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जान लें, जीएसटी के बिल ऐसे बनाए जाएंगे
अमर उजाला ब्यूूराे
Updated Thu, 06 Jul 2017 01:55 AM IST
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उत्तर प्रदेश के वाणिज्य कर आयुक्त मुकेश कुमार मेश्राम ने जीएसटी के तहत टैक्स इनवायस और आपूर्ति बिल बनाने का स्पष्ट सर्कुलर तीन जुलाई को जारी कर दिया है। अलीगढ़ जोन के एडिशनल कमिश्नर ग्रेड वन ने इस संबंध में संबंधित अधिकारियों को निर्देशित कर दिया है। अब इसका प्रचार व्यापारियों के बीच में किया जाएगा, ताकि भ्रम न रहे।
टैक्स इनवायस में दी जाने वाली सूचनाएं
उत्तर प्रदेश माल एवं सेवा कर अधिनियम 2017 के प्रावधानों के अनुसार टैक्स इनवायस जारी करने के लिए कोई निश्चित फार्मेट तय नहीं है। अधिनियम एवं नियमावली के अनुसार टैक्स इनवायस में निम्नवत सूचनाएं देना आवश्यक है।
1- विक्रेता या आपूर्तिकर्ता का नाम पता एवं जीएसटी नंबर।
2- इनवायस क्रमांक जो अधिकतम 16 डीजीट का हो सकता है। इन 16 डीजीट में अंक अक्षर के साथ विशेष चिन्ह जैसे हाईफन या स्लैश का भी समायोजन हो सकता है। यह नंबर पूरे वर्ष के लिए एक क्रमगत श्रंखला में होना चाहिए।
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3- क्रेता या प्राप्तकर्ता का नाम पता और जीएसटी नंबर (अगर उसके पास जीएसटी नंबर है)।
4- बिल जारी करने की तिथि।
5- प्राप्तकर्ता या क्रेता अगर जीएसटी में पंजीकृत नहीं है और आपूर्ति का मूल्य 50 हजार रुपये से अधिक है, ऐसी सूरत में उसका नाम, पता, डिलीवरी का स्थान व राज्य कोड अंकित किया जाना है।
6- वस्तुओं या सेवाओं का विवरण, मात्रा, उनकी गिनती और उसका मूल्य।
7- एचएसएन कोड।
8- कर की दर एवं वसूले गए कर की धनराशि अलग-अलग जैसे एसजीएसटी, सीजीएसटी और आईजीएसटी अलग अलग दर्ज होगी।
9- अंतर्राजीय बिक्री होने पर आपूर्ति का स्थान और राज्य का नाम।
10- आपूर्ति दिए जाने का स्थान अगर बदलता है तो वहां का पूरा पता।
11- विक्रेता अथवा उसके अधिकृत प्रतिनिधि के हस्ताक्षर या डिजीटल हस्ताक्षर के पास ही एचएसएन कोड भरना होगा। डेढ़ करोड़ रुपये तक का कारोबार करने वाले को ये कोड नहीं भरना है, इससे ऊपर कारोबार पर दो अंकों का एचएसएन कोड और पांच करोड़ से ऊपर का कारोबार होने पर चार अंकों का एचएसएन कोड भरना होगा।
12- टैक्स इनवायस तीन प्रतियों में होगी। एक विक्रेता के पास, एक ट्रांसपोर्टर के पास और एक क्रेता के पास रहेगी।
बिल ऑफ सप्लाई
बिल ऑफ सप्लाई केवल पंजीकृत व्यापारी द्वारा करमुक्त माल की बिक्री के लिए या समाधान योजना अपनाने वाले व्यापारियों द्वारा सभी प्रकार के माल की बिक्री के लिए जारी की जाएगी। जिसमें निम्न सूचनाएं देनी होगी।
1- विक्रेता का नाम, पता और जीएसटी नंबर।
2- इनवायस क्रमांक जो अधिकतम 16 डीजीट का हो सकता है। इन 16 डीजीट में अंक अक्षर के साथ विशेष चिह्न जैसे हाईफन या स्लैश का भी समायोजन हो सकता है। यह नंबर पूरे वर्ष के लिए एक क्रमगत श्रखंला में होना चाहिए।
3- प्राप्तकर्ता का नाम, पता और जीएसटी नंबर (अगर उसके पास जीएसटी नंबर है)।
4- बिल जारी करने की तिथि।
5- एचएसएन कोड।
6- वस्तु या सेवा का मूल्य।
7- विक्रेता या उसके प्रतिनिधि के हस्ताक्षर।
खास बात
टैक्स इनवायस या सप्लाई बिल कंप्यूटर से ही जारी करना जरूरी नहीं है। मैनुअली भी बना सकते हैं।
व्यापारी दोनों तरह के बिल में सूचनाओं का क्रम सुविधानुसार चुन सकते हैं। जो सूचनाएं उनके लिए अपेक्षित नहीं है उनको छोड़ दें।
