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साक्षी मलिक ने रचा इतिहास, भारत को दिलाया पहला पदक
टीम डिजिटल / अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Thu, 18 Aug 2016 10:31 AM IST
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साक्षी मलिक
- फोटो : getty
रियो ओलंपिक में 12 दिन से पदक के लिए तरस रहे भारत के इंतजार को पहलवान साक्षी मलिक ने खत्म कर दिया है। हरियाणा के रोहतक की 23 वर्षीय साक्षी मलिक ने महिलाओं के 58 किग्रा वर्ग में भारतीय चुनौती पेश की और कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया।
साक्षी ने रिपचेज राउंड में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए किरगिस्तान की पहलवान को मात दी। पहले हॉफ में साक्षी 0-5 से पिछड़ गई थीं लेकिन दूसरे राउंड में उन्होंने बेहतरीन वापसी करते हुए मुकबला 5-5 की बराबरी पर आ गया। अंतिम समय में उन्होंने 2 अंक बटोरते हुए इतिहास रच दिया। और भारत को रियो में पहला कांस्य पदक दिला दिया।
इससे पहले साल 2008 में बीजिंग ओलंपिक में भी सुशील कुमार ने रिपचेज राउंड में जीत दर्ज करके भारत को कुश्ती में कांस्य पदक दिलाया था।
दिन की शुरुआत साक्षी ने बेहतरीन तरीके से की और क्वालीफायर्स में माल्डोवा की पहलवान को हराकर प्री क्वार्टर फाइनल में अपनी जगह पक्की की।
प्री-क्वार्टर फाइनल में उन्होंने तकनीकी अंकों के आधार पर मारियाना चेर्डिवारा को हराया। दोनों के 5-5 अंक थे लेकिन लगातार चार अंक अर्जित करने के कारण साक्षी को विजेता घोषित किया गया।
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इसके बाद क्वार्टर फाइनल में उन्हें रुसी पहलवान से 1-3 के अंतर से मात मिली। लेकिन बाद में रुसी पहलवान फाइनल में पहुंच गईं ऐसे में उन्हें रेपलचेज राउंड में पहुंचने का मौका मिल गया।
रिपल चेज रउंड के पहले मुकाबले में साक्षी ने मंगोलिया की महिला पहलवान को 12-3 के अंतर से मात दी। और किरगिस्तान के पहलवान के सामने कांस्य पदक मुकाबले के लिए पहुंचीं और इतिहास में अपना नाम दर्ज करा लिया।
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साक्षी ने रिपचेज राउंड में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए किरगिस्तान की पहलवान को मात दी। पहले हॉफ में साक्षी 0-5 से पिछड़ गई थीं लेकिन दूसरे राउंड में उन्होंने बेहतरीन वापसी करते हुए मुकबला 5-5 की बराबरी पर आ गया। अंतिम समय में उन्होंने 2 अंक बटोरते हुए इतिहास रच दिया। और भारत को रियो में पहला कांस्य पदक दिला दिया।
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इससे पहले साल 2008 में बीजिंग ओलंपिक में भी सुशील कुमार ने रिपचेज राउंड में जीत दर्ज करके भारत को कुश्ती में कांस्य पदक दिलाया था।
दिन की शुरुआत साक्षी ने बेहतरीन तरीके से की और क्वालीफायर्स में माल्डोवा की पहलवान को हराकर प्री क्वार्टर फाइनल में अपनी जगह पक्की की।
प्री-क्वार्टर फाइनल में उन्होंने तकनीकी अंकों के आधार पर मारियाना चेर्डिवारा को हराया। दोनों के 5-5 अंक थे लेकिन लगातार चार अंक अर्जित करने के कारण साक्षी को विजेता घोषित किया गया।
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इसके बाद क्वार्टर फाइनल में उन्हें रुसी पहलवान से 1-3 के अंतर से मात मिली। लेकिन बाद में रुसी पहलवान फाइनल में पहुंच गईं ऐसे में उन्हें रेपलचेज राउंड में पहुंचने का मौका मिल गया।
रिपल चेज रउंड के पहले मुकाबले में साक्षी ने मंगोलिया की महिला पहलवान को 12-3 के अंतर से मात दी। और किरगिस्तान के पहलवान के सामने कांस्य पदक मुकाबले के लिए पहुंचीं और इतिहास में अपना नाम दर्ज करा लिया।
भारत के लिए ओलंपिक में कुश्ती में मिला चौथा पदक
सुशील कुमार
- फोटो : getty
यह भारत के लिए ओलंपिक में कुश्ती में मिला चौथा पदक है। सबसे पहले के डी जाधव ने 1952 हेलेंसिकी ओलंपिक में कुश्ती में भारत के लिए कांस्य के रूप में पहला व्यक्तिगत पदक जीता था।
इसके बाद सुशील कुमार ने 2008 बीजिंग में कांस्य और 2012 में लंदन में रजत पदक जीता था। लंदन में ही योगेश्वर दत्त ने कांस्य पदक जीतकर भारत की खुशियों को दुगना कर दिया था। अब महिला कुश्ती में साक्षी कांस्य पदक जीतकर जीवंत इतिहास की साक्षी बन गई हैं।
इसके बाद सुशील कुमार ने 2008 बीजिंग में कांस्य और 2012 में लंदन में रजत पदक जीता था। लंदन में ही योगेश्वर दत्त ने कांस्य पदक जीतकर भारत की खुशियों को दुगना कर दिया था। अब महिला कुश्ती में साक्षी कांस्य पदक जीतकर जीवंत इतिहास की साक्षी बन गई हैं।