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सांगीपुर में नाला बन गई सई

Thu, 14 Apr 2016 11:17 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़ Updated Thu, 14 Apr 2016 11:17 PM IST
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drought
water problem
सांगीपुर विकासखंड में लगातार गिरते जलस्तर के कारण हालात बेहद खराब हो गए हैं। तालाब व नहरें सूख गई हैं तो सई नदी नाले में तब्दील हो गई है। ब्लॉक का औसत जलस्तर गिरकर 6 से 7 मीटर तक पहुंच गया है। पांच सौ सरकारी इंडिया मार्का हैंडपंप भी जलस्तर गिरने से पानी नही दे रहे हैं। जिले की रायबरेली और अमेठी सीमा पर संागीपुर ब्लॉक स्थित है। ब्लॉक में कुल 75 ग्राम पंचायतें हैं। जिसमें पेयजल के लिए हैंडपंप व खेती के लिए बड़ी मात्रा में तालाब, नहर व नलकूप लगवाए गए हैं। लेकिन बीते पांच सालों में ब्लॉक के गांवों में गिरते जलस्तर ने पानी के लिए हाहाकार मचा रखा है। मार्च से लेकर जुलाई तक यहां के गांवों के लोग लगभग बुंदेलखंड में रहने वालों की तरह जीवन व्यतीत करने लगे हैं। पांच साल पहले सांगीपुर ब्लॉक का औसत जलस्तर जहां 3 से 4 मीटर था वह अब घटकर 7 से 8 मीटर हो चला है। लगातार गिरते जलस्तर से लोग चिंतित हो गए हैं। सांगीपुर में कुल 520 तालाब बनाए गए हैं। इसमें मनरेगा के तहत 413 तालाब अभी तक बनकर तैयार हुए हैं।
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जलसरंक्षण के लिए 35 मॉडल तालाब भी खुदवाए गए। शासन की विभिन्न योजनाओं से 72 और तालाब भी इसमें शामिल हैं। लेकिन गिरते जल स्तर से लगभग 500 तालाब रेगिस्तान बन गए हैं। बमुश्किल 15-20 तालाबों में नाम मात्र का पानी बचा हुआ है। वहीं ब्लाक में सई नदी भी लोगों के लिए पानी का बड़ा संसाधन है। लेकिन मार्च के बाद सई नदी का हाल भी नाले की तरह हो गया है। गिरते जल स्तर से नदी में पानी इतना कम हो चला है कि इलाके के लोग पैदल पार कर जाते हैं। अन्य दिनों में नदी में 160 फिट की चौड़ाई में पानी बहता है वहीं अब कई जगहों पर नदी में मुश्किल से दस पंद्रह फिट की चौड़ाई में पानी बह रहा है। इसी तरह सिचांई के लिए ब्लॉक में रजबहे भी निर्मित हुए हैं। लेकिन आम दिनों में तो पानी की किल्लत से किसान जूझते ही हैं। सांगीपुर में लगभग 3500 इंडिया मार्का हैंडपंप लगाए गए हैं। सरकारी आंकड़ों पर गौर करें तो लगभग पांच सौ हैंडपंपों के पानी नही देने की शिकायत ब्लॉक मुख्यालय पहुंची है। इससे साफ कहा जा सकता है कि अभी गर्मी ठीक से शुरू भी नही हुई और जलस्तर गिरने से पांच सौ हैंडपंप शोपीस बन गए। यही हालात सांगीपुर में बने रहे तो वह दिन दूर नहीं जब बुंदेलखंड की तरह यहां भी बूंद बूंद पानी के लिए मारा-मारी मच जाएगी।
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