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मेक इन इंडिया से ही चीन से मुकाबला संभव
मेक इन इंडिया से ही चीन से मुकाबला संभव
Updated Mon, 14 Nov 2016 01:18 AM IST
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मेक इन इंडिया से ही चीन से मुकाबला संभव
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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मेक इन इंडिया पालिसी से ही चीन के उत्पादों से मुकाबला किया जा सकता है। चीन ने 1980 में मेक इन चाइना पालिसी शुरू की थी। अब मेक इन इंडिया में भारत को ग्लोबल ब्रांड बनाना होगा। मोदी सरकार को इसके लिए उद्योगों को और रियायतें देनी होंगी। रविवार को मीट एट आगरा में मेक इन इंडिया पर परिचर्चा हुई।
एफमेक के अध्यक्ष पूरन डावर ने मेक इन इंडिया की मुहिम के बारे में जानकारी दी। बताया कि अधिकाधिक वस्तुओं का उत्पादन भारत में किया जाए। चीन की तरह ही दुनियाभर के बाजारों में भारतीय उत्पादों का बोलबाला होगा तभी मेक इन इंडिया पालिसी कारगर साबित हो सकेगी। पैनल में वाणिज्य मंत्रालय के जनरल सेक्रेट्री पीजूस दास गुप्ता, सीएलआरआई के डायरेक्टर बी. चंद्रशेखरन, सीएलई के चेयरमैन एम रफीक अहमद, एफडीडीआई की चेयरपर्सन रेवती राय, मोतीलाल सेठी, विपन सेठ शामिल रहे।
दूसरे सेशन में ईजी डूइंग बिजनेस में जूता उद्योग की परेशानियों पर चर्चा की गई। उद्यमियों ने विस्तार से जानकारी दी। सभी इस बात पर एकमत थे कि सरकार को उद्योगों की राह में आनी वाली बाधाओं को दूर करने के लिए गंभीर कदम उठाने होंगे। कार्यक्रम में एफमेक के उपाध्यक्ष राजेश सहगल, शाहरू मोहसिन, जनरल सेक्रेट्री राजीव वासन, अतुल गुप्ता आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे।
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इनसेट......
स्टालों पर अपग्रेड मशीनरी और उत्पाद
आगरा। लेदर, कंपोनेंट, मशीनरी और टेक्नोलॉजी के तीनों ब्लॉक में लगे 266 स्टॉल में ग्राहकों की तादाद दिन में कम रही, लेकिन शाम को विजिटर्स की संख्या में इजाफा हो गया। आयोजकों का कहना है कि इस साल स्टाल तो नहीं बढ़ाए गए हैं लेकिन ब्राजील समेत कई स्थानों से नई मशीनें आई हैं। कई स्टालों पर देश के विभिन्न हिस्सों से आए विजिटर्स ने उत्पादों के बारे में जानकारी हासिल की।
हल्के सोल लेदर फुटवियर
आगरा। टीपीआर और पीयू के साथ ही जूतों का रबर सोल फिर से लौट आया है। नई तकनीक, बेहतर फिनिशिंग, मजबूती और पकड़ के साथ रबर के हल्के सोल लेदर फुटवियर के साथ सैंडल्स और लेडीज फुटवियर में खूब चलन में आ गए हैं। इसके साथ ही शू फेब्रिक भी लंबी रेंज स्टालों पर मौैजूद है। ओम फेब्रिक के रंजन दीपक ने बताया कि फेब्रिक की नई रेंज फेयर में प्रस्तुत की गई है।
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एफमेक के अध्यक्ष पूरन डावर ने मेक इन इंडिया की मुहिम के बारे में जानकारी दी। बताया कि अधिकाधिक वस्तुओं का उत्पादन भारत में किया जाए। चीन की तरह ही दुनियाभर के बाजारों में भारतीय उत्पादों का बोलबाला होगा तभी मेक इन इंडिया पालिसी कारगर साबित हो सकेगी। पैनल में वाणिज्य मंत्रालय के जनरल सेक्रेट्री पीजूस दास गुप्ता, सीएलआरआई के डायरेक्टर बी. चंद्रशेखरन, सीएलई के चेयरमैन एम रफीक अहमद, एफडीडीआई की चेयरपर्सन रेवती राय, मोतीलाल सेठी, विपन सेठ शामिल रहे।
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दूसरे सेशन में ईजी डूइंग बिजनेस में जूता उद्योग की परेशानियों पर चर्चा की गई। उद्यमियों ने विस्तार से जानकारी दी। सभी इस बात पर एकमत थे कि सरकार को उद्योगों की राह में आनी वाली बाधाओं को दूर करने के लिए गंभीर कदम उठाने होंगे। कार्यक्रम में एफमेक के उपाध्यक्ष राजेश सहगल, शाहरू मोहसिन, जनरल सेक्रेट्री राजीव वासन, अतुल गुप्ता आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे।
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स्टालों पर अपग्रेड मशीनरी और उत्पाद
आगरा। लेदर, कंपोनेंट, मशीनरी और टेक्नोलॉजी के तीनों ब्लॉक में लगे 266 स्टॉल में ग्राहकों की तादाद दिन में कम रही, लेकिन शाम को विजिटर्स की संख्या में इजाफा हो गया। आयोजकों का कहना है कि इस साल स्टाल तो नहीं बढ़ाए गए हैं लेकिन ब्राजील समेत कई स्थानों से नई मशीनें आई हैं। कई स्टालों पर देश के विभिन्न हिस्सों से आए विजिटर्स ने उत्पादों के बारे में जानकारी हासिल की।
हल्के सोल लेदर फुटवियर
आगरा। टीपीआर और पीयू के साथ ही जूतों का रबर सोल फिर से लौट आया है। नई तकनीक, बेहतर फिनिशिंग, मजबूती और पकड़ के साथ रबर के हल्के सोल लेदर फुटवियर के साथ सैंडल्स और लेडीज फुटवियर में खूब चलन में आ गए हैं। इसके साथ ही शू फेब्रिक भी लंबी रेंज स्टालों पर मौैजूद है। ओम फेब्रिक के रंजन दीपक ने बताया कि फेब्रिक की नई रेंज फेयर में प्रस्तुत की गई है।