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हिमाचल: गुम्मा के पास टौंस नदी में गिरी प्राइवेट बस, 45 लोगों की मौत

Thu, 20 Apr 2017 03:55 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Thu, 20 Apr 2017 03:55 PM IST
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Private Bus Falls into Tons River in Himachal, 20 Missing.
- फोटो : सभी फोटो: संजय भारद्वाज, अमर उजाला, सिरमौर

उत्तराखंड सीमा से सटी शिमला जिले के गुम्मा इलाके के नजदीक यात्रियों से भरी एक निजी बस टोंस नदी में गिर गई। इस भीषण हादसे में 45 यात्रियों की मौके पर ही मौत हो गई। बस हादसे में कंडक्टर और एक युवक ने कूदकर अपनी जान बचाई।

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800 मीटर गहरी खाई में लुढ़की 37 सीटर बस में ड्राइवर-कंडक्टर समेत 50 से ज्यादा यात्री सवार थे। कुछ यात्रियों के नदी में बहने की आशंका जताई जा रही है। उनकी तलाश में सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है।
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जहां दुर्घटना हुई, वहां सड़क चौड़ी है इसलिए तकनीकी खामी दुर्घटना की वजह मानी जा रही है। हादसे में बस के परखच्चे उड़ गए और नदी किनारे लाशों का ढेर लग गया। खून से नदी का पानी भी लाल हो गया। मृतकों में 15 महिलाएं और चार बच्चे भी शामिल हैं।

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हादसे में बची सिर्फ दो लोगों की जान, बाकी सबने गंवाई जान

Private Bus Falls into Tons River in Himachal, 20 Missing.

अब तक 26 लोगों की शिनाख्त हुई है जिनमें 9 हिमाचल और 17 उत्तराखंड के हैं। जानकारी के अनुसार उत्तराखंड के जैन ट्रेवल्स की बस (यूके16टीए-0045) बुधवार सुबह  5:30 बजे उत्तराखंड के विकासनगर से त्यूणी (कैराड़) के लिए रवाना हुई।

करीब 11:00 बजे नेरवा तहसील के गुम्मा इलाके से चार किलोमीटर की दूरी पर बोलधार नामक स्थान पर अनियंत्रित होकर बस खाई में कई पलटी खाने के बाद टोंस नदी में जा गिरी। बस के दुर्घटनाग्रस्त होने से पहले ही कंडक्टर तुलसी और एक अन्य व्यक्ति नरेश ने कूदकर जान बचाई। 

यहां देखें मृतकों की सूची

Private Bus Falls into Tons River in Himachal, 20 Missing.

एसपी शिमला डीडब्ल्यू नेगी ने बताया कि अब तक 45 शव बरामद किए जा चुके हैं। इसमें 30 पुरुष और 15 महिलाएं हैं। इनमें चार बच्चे और पांच नाबालिग शामिल हैं। 26 यात्रियों की शिनाख्त हो चुकी है, जिनमें 9 हिमाचल और 17 उत्तराखंड के हैं। 

मृतकों की सूची (अभी तक जिनकी पहचान हुई है)
1- चंदन सिंह राणा (35) पुत्र अषाढू निवासी सैंज अटाल, तहसील त्यूनी
2- राधा (16) पुत्री साधूराम निवासी गूमा चौपाल, हिमाचल प्रदेश
3- प्रमिला (14) पुत्री साधूराम निवासी गूमा चौपाल, हिमाचल प्रदेश
4- अजब सिंह (38) पुत्र हरमी निवासी मनेवटी चौपाल, हिमाचल प्रदेश
5- राजेश (31) पुत्र दौलत राम निवासी मटियाना क्वानू, तहसील चकराता
6- रमेश चंद पुत्र हरी चंद निवासी जुब्बल, हिमाचल प्रदेश
7- पुन्नू (26) पुत्र शुकरू राम निवासी गांव सोबल चौपाल, हिमाचल प्रदेश
8- ऋतिक (11) पुत्र चंदन सिंह निवासी सैंज, तहसील त्यूनी
9- अंशुल (13) पुत्र चंदन सिंह निवासी सैंज, तहसील त्यूनी
10- सुमित्रा (33) पत्नी नंद किशोर निवासी फनार, तहसील त्यूनी
11- कातकी देवी (40) पत्नी स्व. काना सिंह निवासी केहर चौपाल, हिमाचल प्रदेश
12- सरना चौहान (21) पुत्री बुद्धि सिंह निवासी सैंज, तहसील त्यूनी
13- नंद किशोर राणा (37) पुत्र माया राम निवासी फनार, तहसील त्यूनी
14- बच्चा (डेढ़ वर्ष) पुत्र नंद किशोर निवासी फनार, तहसील त्यूनी
15- शकुंतला (23) पुत्री सोनू निवासी निगमा, तहसील त्यूनी
16- सोहन सिंह (44) पुत्र चतरू राम निवासी शरगुल धार चौपाल, हिमाचल प्रदेश
17- दिव्या (13) पुत्री सोनू निवासी केराड़, तहसील त्यूनी
18- मन दास (65) पुत्र देवराम निवासी किस्तूड़, तहसील त्यूनी
19- शांति देवी (55) पत्नी मनदास निवासी किस्तूड़, तहसील त्यूनी
20- कमली (51) पत्नी जुसिया निवासी ट्यूटाड़, तहसील त्यूनी
21- विरेंद्र (35) पुत्र जुसिया निवासी ट्यूटाड़, तहसील त्यूनी

