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नकली नोट चलाने में 20 और बांग्लादेशी महिलाएं फंसी
अमर उजाला ब्यूरो आगरा।
Updated Thu, 27 Apr 2017 12:12 AM IST
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Fake Currency
नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) को जानकारी मिली है कि बांग्लादेशी मूल की आगरा में रह रहीं 12 और फिरोजाबाद की आठ महिलाएं जाली करेंसी चलाने का काम कर रही हैं। इनके पास बांग्लादेश के मालदा से लगातार नकली नोट भेजे जा रहे हैं। इसी रैकेट में शामिल आगरा के एत्माद्दौला की फातिमा उर्फ लीची को एनआईए ने 16 फरवरी को गिरफ्तार किया था। उसी से मिली जानकारी के आधार पर अब 20 और महिलाओं के बारे में पड़ताल शुरू की गई है। इसी सिलसिले में एनआईए की टीम ने मंगलवार रात आगरा में आकर लंबी छानबीन की।
एत्माद्दौला के सुशील नगर की मस्जिद वाली गली निवासी शेर अली की बीवी लीची ( 41) मूल रूप से बांग्लादेश के चापई नवाबगंज जिले की है। वह बगैर वीजा के बार्डर क्रॉस करके आई थी। शेर अली से शादी कर उसके साथ रह रही थी। दिखाने के लिए सब्जी बेचने का काम करती थी लेकिन असली धंधा जाली करेंसी चलाने का था। उसने गलत जानकारी देकर पासपोर्ट भी बनवा लिया था। उसके पास जाली करेंसी की खेप चापई नवाबगंज का ही अनवार लेकर आता था।
उसे पश्चिमी बंगाल पुलिस ने 18 जनवरी 2016 को दो लाख की जाली करेंसी के साथ पकड़ा था। ये नोट ढाका में प्रिटिंग प्रेस में छपे थे, जो दिखने में असली जैसे थे। इसके चलते जांच एनआईए को दी गई। इस रैकेट का सरगना चापई नवाबगंज का अपल शेख उर्फ एप्पल है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि एनआईए को अनवार से लीची का नाम मिला था। लीची से पूछताछ में 20 और महिलाओं के बारे में जानकारी मिली है। अब उनके बारे में साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। लीची इन्हें जाली करेंसी की सप्लाई देती थी। इसी सिलसिले में पूछताछ के लिए कोलकाता से एनआईए की टीम मंगलवार रात आगरा पहुंची। उसने एत्माद्दौला क्षेत्र में 20-25 लोगों से पूछताछ की और उन बांग्लादेशी महिलाओं के बारे में जानकारी जुटाई जिनके बारे में लीची ने बताया था। इसके बाद फिरोजाबाद में जाकर भी पड़ताल की।
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नगर निगम का कर्मचारी भी शामिल
आगरा। एनआईए को जानकारी मिली है कि आगरा नगर निगम का एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भी जाली करेंसी की सप्लाई करता है। उसके तार लीची से जुड़े मिले हैं। उसकी पत्नी भी मूल रूप से बांग्लादेश की है। लीची की गिरफ्तारी के समय एनआईए ने कर्मचारी से पूछताछ की थी। बुधवार सुबह भी उसे एत्माद्दौला थाना बुलाकर उससे सवाल किए गए। पुलिस सूत्रों ने बताया कि उसके खिलाफ अभी साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।
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एत्माद्दौला के सुशील नगर की मस्जिद वाली गली निवासी शेर अली की बीवी लीची ( 41) मूल रूप से बांग्लादेश के चापई नवाबगंज जिले की है। वह बगैर वीजा के बार्डर क्रॉस करके आई थी। शेर अली से शादी कर उसके साथ रह रही थी। दिखाने के लिए सब्जी बेचने का काम करती थी लेकिन असली धंधा जाली करेंसी चलाने का था। उसने गलत जानकारी देकर पासपोर्ट भी बनवा लिया था। उसके पास जाली करेंसी की खेप चापई नवाबगंज का ही अनवार लेकर आता था।
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उसे पश्चिमी बंगाल पुलिस ने 18 जनवरी 2016 को दो लाख की जाली करेंसी के साथ पकड़ा था। ये नोट ढाका में प्रिटिंग प्रेस में छपे थे, जो दिखने में असली जैसे थे। इसके चलते जांच एनआईए को दी गई। इस रैकेट का सरगना चापई नवाबगंज का अपल शेख उर्फ एप्पल है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि एनआईए को अनवार से लीची का नाम मिला था। लीची से पूछताछ में 20 और महिलाओं के बारे में जानकारी मिली है। अब उनके बारे में साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। लीची इन्हें जाली करेंसी की सप्लाई देती थी। इसी सिलसिले में पूछताछ के लिए कोलकाता से एनआईए की टीम मंगलवार रात आगरा पहुंची। उसने एत्माद्दौला क्षेत्र में 20-25 लोगों से पूछताछ की और उन बांग्लादेशी महिलाओं के बारे में जानकारी जुटाई जिनके बारे में लीची ने बताया था। इसके बाद फिरोजाबाद में जाकर भी पड़ताल की।
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नगर निगम का कर्मचारी भी शामिल
आगरा। एनआईए को जानकारी मिली है कि आगरा नगर निगम का एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भी जाली करेंसी की सप्लाई करता है। उसके तार लीची से जुड़े मिले हैं। उसकी पत्नी भी मूल रूप से बांग्लादेश की है। लीची की गिरफ्तारी के समय एनआईए ने कर्मचारी से पूछताछ की थी। बुधवार सुबह भी उसे एत्माद्दौला थाना बुलाकर उससे सवाल किए गए। पुलिस सूत्रों ने बताया कि उसके खिलाफ अभी साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।