हेल्प डेस्क में आने वाले अधिकांश व्यापारियों के सवाल बिल को लेकर हैं। स्थिति स्पष्ट हो गई है। हम सभी व्यापारिक संगठनों, अधिवक्ताओं के संगठन और सीए एसोसिएशन को इसकी प्रतियां उपलब्ध कराएंगे। ताकि हर माध्यम से बिल की स्पष्ट जानकारी मिल सके। विभागीय हेल्प डेस्क पर भी ये सुविधा दी जा रही है।
एके जैन, एडिशनल कमिश्नर अलीगढ़ जोन।
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टैक्स इनवायस में दी जाने वाली सूचनाएं
उत्तर प्रदेश माल एवं सेवा कर अधिनियम 2017 के प्रावधानों के अनुसार टैक्स इनवायस जारी करने के लिए कोई निश्चित फार्मेट तय नहीं है। अधिनियम एवं नियमावली के अनुसार टैक्स इनवायस में निम्नवत सूचनाएं देना आवश्यक है।
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1- विक्रेता या आपूर्तिकर्ता का नाम पता एवं जीएसटी नंबर।
2- इनवायस क्रमांक जो अधिकतम 16 डीजीट का हो सकता है। इन 16 डीजीट में अंक अक्षर के साथ विशेष चिन्ह जैसे हाईफन या स्लैश का भी समायोजन हो सकता है। यह नंबर पूरे वर्ष के लिए एक क्रमगत श्रंखला में होना चाहिए।
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3- क्रेता या प्राप्तकर्ता का नाम पता और जीएसटी नंबर (अगर उसके पास जीएसटी नंबर है)।
4- बिल जारी करने की तिथि।
5- प्राप्तकर्ता या क्रेता अगर जीएसटी में पंजीकृत नहीं है और आपूर्ति का मूल्य 50 हजार रुपये से अधिक है, ऐसी सूरत में उसका नाम, पता, डिलीवरी का स्थान व राज्य कोड अंकित किया जाना है।
6- वस्तुओं या सेवाओं का विवरण, मात्रा, उनकी गिनती और उसका मूल्य।
7- एचएसएन कोड।
8- कर की दर एवं वसूले गए कर की धनराशि अलग-अलग जैसे एसजीएसटी, सीजीएसटी और आईजीएसटी अलग अलग दर्ज होगी।
9- अंतर्राजीय बिक्री होने पर आपूर्ति का स्थान और राज्य का नाम।
10- आपूर्ति दिए जाने का स्थान अगर बदलता है तो वहां का पूरा पता।
11- विक्रेता अथवा उसके अधिकृत प्रतिनिधि के हस्ताक्षर या डिजीटल हस्ताक्षर के पास ही एचएसएन कोड भरना होगा। डेढ़ करोड़ रुपये तक का कारोबार करने वाले को ये कोड नहीं भरना है, इससे ऊपर कारोबार पर दो अंकों का एचएसएन कोड और पांच करोड़ से ऊपर का कारोबार होने पर चार अंकों का एचएसएन कोड भरना होगा।
12- टैक्स इनवायस तीन प्रतियों में होगी। एक विक्रेता के पास, एक ट्रांसपोर्टर के पास और एक क्रेता के पास रहेगी।
बिल ऑफ सप्लाई
बिल ऑफ सप्लाई केवल पंजीकृत व्यापारी द्वारा करमुक्त माल की बिक्री के लिए या समाधान योजना अपनाने वाले व्यापारियों द्वारा सभी प्रकार के माल की बिक्री के लिए जारी की जाएगी। जिसमें निम्न सूचनाएं देनी होगी।
1- विक्रेता का नाम, पता और जीएसटी नंबर।
2- इनवायस क्रमांक जो अधिकतम 16 डीजीट का हो सकता है। इन 16 डीजीट में अंक अक्षर के साथ विशेष चिह्न जैसे हाईफन या स्लैश का भी समायोजन हो सकता है। यह नंबर पूरे वर्ष के लिए एक क्रमगत श्रखंला में होना चाहिए।
3- प्राप्तकर्ता का नाम, पता और जीएसटी नंबर (अगर उसके पास जीएसटी नंबर है)।
4- बिल जारी करने की तिथि।
5- एचएसएन कोड।
6- वस्तु या सेवा का मूल्य।
7- विक्रेता या उसके प्रतिनिधि के हस्ताक्षर।
खास बात
टैक्स इनवायस या सप्लाई बिल कंप्यूटर से ही जारी करना जरूरी नहीं है। मैनुअली भी बना सकते हैं।
व्यापारी दोनों तरह के बिल में सूचनाओं का क्रम सुविधानुसार चुन सकते हैं। जो सूचनाएं उनके लिए अपेक्षित नहीं है उनको छोड़ दें।
हेल्प डेस्क में आने वाले अधिकांश व्यापारियों के सवाल बिल को लेकर हैं। स्थिति स्पष्ट हो गई है। हम सभी व्यापारिक संगठनों, अधिवक्ताओं के संगठन और सीए एसोसिएशन को इसकी प्रतियां उपलब्ध कराएंगे। ताकि हर माध्यम से बिल की स्पष्ट जानकारी मिल सके। विभागीय हेल्प डेस्क पर भी ये सुविधा दी जा रही है।
एके जैन, एडिशनल कमिश्नर अलीगढ़ जोन।