{"_id":"588e389a4f1c1b7d3de80763","slug":"yamuna","type":"story","status":"publish","title_hn":"यमुना का जलस्तर घटा, पानी में प्रदूषण बढ़ा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
यमुना का जलस्तर घटा, पानी में प्रदूषण बढ़ा
यमुना का जलस्तर घटा, पानी में प्रदूषण बढ़ा
Updated Mon, 30 Jan 2017 12:16 AM IST
विज्ञापन
मथुरा में यमुना का हाल
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सर्दी के मौसम में भी शहर की जनता को शुद्ध पानी नहीं मिल पा रहा है। यमुना का जलस्तर काफी घट गया है। जबकि पानी में प्रदूषण की मात्रा में इजाफा हुआ है। पानी में मिट्टी और कीचड़ की मात्रा बढ़ गई है, जिसके चलते जलकल विभाग को एलम की डोज 170 पीपीएम तक बढ़ानी पड़ी है। क्लोरीन भी मानक से छह गुना अधिक प्रयोग हो रही है।
गर्मियों के दिनों में पेयजल की किल्लत विकराल हो जाती है। शहर में हाहाकार मचने लगता है। अब तो सर्दियों में भी जनता को शुद्ध पानी नहीं मिल पा रहा है। यमुना नदी का पानी बेहद दूषित है इसे शुद्ध करने में जलकल विभाग को पसीना आ रहा है। जलकल विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जलस्तर कम होने के कारण पानी में कीचड़ की मात्रा अधिक है। पिछले दिनों तक गोकुल बैराज से पानी 800 से 900 क्यूसेक तक छोड़ा जा रहा था। अब गोकुल बैराज से डिस्चार्ज बढ़कर करीब 1100 क्यूसेक हो गया लेकिन पानी की गुणवत्ता में सुधार नहीं हो रहा है। कीचड़ और मिट्टी को काटने के लिए करीब 170 पीपीएम तक एलम (फिटकरी) की डोज दी जा रही है। इसी तरह क्लोरीन की डोज भी करीब 60-70 पीपीएम तक है, जो सामान्य से कई गुना अधिक है। सामान्य रूप से पानी में क्लोरीन करीब 10 पीपीएम और एलम 40 पीपीएम तक प्रयोग होती है।
सैटेलाइट से होगी सफाई की मानीटरिंग
आगरा।शहर की सफाई व्यवस्था को लेकर नगर निगम अब माइक्रो लेबल प्लान तैयार कर रहा है। इस प्लान के लागू होने से शहर की एक-एक गली की स्थिति का पता नगर निगम में बैठकर ही लग सकेगा। इससे यह भी जानकारी हासिल हो सकेगी कि किस गली में सफाई हुई है और किस गली में अभी तक कर्मचारी पहुंचे नहीं हैं।
विज्ञापन
नगर आयुक्त इंद्र विक्रम सिंह ने बताया कि आगरा देश का पहला ऐसा शहर होगा जहां सफाई व्यवस्था की मानीटरिंग जीपीएस के माध्यम से होगी। माइक्रो लेबल प्लान के जरिए पूरे शहर का सैटेलाइट मैप तैयार कराया जाएगा और उस मैप को ग्लोबल पोजीशनिंग सिस्टम (जीपीएस) से लिंक किया जाएगा। इससे सिस्टम के माध्यम से यह पता लग सकेगा कि शहर के किस हिस्से में कितने डलाबघर हैं। कितने छोटे बिंस लगे हैं और कितने बड़े बिंस हैं। कहां और बिंस लगाने की जरूरत है। वाहनों और मशीनों को भी जीपीएस से लिंक किया जाएगा। नए सिस्टम से यह भी पता चल सकेगा शहर के किस हिस्से में सफाई हुई है। किस हिस्से में डलाबघर साफ हुए हैं। कर्मचारी अब धोखा नहीं दे सकेंगे। शहर की हर रिहाइशी और व्यवसायिक इमारत का ब्योरा होगा।
ताजगंज क्षेत्र का मैप हो गया तैयार
