चीन को सबक सिखाने के लिए बन गया प्लान, सीमा पर ताकतवर होगी सेना
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सीमा पर चीन की मनमानी रोकने के लिए रक्षा मंत्रालय ने एक बड़े प्लान को हरी झंडी दे दी है। इस काम के पूरा होते ही हमारी सेना सीमा पर बेहद ताकतवर हो जाएगी और चीन की मनमानी पर हर समय करारा जवाब दे सकेगी।
चीन अधिकृत तिब्बत से सटी अंतरराष्ट्रीय सीमा को मजबूत करने के लिए पश्चिमी हिमालय के दुर्गम पहाड़ों को काटकर सड़कों का जाल बिछाया जा रहा है। यह सेना के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।
रक्षा मंत्रालय ने 15 हजार फुट की ऊंचाई वाले तंगलिंग दर्रा रूट से हिमाचल की स्पीति घाटी को सीधा लेह-लद्दाख से जोड़ने के लिए सड़क निर्माण को हरी झंडी दे दी है।
इस रोड से सेना को होने वाला है ये बड़ा फायदा
मौजूदा मनाली-लेह 485 किमी लंबे सड़क मार्ग से साल में महज 6 महीने तक वाहनों की आवाजाही हो पाती है, लेकिन दावा किया जा रहा है कि यह प्रस्तावित मार्ग साल भर ट्रैफिक के लिए खुला रहेगा। इससे कभी भी सेना को मदद पहुंचाई जा सकेगी।
इस रूट पर लेह पहुंचने के लिए महज एक दर्रे को पार करना पड़ेगा जबकि मौजूदा मनाली-लेह रूट में रोहतांग, बारालाचा, तंगलंगला, पारंगला समेत करीब आधा दर्जन दर्रों को पार करना पड़ रहा है।
रक्षा मंत्रालय ने स्पीति के क्याटो से तंगलिंग दर्रा होकर लेह तक जाने वाली इस महत्वपूर्ण सड़क का सर्वेक्षण पूरा कर लिया है। जल्द ही इसकी डीपीआर तैयार कर रक्षा मंत्रालय को सौंपी जाएगी।
बीआरओ पूरा करेगा मिशन
उम्मीद की जा रही है कि दो साल के भीतर इस सड़क मार्ग का निर्माण कार्य आरंभ हो जाएगा। यह रूट हिंदुस्तान-तिब्बत मार्ग को लेह से जोड़ने का काम करेगा। बीआरओ के दीपक प्रोजेक्ट के मुख्य अभियंता मोहन लाल ने इसकी पुष्टि की है।
मोहन लाल के मुताबिक क्याटो से होकर गुजरने वाला यह मार्ग जम्मू-कश्मीर के चंगथंग में जुड़ेगा। लेह से चंगथंग तक सड़क मार्ग बनकर तैयार है। हिमाचल में क्याटो से तंगलिंग दर्रा तक 75 किमी सड़क का निर्माण होना है। इस सड़क का निर्माण दीपक और हिमांक प्रोजेक्ट मिलकर बनाएंगे।