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एक सेमी प्रतिघंटे बढ़ रही घाघरा,खतरे के निशान को छूने को बेताब
Updated Thu, 06 Jul 2017 12:04 AM IST
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खतरे का निशान को छूने को बेताब घाघरा
बाराबंकी। घाघरा का जलस्तर एक सेेंटीमीटर प्रतिघंटे बढ़ रहा है। उसके तेवर खतरे के निशान का छूने का बेताब है। 75 सेमी जलस्तर बढ़ते ही घाघरा खतरे के निशान को पार कर तबाही मचना शुरू कर देगी। जिसको लेकर प्रशासन ने दो कंट्रोल रूम बनाकर तैयारियां शुरू कर दी है। बाढ़ से संबंधित सूचनाओं के आदान-प्रदान एवं प्रभावी नियंत्रण के लिए पहला बाढ़ का कंट्रोल रूम कलेक्ट्रेट परिसर में बनाया गया है। यह जिला बाढ़ नियंत्रण कक्ष प्रत्येक दिवस 24 घण्टे कार्य करेगा। जिसका दूरभाष नम्बर-05248-226017 एवं टोल फ्री नम्बर-1077 है। वहीं दूसरा कंट्रोल रूम एडीएम आवास के सामने स्थित कैनाल कालोनी में स्थित पंचम उपखण्ड के कार्यालय परिसर में भी बनाया गया है। यह भी 24 घण्टे कार्य करेगा। इस कन्ट्रोल रूम का दूरभाष नम्बर 05248-222843 है। बाढ़ कन्ट्रोल रूम के प्रभारी अधिकारी सहायक अभियन्ता, पंचम, बाढ़ कार्य खण्ड को बनाया गया है। प्रशासन ने कंट्रोल रूम की स्थापना कर भले ही तैयारियां शुरू कर दी है। मगर, बाढ के तेवर के आगे नाकाफी है। बढ़ते जलस्तर को लेकर घाघरा के तराई में बसे गांव के लोगों को घाघरा की तबाही का खतरा सताने लगा है। बुधवार की देर रात घाघरा का जलस्तर बाढ़ के खतरे के निशान से 75 सेमी दूर था। बाढ़ के एसडीओं आरके सिंह की मानें तो रात में अगर कही तेज बारिश हुई तो घाघरा के जलस्तर और तेजी से बढ़ना शुरू होगा।
साधन व ईंधन के अभाव में नहीं पहुंची फ्लड पीएसी
बाढ़ राहत कार्य के लिए एक प्लाटून फलड पीएसी जिले को एलाट किए जाने की सूचना दो दिन पूर्व ही जिले में आ गई थी। मगर, लखनऊ की 32 बटालियन फ्लड पीएसी के सामान को लाने के लिए एक वाहन की मांग भी हुई थी। जिसके संबंध में प्रतिसार निरीक्षक ने डीएम को एक पत्र भेजकर वाहन व ईंधन की व्यवस्था किए जाने का अनुरोध किया था। ऐसे में उलटे बाढ़ आपदा विभाग ने प्रतिसार निरीक्षक को पत्र भेजकर वाहन व ईंधन की व्यवस्था स्वयं करने के साथ उसका बिल बनाकर भुगतान के लिए भेजने को कहा गया। ऐसे में एलाटमेंट के बाद भी फ्लड पीएसी जिले में नहीं आ सकी। इस संबंध में प्रतिसार निरीक्षक बालकृष्ण यादव का कहना है कि डीएम का पत्र मिल गया है। वाहन का इंतजाम किया जा रहा है। जिसे भेजकर फ्लड पीएसी का सामान मंगा लिया जाएगा।
टिकैतनगर संवाददाता के अनुसार तहसील क्षेत्र के अतरसुइयां, सिकरी जीवल, उमरहरा, पत्रा, मल्दहा, गढ़ी, सेमरी, बसंतपुर, काठाभीट, कोयलावर, ढेमा, गुनौली, टिकरी, जलालपुर बरई, परसावल, नैपुरा, सिहोरिया, कमियार एवं बांसगांव ऐसे 16 गांव है जहां घरों में पानी घुस जाता है। तहसील प्रशासन की मानें तो घाघरा की बाढ़ से तीन हजार हेक्टेयर में फैली फसल प्रभावित होती है। इसी प्रकार सिरौली गौसपुर तहसील के 30 राजस्व गांव प्रति वर्ष बाढ़ की चपेट में आते हैं जहां की 500 एकड़ फसल प्रति वर्ष बाढ़ से बर्बाद होती है।