नगर आयुक्त इंद्र विक्रम सिंह ने बताया कि इस कार्य में करीब एक वर्ष का समय लगेगा। इस वजह से इसे तीन चरणों में किया जाएगा। पहले चरण में ताजगंज क्षेत्र का सर्वे हुआ है। गलियों, भवनों का सर्वे होकर सैटेलाइट मैप तैयार कर लिया गया है। ताजगंज के कुछ इलाकों में पायलट प्रोजेक्ट को प्रारंभ किया जाएगा। फिर पूरे वार्ड और उसके चरणबद्ध तरीके पूरे शहर में काम होगा।
विज्ञापन
गर्मियों के दिनों में पेयजल की किल्लत विकराल हो जाती है। शहर में हाहाकार मचने लगता है। अब तो सर्दियों में भी जनता को शुद्ध पानी नहीं मिल पा रहा है। यमुना नदी का पानी बेहद दूषित है इसे शुद्ध करने में जलकल विभाग को पसीना आ रहा है। जलकल विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जलस्तर कम होने के कारण पानी में कीचड़ की मात्रा अधिक है। पिछले दिनों तक गोकुल बैराज से पानी 800 से 900 क्यूसेक तक छोड़ा जा रहा था। अब गोकुल बैराज से डिस्चार्ज बढ़कर करीब 1100 क्यूसेक हो गया लेकिन पानी की गुणवत्ता में सुधार नहीं हो रहा है। कीचड़ और मिट्टी को काटने के लिए करीब 170 पीपीएम तक एलम (फिटकरी) की डोज दी जा रही है। इसी तरह क्लोरीन की डोज भी करीब 60-70 पीपीएम तक है, जो सामान्य से कई गुना अधिक है। सामान्य रूप से पानी में क्लोरीन करीब 10 पीपीएम और एलम 40 पीपीएम तक प्रयोग होती है।
विज्ञापन
सैटेलाइट से होगी सफाई की मानीटरिंग
आगरा।शहर की सफाई व्यवस्था को लेकर नगर निगम अब माइक्रो लेबल प्लान तैयार कर रहा है। इस प्लान के लागू होने से शहर की एक-एक गली की स्थिति का पता नगर निगम में बैठकर ही लग सकेगा। इससे यह भी जानकारी हासिल हो सकेगी कि किस गली में सफाई हुई है और किस गली में अभी तक कर्मचारी पहुंचे नहीं हैं।
विज्ञापन
नगर आयुक्त इंद्र विक्रम सिंह ने बताया कि आगरा देश का पहला ऐसा शहर होगा जहां सफाई व्यवस्था की मानीटरिंग जीपीएस के माध्यम से होगी। माइक्रो लेबल प्लान के जरिए पूरे शहर का सैटेलाइट मैप तैयार कराया जाएगा और उस मैप को ग्लोबल पोजीशनिंग सिस्टम (जीपीएस) से लिंक किया जाएगा। इससे सिस्टम के माध्यम से यह पता लग सकेगा कि शहर के किस हिस्से में कितने डलाबघर हैं। कितने छोटे बिंस लगे हैं और कितने बड़े बिंस हैं। कहां और बिंस लगाने की जरूरत है। वाहनों और मशीनों को भी जीपीएस से लिंक किया जाएगा। नए सिस्टम से यह भी पता चल सकेगा शहर के किस हिस्से में सफाई हुई है। किस हिस्से में डलाबघर साफ हुए हैं। कर्मचारी अब धोखा नहीं दे सकेंगे। शहर की हर रिहाइशी और व्यवसायिक इमारत का ब्योरा होगा।
ताजगंज क्षेत्र का मैप हो गया तैयार
नगर आयुक्त इंद्र विक्रम सिंह ने बताया कि इस कार्य में करीब एक वर्ष का समय लगेगा। इस वजह से इसे तीन चरणों में किया जाएगा। पहले चरण में ताजगंज क्षेत्र का सर्वे हुआ है। गलियों, भवनों का सर्वे होकर सैटेलाइट मैप तैयार कर लिया गया है। ताजगंज के कुछ इलाकों में पायलट प्रोजेक्ट को प्रारंभ किया जाएगा। फिर पूरे वार्ड और उसके चरणबद्ध तरीके पूरे शहर में काम होगा।