हादसे में पति-पत्नी की भी मौत 
हादसे में किस्तूड़ निवासी पति-पत्नी की भी मौत हो गई। दुर्घटना में मनदास और उनकी पत्नी शांति देवी की मौत हो गई। वहीं, ट्यूटाड़ निवासी कमली और उनका बेटा विरेंद्र भी हादसे का शिकार हुआ।

खराब थी बस, पुलिस ने कंडक्टर को किया गिरफ्तार

Private Bus Falls into Tons River in Himachal, 20 Missing.

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक बस के स्टेयरिंग में तकनीकी दिक्कत आई थी। मीनस के समीप बस के स्टेयरिंग का नट निकल गया था। तब ड्राइवर ने जुगाड़ कर इसको ठीक कर दिया और बस गंतव्य के लिए रवाना हो गई।

बताया यह भी जा रहा है कि ड्राइवर ने मेकेनिक के पास बस खड़ी कर दी थी। वहां पर कंडक्टर ने बस की टूटी कमानी को तार से बांधकर ड्राइवर को धीरे-धीरे चलने के लिए कहा। कुछ किलोमीटर चलने के बाद सामने से आ रहे वाहन को पास देते वक्त बस खाई में लुढ़क गई। 

हादसे के बाद उत्तराखंड निवासी बस कंडक्टर तुलसीराम पहले मौके से गायब हो गया। बाद में पुलिस ने इसे गिरफ्तार कर लिया। इससे पूछताछ की जा रही है। हादसे का कारण बस की खराबी बताया जा रहा है।

स्कूल प्रबंधन ने जताया शोक      
सैपियंस स्कूल और महर्षि अरविंद घोष स्कूल डाकपत्थर के प्रबंधन ने दुर्घटना में उनके स्कूलों के छात्र की मौत पर शोक व्यक्त किया। ऋतिक चौहान और अंशुल सैपियंस जबकि, प्राची महर्षि अरविंद घोष की छात्रा थी। हादसे का शिकार हुए प्राची के पिता नंद किशोर महर्षि अरविंद घोष में कार्यरत थे। दुख प्रकट करने वालों में रविकांत सपरा, आलोक विरमानी, अरुण डबराल, जगदंबा प्रसाद उनियाल आदि शामिल रहे।

बोरियों और रस्सों के सहारे खाई से बाहर निकाले शव

Private Bus Falls into Tons River in Himachal, 20 Missing.

वहीं, इस बस हादसे ने एक बार फिर हिमाचल के आपदा प्रबंधन की पोल खोल कर रख दी। राहत एवं बचाव कार्य के लिए बिना संसाधन मौके पर पहुंची हिमाचल और उत्तराखंड पुलिस लाचार नजर आई। शव को निकालने के लिए मौके पर स्ट्रेचर तक की व्यवस्था नहीं थी। ऐसे में शवों को किसी तरह बोरियों और रस्सों के सहारे खाई से बाहर निकाला गया।

यही वजह रही कि शाम पांच बजे तक मात्र तीन शवों को ही बाहर निकाला जा सका था। राहत एवं बचाव कार्य के लिए दून से एसडीआरएफ की टीम बुलानी पड़ी। रेस्क्यू ऑपरेशन में दोनों ही राज्यों के लोगों ने भी सहयोग किया। दुर्घटना की खबर लगने पर सबसे पहले नेरुवा पुलिस घटनास्थल पर पहुंची।

करीब 800 मीटर नीचे टौंस नदी में गिरी बस को देख पुलिसकर्मियों के होश उड़ गए। हादसा इतना भीषण था कि बस के परखच्चे उड़े हुए थे। संसाधन के बिना पुलिसकर्मी लाचार नजर आए। नीचे खाई में उतरने के लिए रास्ता नहीं था। ऐसे में पुलिसकर्मियों ने स्थानीय लोगों की मदद से झाड़ियां काटकर किसी तरह नदी तक पहुंचने का रास्ता बनाया।

नदी तक पुलिसकर्मी और ग्रामीण पगडंडियों पर करीब ढाई से तीन किमी की पैदल दूरी तय कर पहुंचे। यहां जहां-तहां लाशें बिखरी पड़ी देख उनके रौंगटे खड़े हो गए। बमुश्किल शवों की पहचान की जा सकी।

लाशों को ढकने के लिए कफन का कपड़ा भी कम पड़ गया

Private Bus Falls into Tons River in Himachal, 20 Missing.

