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कान्वेंट स्कूल और मदरसों में छात्रों की पसंद बन रही हिंदी
बरेली।
Updated Thu, 14 Sep 2017 02:05 AM IST
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ग्लोबलाइजेशन के दौर में माना जाता है कि अंग्रेजी सभी भाषाओं पर भारी है, हिंदी भाषी स्कूल के अलावा हिंदी छात्रों की पसंद नहीं बन पाती, पर अब ऐसा नहीं है। कान्वेंट स्कूल और मदरसों में भी हिंदी छात्रों की पसंद बन रही है। सोशल मीडिया से लेकर अन्य जगहों पर वह हिंदी का प्रयोग भी बड़े उत्साह से करते हैं। तमाम मोबाइल एप भी अब लांच हो गए हैं जो छात्रों को हिंदी सीखने में मदद करते हैं।
मदरसा मंजरे इस्लाम के शिक्षक जुबैर रजा बताते हैं कि आलिम (बारहवीं) से पहले हिंदी अंग्रेजी पढ़ाई जाती है। आलिम स्तर पर हिंदी वैकल्पिक है, उन्होंने बताया कि मदरसे में करीब सात सौ छात्र हैं, जिसमें काफी संख्या में छात्र हिंदी को चुनते हैं। इतना ही नहीं स्नातक स्तर फाजिल में भी काफी छात्र हिंदी को वैकल्पिक भाषा में चुनते हैं। हिंदी का अच्छा प्रयोग भी करते हैं। वहीं सीबीएसई के सिटी कोआर्डिनेटर रमेश धस्माना ने बताया कि सीबीएसई के स्कूलों में हिंदी वैकल्पिक भाषा के तौर पर पढ़ाई जाती है पर बारहवीं में काफी छात्र हिंदी चुनते हैं और 90 से 95 फीसदी अंक भी लाते हैं। जीआरएम के प्रबंधक राजेश जौली बताते हैं कि पिछले साल की कई छात्रों ने कंप्यूटर साइंस और फिजिकल की जगह हिंदी को चुना और 95 फीसदी से ज्यादा अंक भी हासिल किए। वैसे माना जाता था कि मदरसों और कान्वेंट स्कूल में हिंदी छात्रों की पसंद नहीं बन पाती, पर पिछले कुल सालों से छात्रों ने हिंदी को चुनने में उत्साह दिखाया है।
विवि में हिंदी विभाग को फिर भेजा प्रस्ताव्र
विवि में हिंदी विभाग को लेकर फिर कवायद शुरू हुई है। हालांकि अभी तक विवि हिंदी विभाग खोलने में कामयाब नहीं हो पाया है। शासन के निर्देश पर काफी समय पहले एक प्रस्ताव भेजा गया था पर विभाग नहीं खुल सका। पिछले दिनों यूजीसी ने विवि से प्रस्ताव मांगे थे। अब फिर प्रस्ताव भेजा गया है। कुलपति प्रोफेसर अनिल कुमार शुक्ला ने बताया कि प्रस्ताव यूजीसी को भेजा है। प्रस्ताव स्वीकार होता है तो विवि में हिंदी विभाग खुल जाएगा।
मदरसा मंजरे इस्लाम के शिक्षक जुबैर रजा बताते हैं कि आलिम (बारहवीं) से पहले हिंदी अंग्रेजी पढ़ाई जाती है। आलिम स्तर पर हिंदी वैकल्पिक है, उन्होंने बताया कि मदरसे में करीब सात सौ छात्र हैं, जिसमें काफी संख्या में छात्र हिंदी को चुनते हैं। इतना ही नहीं स्नातक स्तर फाजिल में भी काफी छात्र हिंदी को वैकल्पिक भाषा में चुनते हैं। हिंदी का अच्छा प्रयोग भी करते हैं। वहीं सीबीएसई के सिटी कोआर्डिनेटर रमेश धस्माना ने बताया कि सीबीएसई के स्कूलों में हिंदी वैकल्पिक भाषा के तौर पर पढ़ाई जाती है पर बारहवीं में काफी छात्र हिंदी चुनते हैं और 90 से 95 फीसदी अंक भी लाते हैं। जीआरएम के प्रबंधक राजेश जौली बताते हैं कि पिछले साल की कई छात्रों ने कंप्यूटर साइंस और फिजिकल की जगह हिंदी को चुना और 95 फीसदी से ज्यादा अंक भी हासिल किए। वैसे माना जाता था कि मदरसों और कान्वेंट स्कूल में हिंदी छात्रों की पसंद नहीं बन पाती, पर पिछले कुल सालों से छात्रों ने हिंदी को चुनने में उत्साह दिखाया है।
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विवि में हिंदी विभाग को फिर भेजा प्रस्ताव्र
विवि में हिंदी विभाग को लेकर फिर कवायद शुरू हुई है। हालांकि अभी तक विवि हिंदी विभाग खोलने में कामयाब नहीं हो पाया है। शासन के निर्देश पर काफी समय पहले एक प्रस्ताव भेजा गया था पर विभाग नहीं खुल सका। पिछले दिनों यूजीसी ने विवि से प्रस्ताव मांगे थे। अब फिर प्रस्ताव भेजा गया है। कुलपति प्रोफेसर अनिल कुमार शुक्ला ने बताया कि प्रस्ताव यूजीसी को भेजा है। प्रस्ताव स्वीकार होता है तो विवि में हिंदी विभाग खुल जाएगा।
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