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जीएसटी, बेनामी संपत्ति में प्रतियोगी भी उलझे
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Mon, 19 Jun 2017 01:57 AM IST
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इलाहाबाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) ने इस वक्त सभी को उलझा रखा है। रविवार को संघ लोक सेवा आयोग की प्रारंभिक परीक्षा में प्रतियोगी भी इसमें उलझ गए। नोटबंदी का दौर बीता तो बेनामी संपत्ति मुद्दा बन गई। प्रतियोगियों को बेनामी प्रापर्टी ट्रांजेक्शन ऐक्ट से जुड़े सवाल का भी सामना करना पड़ा। जैसा विशेषज्ञों का अनुमान था, प्रारंभिक परीक्षा में भारतीय राजव्यवस्था, सरकारी योजनाओं और पर्यावरण से जुड़े प्रश्न छाए रहे। विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार आयोग ने पेपर का ट्रेंड बदला है। अप्लायड प्रकार के सवालों की संख्या काफी अधिक रही, जो पूर्व की परीक्षाओं में देखने को नहीं मिलती थी।
सबसे अधिक तकरीबन 20 सवाल भारतीय राजव्यवस्था से पूछे गए। जीएस वर्ल्ड के एकेडमिक निदेशक दीपक सिंह ने बताया इस विषय के तहत वही सवाल पूछे गए, जिनसे जुड़ी घटनाएं पिछले दिनों चर्चा में रही हैं। मसलन, निर्वाचन आयोग के अधिकार, पार्टी विभाजन के विवाद को आयोग किस तरह निपटाता है, मंत्रिमंडल, सरकार, मताधिकार से संबंधित सवाल। पर्यावरण एवं पारिस्थितिकीय से भी आठ से दस सवाल पूछे गए। प्रश्नपत्र में गुजरात के शेरों को भी जगह दी गई और पूछा गया कि उन्हें कहां स्थानांतरित करने का प्रस्ताव था।
सिविल सेवा परीक्षा संबंधी लेखन कार्य से जुड़े सिद्धार्थ श्रीवास्तव का कहना है कि इस बार जिस तरह के सवाल पूछे गए हैं, उनसे संकेत मिल रहे है कि यूपीएससी परंपरागत सवालों से हटकर नए ट्रेंड पर चल चुका है। ऐसे में जानकारी के साथ विषय की गहरी समझ रखने वाले प्रतियोगियों को ज्यादा फायदा मिलेगा। आईएएस ध्येय के मुख्य समन्वयक वेद प्रकाश राजपूत का मानना है कि पेपर स्तरीय था। भूमध्यसागर के बारे में सवाल पूछा गया लेकिन इसका जवाब सिर्फ किताब से नहीं मिल सकता। जिसने मैप का अध्ययन किया होगा, वही सही जवाब दे पाया होगा। उन्होंने बताया कि सरकारी योजनाओं, खासकर वे योजनाएं जो पिछले दिनों या इस समय चर्चा में हैं, उन पर कई सवाल पूछे गए। जीएसटी, राष्ट्रीय कौशल योजना, राष्ट्रीय पोषण मिशन, मृदा स्वास्थ्य कार्य, विद्यांजलि योजना, उन्नत भारत योजना से संबंधित सवालों के साथ अर्थ व्यवस्था से संबंधित सवालों को भी प्रश्नपत्र में पर्याप्त जगह दी गई।
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विशेषज्ञों का कहना है कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय और दिल्ली विश्वविद्यालय के विद्यार्थी शुरू से ही भारतीय राजव्यवस्था और अर्थव्यवस्था विषय में आगे रहे हैं। रविवार को हुई आईएएस-प्री परीक्षा में इन विषयों से जुड़े सवालों की संख्या काफी अधिक रही। ऐसे में इलाहाबाद के विद्यार्थियों के लिए पेपर अच्छा माना जाएगा।
