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दस साल में बढ़ गई सैकड़ों बीघा जमीन, ईडी से जांच की सिफारिश
Updated Tue, 24 Oct 2017 11:19 PM IST
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जिले के पूर्व विधायक और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ चल रही जांच को प्रवर्तन निदेशालय से कराने की सिफारिश की है। मामले में एक बड़े नेता ने मुख्यमंत्री से पूर्व विधायक के नाम सैकड़ों बीघा जमीन होने की शिकायत की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए विशेष सचिव को जांच कराने के निर्देश दिए हैं।
शिकायत में कहा गया है कि अलीगंज से पूर्व विधायक रामेश्वर सिंह यादव के नाम 92.5 बीघा कृषि भूमि, 19 बीघा गैर कृषि भूमि, 1485 वर्ग फुट वाणिज्य भूमि, 14330 वर्ग फुट आवासीय भूमि है। साथ ही पूर्व विधायक की पत्नी राममूर्ति देवी के नाम पर 138 बीघा कृषि भूमि है।
साथ ही पूर्व विधायक के भाई पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष जुगेंद्र सिंह यादव के खिलाफ 108.9 बीघा कृषि भूमि, 20 बीघा गैर कृषि भूमि, 1546 वर्ग फीट वाणिज्य भूमि, 14738 वर्गफुट आवासीय भूमि है। उनकी पत्नी रेखा यादव के नाम पर भी 143 बीघा कृषि भूमि, 25 बीघा गैर कृषि भूमि, 600 वर्ग फीट वाणिज्य भूमि, 23193 वर्ग फुट आवासीय भूमि है। शिकायत में यह भी जिक्र है कि दोनों भाइयों ने शीतलपुर स्थित जमीन को 21 बीघा अभिलेखों में दिखाया है। जबकि बाउंड्रीवाल के अंदर 250 बीघा जमीन में फार्म हाउस बना हुआ है। वहीं आसपुर स्थित जमीन को 30 बीघा दिखाकर 300 बीघा जमीन पर कब्जा किया गया है। मामले में शिकायतकर्ता ने मुख्यमंत्री को मिलकर शिकायती पत्र सौंपा है। साथ ही पूर्व विधायक और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनावी नामांकन पत्र में दाखिल संपत्ति का ब्यौरा भी सौंपा गया। मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विशेष सचिव अमित सिंह को विशेष जांच के निर्देश दिए हैं। वहीं शिकायतकर्ता ने मामले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और सीबीआई से कराने की मांग की है।
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परिचितों के नाम भी है कई बीघा जमीन
शिकायत में कहा गया है दोनों भाइयों ने अवंतीबाई नगर निवासी युवक और उसकी पत्नी, मंडी समिति के सामने निवासी युवक और तीन भाइयों के नाम भी अघोषित जमीनें ले रखी हैं।
तत्कालीन डीएम ने भी की थी सिफारिश
मामले में चुनाव के बाद तत्कालीन डीएम विजय किरन आनंद ने भी शासन से दोनों भाइयों के खिलाफ ईडी से जांच कराने की सिफारिश की थी। मगर जब तक कुछ होता, तब तक डीएम का तबादला करा दिया गया।
भाजपा के बड़े नेता जांच को दबाने में लगे
सूत्र बताते हैं कि जिले से संबंध रखने वाले भाजपा के एक बड़े नेता जांच को दबाने की कोशिश में है। मगर मुख्यमंत्री के आदेश को ध्यान में रखकर जांच तेजी से चल रही है।
62.5 बीघा से ज्यादा नहीं हो सकती भूमि
सरकारी नियमों के मुताबिक एक व्यक्ति के नाम पर 62.5 बीघा से ज्यादा की संपत्ति नहीं हो सकती है। अगर ऐसा होता है, तो उस व्यक्ति को आय का स्रोत दिखाना पड़ता है।
कुछ यूं बड़ी पूर्व विधायक की जमीनी संपत्ति
1.54 करोड़ संपत्ति थी वर्ष 2007 के चुनाव में।
5.3 करोड़ संपत्ति हो गई वर्ष 2012 के चुनाव में।
12.1 करोड़ संपत्ति हो गई वर्ष 2017 के चुनाव में
14.5 करोड़ रुपये की संपत्ति है पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष के पास
वर्जन
हमारे पूर्वज खेती करते चले आ रहे हैं। हर साल 50 लाख रुपये की फसल उगाते हैं। हमारी डेरी है, जिसमें करीब सौ गाय-भैंस है। उनका दूध बेचा जाता है। चार भट्टे हैं, एक धान मिल है। दिन रात मेहनत करते हैं। सभी का हम इनकम टैक्स अदा करते हैं। हमने न तो ग्राम पंचायत की जमीन पर कब्जा किया है और नहीं नगर पालिका की। हमने सभी जमीनों को खरीदा है। इनके बैनामा में स्टांप लगाया है। अगर सरकारी दर से भी ब्याज मिले तो दस साल में 12 करोड़ हो जाती है। हमारे विरोधी जबरन हमारे पीछे पड़े हुए हैं।