गुम्मा में हुए भीषण बस हादसे ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया। मौत के भयावह मंजर के बीच कुछ दृश्य विचलित करने वाले थे, तो कुछ नियति के आगे बेबसी के। एक साथ कई मौतों की खबर ने ही सन्न कर दिया था। उस पर जब कुछ जिंदगियों के बचने की उम्मीद लिए लोग और सरकारी अमला रेस्क्यू करने पहुंचे तो मंजर देखकर हर किसी का दिल कांप उठा। विडंबना ही थी कि 45 शवों को समेटने और शवों को ढंकने के लिए कफन का कपड़ा भी कम पड़ गया।

रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटे स्थानीय लोग तो रुआंसे हो गए। बदहवासी के आलम में सामने पड़े शवों को समेटते लोगाें के हाथ कांपते रहे। कोई नदी के तट से शवों को किनारे तक लाने में जुटा हुआ था तो कोई पहाड़ी की ढलान पर झाडि़यों में फंसे क्षत-विक्षत शवों को निकालने में लगा हुआ था। हादसे की सूचना मिलने पर हालांकि कुछ लोग अपने साथ कपड़ा लेकर आए थे, लेकिन मरने वालों का आंकड़ा इतना ज्यादा होगा किसी ने सोचा भी नहीं था। एक समय तो शवों के ढेर को ढंकना तक मुश्किल हो गया।

सरकार ने दिए जांच के आदेश, मृतकों के परिजनों को फौरी राहत
परिवहन मंत्री जीएस बाली ने बस दुर्घटना में मारे गए यात्रियों के परिवार को 50 हजार रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान करने की घोषणा की है। जीएस बाली ने क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी शिमला की अगुवाई में एक कमेटी गठित करने के भी निर्देश दिए हैं। यह कमेटी बस दुर्घटना के कारणों का पता लगाएगी और सात दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।

राज्य मुख्यालय में प्राप्त सूचना के अनुसार इस दुर्घटना में 45 यात्रियों की मृत्यु हुई है। वहीं, सीएम वीरभद्र सिंह, राज्यपाल आचार्य देवव्रत और भाजपा नेता प्रेम कुमार धूमल समेत प्रदेश भर के नेताओं ने इस हादसे पर दुख जताया है। साथ ही पीड़ित परिवारों को हरसंभव मदद का भी भरोसा दिलाया है।

प्रशासन, लोनिवि की लापरवाही से चली गई 44 जानें

Private Bus Falls into Tons River in Himachal, 20 Missing.

हादसों में कई जानें जाने के बाद भी लोक निर्माण विभाग सबक नहीं ले रहा है। सड़क किनारे न क्रेश बैरियर लगाए जा रहे हैं और पैरापिट। नतीजा हादसों में हर साल सैकड़ों की जान चली जाती है। जिला शिमला की सड़कों पर दुर्घटनाओं का अंदेशा हमेशा बना रहता है। दूरदराज क्षेत्रों में सड़कों के किनारे पैरापिट या क्रैश बैरियर न होने से वाहन सीधे खाई में गिर जाते हैं।

हर साल जिले की सड़कों के अंधे मोड़ों और सड़क पर सफर सुरक्षित करने के लिए प्रदेश और केंद्र सरकार लोक निर्माण विभाग को करोड़ों का बजट  देती है। बावजूद हादसे कम नहीं हो रहे हैं। बुधवार को चौपाल के गुम्मा में हुए सड़क हादसे में 44 लोगों की जान बच जाती। अगर सड़क किनारे सुरक्षा के लिए क्रैश बैरियर लगाए गए होते। जिस स्थान पर यह बस हादसा हुआ है।

हाल ही में इसी जगह के दस मीटर के दायरे में चार बडे़ सड़क हादसे हो चुके हैं। बावजूद विभाग नहीं जागा। विभाग ने आज तक इस स्थान पर सड़क की हालत सुधारने के लिए कोई भी कदम नहीं उठाया। 

लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता अशोक चौहान ने बताया कि सड़कों की हालत सुधारने के लिए हर साल सरकार की ओर से करोड़ों का बजट आता है। पुलिस से मिली सूची और विभाग की अपनी सूची  के मुताबिक हर दुर्घटना प्रभावित सड़क का सुधार और उसे सुरक्षित किया जाता है। 

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