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संस्कृत से भेदभाव करना अपराध है: हाईकोर्ट
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Fri, 01 Dec 2017 01:19 AM IST
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संस्कृत
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हाईकोर्ट ने कहा है कि संस्कृत भाषा देश की सांस्कृतिक एकता, विज्ञान और सभ्यता के विकास की आधारशिला है। इससे भेदभाव करना अपराध है। इसी प्रकार से संस्कृत पढ़ाने वाले अध्यापकों के साथ भेदभाव करना विकास की जड़ काटना है। कोर्ट ने कहा, संस्कृत पढ़ाने वाले अध्यापकों को वेतन और पेंशन देने में भेदभाव करना राष्ट्रीय अपराध है।
इंटरमीडिएट कालेजोें से संबद्ध प्राइमरी स्कूल के अध्यापकों की तरह संस्कृत महाविद्यालयों से संबद्ध विद्यालयों के अध्यापकों को वेतन और पेंशन आदि देने की मांग को लेकर दाखिल याचिका पर न्यायमूर्ति एसपी केसरवानी ने प्रदेश सरकार को संस्कृत विद्यालयों के संबंध में छह माह में नियमावली बनाने का आदेश दिया है। देवरिया के सत्यनारायण संस्कृत महाविद्यालय बरारी बैतालपुर के प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापक मार्कण्डेय मणि ने याचिका दाखिल कर इंटर कालेजों से संबद्ध प्राथमिक विद्यालयों के अध्यापकों के समान सेवानिवृत्ति परिलाभ देने क मांग की थी।
कोर्ट ने कहा कि संस्कृत विद्यालयों के अध्यापकों को भी दूसरे अध्यापकों के समान ही वेतन और पेंशन आदि पाने का अधिकार है। कोर्ट ने समान पेंशन देने से इंकार करने संबंधी सरकार का आदेश रद्द कर दिया है। और याची को तीन माह के भीतर भुगतान करने का निर्देश देते हुए मुख्य सचिव से भी कहा है कि वह संस्कृत विद्यालयों से संबद्ध प्राथमिक विद्यालयों के अध्यापकों को पेंशन आदि लाभ देने के लिए इस आदेश का पालन सुनिश्चित करें। कोर्ट ने कहा कि प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा बच्चों के विकास की आधार शिला हैं ऐसे में अध्यापकों को पेंशन देने से इंकार करना मनमानापूर्ण है। देश की एकता और अखंडता में संस्कृत का महत्वपूर्ण योगदान है।
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इंटरमीडिएट कालेजोें से संबद्ध प्राइमरी स्कूल के अध्यापकों की तरह संस्कृत महाविद्यालयों से संबद्ध विद्यालयों के अध्यापकों को वेतन और पेंशन आदि देने की मांग को लेकर दाखिल याचिका पर न्यायमूर्ति एसपी केसरवानी ने प्रदेश सरकार को संस्कृत विद्यालयों के संबंध में छह माह में नियमावली बनाने का आदेश दिया है। देवरिया के सत्यनारायण संस्कृत महाविद्यालय बरारी बैतालपुर के प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापक मार्कण्डेय मणि ने याचिका दाखिल कर इंटर कालेजों से संबद्ध प्राथमिक विद्यालयों के अध्यापकों के समान सेवानिवृत्ति परिलाभ देने क मांग की थी।
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कोर्ट ने कहा कि संस्कृत विद्यालयों के अध्यापकों को भी दूसरे अध्यापकों के समान ही वेतन और पेंशन आदि पाने का अधिकार है। कोर्ट ने समान पेंशन देने से इंकार करने संबंधी सरकार का आदेश रद्द कर दिया है। और याची को तीन माह के भीतर भुगतान करने का निर्देश देते हुए मुख्य सचिव से भी कहा है कि वह संस्कृत विद्यालयों से संबद्ध प्राथमिक विद्यालयों के अध्यापकों को पेंशन आदि लाभ देने के लिए इस आदेश का पालन सुनिश्चित करें। कोर्ट ने कहा कि प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा बच्चों के विकास की आधार शिला हैं ऐसे में अध्यापकों को पेंशन देने से इंकार करना मनमानापूर्ण है। देश की एकता और अखंडता में संस्कृत का महत्वपूर्ण योगदान है।
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