रामेश्वर सिंह यादव, पूर्व विधायक, अलीगंज
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जिले के पूर्व विधायक और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ चल रही जांच को प्रवर्तन निदेशालय से कराने की सिफारिश की है। मामले में एक बड़े नेता ने मुख्यमंत्री से पूर्व विधायक के नाम सैकड़ों बीघा जमीन होने की शिकायत की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए विशेष सचिव को जांच कराने के निर्देश दिए हैं।
शिकायत में कहा गया है कि अलीगंज से पूर्व विधायक रामेश्वर सिंह यादव के नाम 92.5 बीघा कृषि भूमि, 19 बीघा गैर कृषि भूमि, 1485 वर्ग फुट वाणिज्य भूमि, 14330 वर्ग फुट आवासीय भूमि है। साथ ही पूर्व विधायक की पत्नी राममूर्ति देवी के नाम पर 138 बीघा कृषि भूमि है।
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साथ ही पूर्व विधायक के भाई पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष जुगेंद्र सिंह यादव के खिलाफ 108.9 बीघा कृषि भूमि, 20 बीघा गैर कृषि भूमि, 1546 वर्ग फीट वाणिज्य भूमि, 14738 वर्गफुट आवासीय भूमि है। उनकी पत्नी रेखा यादव के नाम पर भी 143 बीघा कृषि भूमि, 25 बीघा गैर कृषि भूमि, 600 वर्ग फीट वाणिज्य भूमि, 23193 वर्ग फुट आवासीय भूमि है। शिकायत में यह भी जिक्र है कि दोनों भाइयों ने शीतलपुर स्थित जमीन को 21 बीघा अभिलेखों में दिखाया है। जबकि बाउंड्रीवाल के अंदर 250 बीघा जमीन में फार्म हाउस बना हुआ है। वहीं आसपुर स्थित जमीन को 30 बीघा दिखाकर 300 बीघा जमीन पर कब्जा किया गया है। मामले में शिकायतकर्ता ने मुख्यमंत्री को मिलकर शिकायती पत्र सौंपा है। साथ ही पूर्व विधायक और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनावी नामांकन पत्र में दाखिल संपत्ति का ब्यौरा भी सौंपा गया। मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विशेष सचिव अमित सिंह को विशेष जांच के निर्देश दिए हैं। वहीं शिकायतकर्ता ने मामले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और सीबीआई से कराने की मांग की है।
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परिचितों के नाम भी है कई बीघा जमीन
शिकायत में कहा गया है दोनों भाइयों ने अवंतीबाई नगर निवासी युवक और उसकी पत्नी, मंडी समिति के सामने निवासी युवक और तीन भाइयों के नाम भी अघोषित जमीनें ले रखी हैं।
तत्कालीन डीएम ने भी की थी सिफारिश
मामले में चुनाव के बाद तत्कालीन डीएम विजय किरन आनंद ने भी शासन से दोनों भाइयों के खिलाफ ईडी से जांच कराने की सिफारिश की थी। मगर जब तक कुछ होता, तब तक डीएम का तबादला करा दिया गया।
भाजपा के बड़े नेता जांच को दबाने में लगे
सूत्र बताते हैं कि जिले से संबंध रखने वाले भाजपा के एक बड़े नेता जांच को दबाने की कोशिश में है। मगर मुख्यमंत्री के आदेश को ध्यान में रखकर जांच तेजी से चल रही है।
62.5 बीघा से ज्यादा नहीं हो सकती भूमि
सरकारी नियमों के मुताबिक एक व्यक्ति के नाम पर 62.5 बीघा से ज्यादा की संपत्ति नहीं हो सकती है। अगर ऐसा होता है, तो उस व्यक्ति को आय का स्रोत दिखाना पड़ता है।
कुछ यूं बड़ी पूर्व विधायक की जमीनी संपत्ति
1.54 करोड़ संपत्ति थी वर्ष 2007 के चुनाव में।
5.3 करोड़ संपत्ति हो गई वर्ष 2012 के चुनाव में।
12.1 करोड़ संपत्ति हो गई वर्ष 2017 के चुनाव में
14.5 करोड़ रुपये की संपत्ति है पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष के पास
वर्जन
हमारे पूर्वज खेती करते चले आ रहे हैं। हर साल 50 लाख रुपये की फसल उगाते हैं। हमारी डेरी है, जिसमें करीब सौ गाय-भैंस है। उनका दूध बेचा जाता है। चार भट्टे हैं, एक धान मिल है। दिन रात मेहनत करते हैं। सभी का हम इनकम टैक्स अदा करते हैं। हमने न तो ग्राम पंचायत की जमीन पर कब्जा किया है और नहीं नगर पालिका की। हमने सभी जमीनों को खरीदा है। इनके बैनामा में स्टांप लगाया है। अगर सरकारी दर से भी ब्याज मिले तो दस साल में 12 करोड़ हो जाती है। हमारे विरोधी जबरन हमारे पीछे पड़े हुए हैं।
रामेश्वर सिंह यादव, पूर्व विधायक, अलीगंज