{"_id":"5992c6094f1c1b196d8b45c2","slug":"himachal-pradesh-landslide-in-mandi-side-story","type":"story","status":"publish","title_hn":"लैंडस्लाइड हादसा: मां को कैसे समझाऊं, कहां से लाकर दूं उसके फौजी बेटे को","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
लैंडस्लाइड हादसा: मां को कैसे समझाऊं, कहां से लाकर दूं उसके फौजी बेटे को
जितेंद्र ठाकुर/अमर उजाला, जोगिंद्रनगर (मंडी)
Updated Tue, 15 Aug 2017 03:33 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मैं घर कैसे जाऊं। पत्नी बार-बार पूछ रही है कि उसका फौजी बेटा कहां है। कोई तो बताओ - मैं कहां से लाकर दूं अब उस अभागी मां के बेटे को। नम आंखों और कांपते हाथों से यह पीड़ा बयां की एक पिता ने, जो अपने बेटे को खोजते हुए सोमवार को जोगिंद्रनगर अस्पताल पहुंचे थे।
विज्ञापन
सरकाघाट बलद्वाड़ा के नवाणी निवासी परमानंद ने बताया कि उनका बेटा 3 डोगरा राइफल जम्मू कश्मीर के मूड़ी में तैनात था। घर पर उसकी मां की छठी व्रत की पूजा थी, जिसमें शामिल होने के लिए वह बस में मंडी के लिए रवाना हुआ था। अब मैं - कहां से लाऊं उसे।
विज्ञापन
परमानंद ने बताया कि मंडी-पठानकोट राष्ट्रीय उच्च मार्ग पर पधर उपमंडल के उरला गांव के समीप कोटरोपी में पहाड़ी दरकने के हुए हादसे का उनका बेटा भी शिकार हो गया है।
विज्ञापन
उपमंडलाधिकारी नागरिक दीप्ति मंढोत्रा ने पिता को दिलासा देते हुए विश्वास दिलाया कि वह उनकी हर संभव मदद करेंगी। बता दें हिमाचल के मंडी जिले में हुए लैंडस्लाइड हादसे में 48 लोगों की मौत हुई है। पहाड़ दरकने से यात्रियों से भरी दो बसें मलबे में दब गई थीं।
बता दें हिमाचल के मंडी जिले में हुए लैंडस्लाइड हादसे में 48 लोगों की मौत हुई है। पहाड़ दरकने से यात्रियों से भरी दो बसें मलबे में दब गई थीं।
जोगिंद्रनगर के जवान सन्नी का अंतिम संस्कार
जोगिंद्रनगर के टिकरू गांव के सन्नी, पुत्र तिलक राज का सोमवार को अंतिम संस्कार कर दिया गया। सन्नी मणिपुर के इंफाल में 5 जेक में सेवारत था।
सन्नी अपनी मां के इलाज के लिए एक माह की छुट्टी लेकर घर आया था और एक सितंबर को उसे लौटना था। अपनी मां को 7 अगस्त को उसने सैनिक अस्पताल योल में दिखाया।
डॉक्टरों ने उन्हें अभी 15 अगस्त को फिर बुलाया था। सन्नी अपने मां-बाप और दो बहनों को पीछे छोड़ गया है। सन्नी के पिता तिलक राज ने नम आखों से बताया कि वह एक अगस्त को अपनी मां के इलाज के लिए घर आया था। उसकी मां को रसोली और पथरी हो गई है।
कहीं बच्चों के जूते, कहीं बस के कबाड़ में फंसे दुपट्टे
घटना स्थल पर कहीं जूते, मोबाइल तो कहीं दुपट्टे फंसे देख रूह कांप जाती है। 22 शव अभी तक घटनास्थल पर हैं। इनमें से महज छह शवों की पहचान हो सकी है। यहां पर परिजन अपनों की तलाश में हर शव की शिनाख्त में जुटे हैं।
मणिकर्ण साहिब के दर्शन नहीं कर सका लाडला: हरचरण
समय: 8:40। जम्मू निवासी हरचरण सिंह शव लेने घटनास्थल पर पहुंचते हैं। शवों का ढेर लगा हुआ है, जिसे देखकर वह पचास मीटर दूर ही रुक जाते हैं। कहते हैं कि बेटा मनदीप मणिकर्ण साहिब के दर्शन करने जा रहा था। मां गुरविंदर शव को देखकर सन्न हो जाती हैं।
देवेंद्र की अंगदान की चाह नहीं हुई पूरी
चंबा के पांगी ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र शर्मा की अंगदान करने की इच्छा को कोटरोपी हादसे ने छीन लिया। देवेंद्र ने अंगदान करने का निर्णय लिया था। चाचा शिवनाथ कहते हैं कि अपना हर पल जनसेवा में देने वाले देवेंद्र की इच्छा थी कि उसका शरीर लोगों के काम आए। लेकिन, हादसे के 24 घंटे बाद अंगदान संभव नहीं है।