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दुनियाभर में पहचान बनाएगी हिमाचली टोपी, वैश्विक मार्केट को चुनौती

Sat, 30 Jun 2018 12:29 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मंडी/थुनाग
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मंडी/थुनाग Updated Sat, 30 Jun 2018 12:29 PM IST
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 Himachal Topi and shaal marketing world wide

हिमाचल की टोपी और शॉल विश्व भर में पहचान बनाएंगे। हिमाचलियों की शान टोपी, शाल और पट्टी के उत्पाद अब वैश्विक मार्केट को चुनौती देंगे। पारंपरिक ऊन और पश्मीना के धागे से बनने वाले देसी उत्पादों में अब सिल्क की फाइन ब्लेडिंग (सम्मिश्रण) होगी। प्रदेश सरकार पहली बार इन उत्पादों के वेल्यू एडिशन और उत्पादकों की आर्थिकी को मजबूत करने के लिए यह बड़ा बदलाव करने जा रही है।

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ताकि हिमाचली सभ्यता से जुड़े इन उत्पादों की कीमत भी बढ़ सके और वैश्विक स्तर की मार्केट के मुकाबले का कपड़ा इन उत्पादों की शोभा बढ़ा सके। मंडी जिले में रेशम कीटपालन को बढ़ावा देने के लिए बालीचौकी में कोशकृमि उद्यमिता विकास एवं नवोन्मेष केंद्र में सरकार ने इस बदलाव की कवायद शुरू कर दी है। महिलाओं की मदद से यहां रेशम, पशमीना और ऊन के सम्मिश्रण वाले धागे का पहला सैंपल तैयार कर लिया है।
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जल्द ही इस धागे से उत्पाद बनना शुरू हो जाएंगे। केंद्र ग्रामीण महिलाओं को रोजगार के अवसर प्रदान करने के साथ-साथ उनके घर-द्वार पर बेहतर तकनीकी और विपणन की सुविधा उपलब्ध करवाएगा। उपनिदेशक सेरीकल्चर बलदेव चौहान ने कहा कि कुछ सैंपल तैयार कर लिए गए हैं। उन्होंने कहा कि इस वेल्यू एडिशन से से उत्पादों की कीमत में बीस फीसदी तक इजाफा होगा।
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1672 गांवों में होता है रेशम कीट पालन- रेशम कीट पालन से वर्तमान में हिमाचल के 1672 गांवों के लगभग 12 हजार से अधिक परिवार जुड़े हुए हैं। इनमें से अधिकांश बिलासपुर, मंडी, हमीरपुर, कांगड़ा, ऊना और सिरमौर जिले से हैं। रेशम उत्पादन में बिलासपुर के बाद मंडी जिला पूरे प्रदेश में दूसरे स्थान पर है। जहां कुल उत्पादन का 25 प्रतिशत रेशम उत्पादित किया जा रहा है। 

रेशम उत्पादन में जम्मू बाद हिमाचल दूसरे स्थान पर- हिमाचल का रेशम अपनी शोभा, प्राकृतिक चमक, कोमलता तथा उच्च टिकाऊपन जैसे गुणों के कारण विश्व के सबसे शानदार वस्त्रों में शुमार है। प्रदेश रेशम उत्पादन में उत्तर पश्चिमी क्षेत्र के राज्यों में जम्मू और कश्मीर के बाद दूसरे स्थान पर है। प्रदेश सरकार ने रेशम उत्पादन को बढ़ावा देने तथा एकीकृत रेशम उद्योग विकास के लिए सिल्क समग्र योजना प्रदेश में प्रारंभ कर चुकी है। 


सरकार भी दे रही अपदान- कीटपालन घरों के निर्माण के लिए सरकार अपदान भी दे रही है। इसमें एक हजार वर्ग मीटर के निर्माण के लिए चार लाख रुपये, 600 वर्ग मीटर के लिए तीन लाख रुपये तथा 300 वर्ग मीटर के लिए एक लाख 20 हजार रुपये की राशि प्रदान की जा रही है। प्रति इकाई  स्थापना के लिए अलग-अलग राशि का प्रावधान है।

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