसी मिश्रा ने कहा कि संस्कृत शिक्षकों के लिए पाठ्य सामग्री का निर्माण सरल एवं सुगम होना चाहिए।
जिससे आसानी से अध्ययन किया जा सके। प्रशभनों का निर्माण सही तरीके से हो ताकि उत्तर देने में परेशानी न हो। विश्वविद्यालय के कुलाधिपति स्वामी रामभद्राचार्य ने कहा कि बिना संस्कृत के भारत देश की पहचान नहीं रहेगी। संस्कृत भाषा संस्कारों के निर्माण की भाषा है। कुलपति प्रोफेसर योगेश चंद्र दुबे ने कहा कि अध्यापक के लिए बीएड ट्रेनिंग आवश्यक है।
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जगद्गुरु रामभद्राचार्य विकलांग विश्वविद्यालय के सभागार में बुधवार को कार्यशाला के मुख्य अतिथि एनसीईआरटी के प्रोफेसर केसी मिश्रा ने कहा कि संस्कृत शिक्षकों के लिए पाठ्य सामग्री का निर्माण सरल एवं सुगम होना चाहिए।
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जिससे आसानी से अध्ययन किया जा सके। प्रशभनों का निर्माण सही तरीके से हो ताकि उत्तर देने में परेशानी न हो। विश्वविद्यालय के कुलाधिपति स्वामी रामभद्राचार्य ने कहा कि बिना संस्कृत के भारत देश की पहचान नहीं रहेगी। संस्कृत भाषा संस्कारों के निर्माण की भाषा है। कुलपति प्रोफेसर योगेश चंद्र दुबे ने कहा कि अध्यापक के लिए बीएड ट्रेनिंग आवश्यक है।
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