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बाराबंकी। घाघरा का जलस्तर एक सेेंटीमीटर प्रतिघंटे बढ़ रहा है। उसके तेवर खतरे के निशान का छूने का बेताब है। 75 सेमी जलस्तर बढ़ते ही घाघरा खतरे के निशान को पार कर तबाही मचना शुरू कर देगी। जिसको लेकर प्रशासन ने दो कंट्रोल रूम बनाकर तैयारियां शुरू कर दी है। बाढ़ से संबंधित सूचनाओं के आदान-प्रदान एवं प्रभावी नियंत्रण के लिए पहला बाढ़ का कंट्रोल रूम कलेक्ट्रेट परिसर में बनाया गया है। यह जिला बाढ़ नियंत्रण कक्ष प्रत्येक दिवस 24 घण्टे कार्य करेगा। जिसका दूरभाष नम्बर-05248-226017 एवं टोल फ्री नम्बर-1077 है। वहीं दूसरा कंट्रोल रूम एडीएम आवास के सामने स्थित कैनाल कालोनी में स्थित पंचम उपखण्ड के कार्यालय परिसर में भी बनाया गया है। यह भी 24 घण्टे कार्य करेगा। इस कन्ट्रोल रूम का दूरभाष नम्बर 05248-222843 है। बाढ़ कन्ट्रोल रूम के प्रभारी अधिकारी सहायक अभियन्ता, पंचम, बाढ़ कार्य खण्ड को बनाया गया है। प्रशासन ने कंट्रोल रूम की स्थापना कर भले ही तैयारियां शुरू कर दी है। मगर, बाढ के तेवर के आगे नाकाफी है। बढ़ते जलस्तर को लेकर घाघरा के तराई में बसे गांव के लोगों को घाघरा की तबाही का खतरा सताने लगा है। बुधवार की देर रात घाघरा का जलस्तर बाढ़ के खतरे के निशान से 75 सेमी दूर था। बाढ़ के एसडीओं आरके सिंह की मानें तो रात में अगर कही तेज बारिश हुई तो घाघरा के जलस्तर और तेजी से बढ़ना शुरू होगा।
साधन व ईंधन के अभाव में नहीं पहुंची फ्लड पीएसी
बाढ़ राहत कार्य के लिए एक प्लाटून फलड पीएसी जिले को एलाट किए जाने की सूचना दो दिन पूर्व ही जिले में आ गई थी। मगर, लखनऊ की 32 बटालियन फ्लड पीएसी के सामान को लाने के लिए एक वाहन की मांग भी हुई थी। जिसके संबंध में प्रतिसार निरीक्षक ने डीएम को एक पत्र भेजकर वाहन व ईंधन की व्यवस्था किए जाने का अनुरोध किया था। ऐसे में उलटे बाढ़ आपदा विभाग ने प्रतिसार निरीक्षक को पत्र भेजकर वाहन व ईंधन की व्यवस्था स्वयं करने के साथ उसका बिल बनाकर भुगतान के लिए भेजने को कहा गया। ऐसे में एलाटमेंट के बाद भी फ्लड पीएसी जिले में नहीं आ सकी। इस संबंध में प्रतिसार निरीक्षक बालकृष्ण यादव का कहना है कि डीएम का पत्र मिल गया है। वाहन का इंतजाम किया जा रहा है। जिसे भेजकर फ्लड पीएसी का सामान मंगा लिया जाएगा।
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टिकैतनगर संवाददाता के अनुसार तहसील क्षेत्र के अतरसुइयां, सिकरी जीवल, उमरहरा, पत्रा, मल्दहा, गढ़ी, सेमरी, बसंतपुर, काठाभीट, कोयलावर, ढेमा, गुनौली, टिकरी, जलालपुर बरई, परसावल, नैपुरा, सिहोरिया, कमियार एवं बांसगांव ऐसे 16 गांव है जहां घरों में पानी घुस जाता है। तहसील प्रशासन की मानें तो घाघरा की बाढ़ से तीन हजार हेक्टेयर में फैली फसल प्रभावित होती है। इसी प्रकार सिरौली गौसपुर तहसील के 30 राजस्व गांव प्रति वर्ष बाढ़ की चपेट में आते हैं जहां की 500 एकड़ फसल प्रति वर्ष बाढ़ से बर्बाद होती है।
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