इलाहाबाद में आधे प्रतियोगियों ने परीक्षा छोड़ दी। सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के लिए इलाहाबाद में 77 केंद्र बनाए गए थे और 37418 प्रतियोगियों ने आवेदन किए थे। परीक्षा दो पालियों में सुबह 9.30 से 11.30 और अपराह्न 2.30 से 4.30 बजे तक हुई। दोनों पालियों में प्रतियोगियों की उपस्थिति 51.45 फीसदी रही। पहली पाली में 19489 प्रतियोगी परीक्षा देने पहुंचे लेकिन दूसरी पाली में इनमें से 19251 ने परीक्षा दी। इस बार पिछले साल की तुलना में दस फीसदी अधिक उपस्थिति रही। परीक्षा केंद्रों को तीन जोन एवं 25 सेक्टरों में बांटा गया था। परीक्षा केंद्रों की निगरानी के लिए तीन आईएएस और एक पीसीएस अफसर की तैनाती शासन स्तर से हुई थी। जिला प्रशासन का दावा है कि परीक्षा शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराई गई।
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सबसे अधिक तकरीबन 20 सवाल भारतीय राजव्यवस्था से पूछे गए। जीएस वर्ल्ड के एकेडमिक निदेशक दीपक सिंह ने बताया इस विषय के तहत वही सवाल पूछे गए, जिनसे जुड़ी घटनाएं पिछले दिनों चर्चा में रही हैं। मसलन, निर्वाचन आयोग के अधिकार, पार्टी विभाजन के विवाद को आयोग किस तरह निपटाता है, मंत्रिमंडल, सरकार, मताधिकार से संबंधित सवाल। पर्यावरण एवं पारिस्थितिकीय से भी आठ से दस सवाल पूछे गए। प्रश्नपत्र में गुजरात के शेरों को भी जगह दी गई और पूछा गया कि उन्हें कहां स्थानांतरित करने का प्रस्ताव था।
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सिविल सेवा परीक्षा संबंधी लेखन कार्य से जुड़े सिद्धार्थ श्रीवास्तव का कहना है कि इस बार जिस तरह के सवाल पूछे गए हैं, उनसे संकेत मिल रहे है कि यूपीएससी परंपरागत सवालों से हटकर नए ट्रेंड पर चल चुका है। ऐसे में जानकारी के साथ विषय की गहरी समझ रखने वाले प्रतियोगियों को ज्यादा फायदा मिलेगा। आईएएस ध्येय के मुख्य समन्वयक वेद प्रकाश राजपूत का मानना है कि पेपर स्तरीय था। भूमध्यसागर के बारे में सवाल पूछा गया लेकिन इसका जवाब सिर्फ किताब से नहीं मिल सकता। जिसने मैप का अध्ययन किया होगा, वही सही जवाब दे पाया होगा। उन्होंने बताया कि सरकारी योजनाओं, खासकर वे योजनाएं जो पिछले दिनों या इस समय चर्चा में हैं, उन पर कई सवाल पूछे गए। जीएसटी, राष्ट्रीय कौशल योजना, राष्ट्रीय पोषण मिशन, मृदा स्वास्थ्य कार्य, विद्यांजलि योजना, उन्नत भारत योजना से संबंधित सवालों के साथ अर्थ व्यवस्था से संबंधित सवालों को भी प्रश्नपत्र में पर्याप्त जगह दी गई।
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विशेषज्ञों का कहना है कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय और दिल्ली विश्वविद्यालय के विद्यार्थी शुरू से ही भारतीय राजव्यवस्था और अर्थव्यवस्था विषय में आगे रहे हैं। रविवार को हुई आईएएस-प्री परीक्षा में इन विषयों से जुड़े सवालों की संख्या काफी अधिक रही। ऐसे में इलाहाबाद के विद्यार्थियों के लिए पेपर अच्छा माना जाएगा।
इलाहाबाद में आधे प्रतियोगियों ने परीक्षा छोड़ दी। सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के लिए इलाहाबाद में 77 केंद्र बनाए गए थे और 37418 प्रतियोगियों ने आवेदन किए थे। परीक्षा दो पालियों में सुबह 9.30 से 11.30 और अपराह्न 2.30 से 4.30 बजे तक हुई। दोनों पालियों में प्रतियोगियों की उपस्थिति 51.45 फीसदी रही। पहली पाली में 19489 प्रतियोगी परीक्षा देने पहुंचे लेकिन दूसरी पाली में इनमें से 19251 ने परीक्षा दी। इस बार पिछले साल की तुलना में दस फीसदी अधिक उपस्थिति रही। परीक्षा केंद्रों को तीन जोन एवं 25 सेक्टरों में बांटा गया था। परीक्षा केंद्रों की निगरानी के लिए तीन आईएएस और एक पीसीएस अफसर की तैनाती शासन स्तर से हुई थी। जिला प्रशासन का दावा है कि परीक्षा शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराई गई।