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फीफा अंडर-17: गोलकीपर के रूप में अपने को चुनौती देने के लिए तैयार हैं धीरज सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Updated Wed, 04 Oct 2017 04:49 PM IST
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फीफा अंडर 17
- फोटो : The Ladies Finger
भारत की फीफा अंडर-17 विश्व कप फुटबॉल टूर्नामेंट में रक्षण की अंतिम सबसे मजबूत कड़ी उसके नंबर एक गोलकीपर धीरज सिंह हैं। भारत जब छह अक्टूबर को फुटबॉल के सबसे बड़े मंच फीफा अंडर-17 विश्व कप में अमेरिका के खिलाफ मैच से अपने अभियान का आगाज करेगा, तो उसके किले की चौकसी का पूरा दारोमदार धीरज की मुस्तैदी पर निर्भर होगा।
धीरज कहते हैं, 'मैं इस बात से वाकिफ हूं कि हीरो बनने के लिए एक क्षण ही काफी है। मैं अपने बॉक्स में पूरी मुस्तैदी और फुर्ती के साथ पूरी एकाग्र होकर अपने किले की चौकसी करना चाहता हूं। आपको बतौर गोलरक्षक मैच की जरूरत के मुताबिक अपने किले की चौकसी की जरूरत होती है। बतौर गोलरक्षक मैंने खुद को चुनौती के लिए तैयार किया है। हम अपने प्रतिद्वंद्वी का सम्मान करते हैं लेकिन बतौर गोलरक्षक यह मेरी जिम्मेदारी है कि वे गोल करने के लिए मुझे सबसे बड़ी बाधा के रूप में देखें।'
ये भी पढ़ें: अंडर-17 वर्ल्ड कप में खेलकर बनाई अलग पहचान, दुनिया पर इन फुटबॉलर्स ने किया राज
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धीरज ने आगे कहा, 'कई बार बतौर गोलरक्षक जरूरत से ज्यादा आक्रामक तेवर आपको ऐसी परेशानी में डाल देते हैं कि आप तक गोल खा बैठते हैं।इसके उलट धैर्य से गोलरक्षण करना कारगर रहता है। गोलरक्षक को हर पल चौकस रहने की जरूरत है। गोलरक्षक की निगाह चूकी नहीं की गेंद गोल में। गोलरक्षक अपनी टीम की रक्षापंक्ति की आखिरी दीवार होते हैं। ऐसे में जब हर मैच में गोलरक्षक पर बेहतर प्रदर्शन का दबाव होता है तो आपके लिए चुनौती और मुश्किल हो जाती है। मैं फीफा विश्व कप (अंडर17) विश्व कप में शिरकत करने वाली पहली टीम का हिस्सा बनने को लेकर खासा रोमांचित हूं।'
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धीरज कहते हैं, 'मैं इस बात से वाकिफ हूं कि हीरो बनने के लिए एक क्षण ही काफी है। मैं अपने बॉक्स में पूरी मुस्तैदी और फुर्ती के साथ पूरी एकाग्र होकर अपने किले की चौकसी करना चाहता हूं। आपको बतौर गोलरक्षक मैच की जरूरत के मुताबिक अपने किले की चौकसी की जरूरत होती है। बतौर गोलरक्षक मैंने खुद को चुनौती के लिए तैयार किया है। हम अपने प्रतिद्वंद्वी का सम्मान करते हैं लेकिन बतौर गोलरक्षक यह मेरी जिम्मेदारी है कि वे गोल करने के लिए मुझे सबसे बड़ी बाधा के रूप में देखें।'
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धीरज ने आगे कहा, 'कई बार बतौर गोलरक्षक जरूरत से ज्यादा आक्रामक तेवर आपको ऐसी परेशानी में डाल देते हैं कि आप तक गोल खा बैठते हैं।इसके उलट धैर्य से गोलरक्षण करना कारगर रहता है। गोलरक्षक को हर पल चौकस रहने की जरूरत है। गोलरक्षक की निगाह चूकी नहीं की गेंद गोल में। गोलरक्षक अपनी टीम की रक्षापंक्ति की आखिरी दीवार होते हैं। ऐसे में जब हर मैच में गोलरक्षक पर बेहतर प्रदर्शन का दबाव होता है तो आपके लिए चुनौती और मुश्किल हो जाती है। मैं फीफा विश्व कप (अंडर17) विश्व कप में शिरकत करने वाली पहली टीम का हिस्सा बनने को लेकर खासा रोमांचित हूं।'