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प्राइमरी स्कूलों की दुर्दशा पर हाईकोर्ट का कड़ा निर्देश

Thu, 31 Aug 2017 01:42 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Thu, 31 Aug 2017 01:42 AM IST
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High Court's strict instructions on the plight of primary schools
allahabad high court
प्राथमिक स्कूलों की दुर्दशा को गंभीरता से लेते हुए हाईकोर्ट ने सरकार को कड़े निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने प्रमुख सचिव बेसिक शिक्षा को तत्काल कदम उठाते हुए स्कूलों को मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराने का निर्देश दिया है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी इलाहाबाद को निर्देश दिया है कि वह स्वयं स्कूलों में जाकर देखें कि कहां क्या कमियां हैं। उनको फौरन दूर किया जाए। कोर्ट कमिश्नर को सरकार और विभाग द्वारा उठाए कदमों पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर अदालत में 22 सितंबर तक प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
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विधि छात्रों द्वारा दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही मुख्य न्यायमूर्ति डीबी भोसले और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की पीठ ने अधिवक्ता उदयन नंदन को इस याचिका मे कोर्ट कमिश्नर नियुक्त किया है। कोर्ट ने कमिश्नर अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में कहा है कि जिले के तमाम प्राथमिक स्कूलों की हालत काफी खस्ता है। वहां मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। कई स्कूलों में बाउंड्री वाल नहीं हैं। भवन जर्जर हैं वहां बच्चों को बैठाना सुरक्षित नहीं है। बरसात के दिनों में कई स्कूलों की छतें टपकती हैं। टॉयलेट और पेयजल जैसी बेसिक सुविधाएं भी स्कूलों में नहीं हैं। कुछ स्कूलों के नजदीक दो सौ मीटर से भी कम दूरी पर शराब की दुकानें हैं जिससे वहां माहौल खराब रहता है। एक स्कूल की फील्ड में पशुओं का वध किया जाता है।
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इस रिपोर्ट को गंभीरता से लेते हुए पीठ ने कहा कि बच्चों को ऐसी हालत में नहीं छोड़ा जा सकता है। प्राथमिक शिक्षा बच्चों का मौलिक अधिकार है। प्रमुख सचिव को निर्देश दिया है कि समयबद्ध योजना बनाकर ठोस कदम उठाए जाएं तथा स्कूलों को सभी जरूरी सुविधाएं दी जाएं। विशेषकर टॉयलेट और पीने के पानी की व्यवस्था तत्काल की जाए। जिन स्कूलों में बिजली नहीं हैं उनको कनेक्शन दिया जाए और जिनका कनेक्शन बिल जमा नहीं होने के कारण काटा गया है उनको भी जोड़ा जाए।
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कोर्ट ने कहा कि प्रमुख सचिव बेसिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दें कि वह स्कूलों का नियमित निरीक्षण कर वहां की कमियों को दूर करें। मामले की अगली सुनवाई 22 सितंबर को होगी। 
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