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तस्वीरों में देखिए, यूं ही नहीं देवघर में लगता है भक्तों का तांता

Wed, 12 Aug 2015 03:38 PM IST
Updated Wed, 12 Aug 2015 03:38 PM IST
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तस्वीरों में देख‌िए, यूं ही नहीं देवघर में लगता है भक्तों का तांता

deoghat baidyanah dham kanwar yatra

देवघर की यात्रा सुल्तानगंज से शुरु होती है। यहां भगवान श‌िव की कचहरी है ज‌िसे अजगैबीनाथ कहते हैं। गंगा नदी के बीच बसा भोलेनाथ के इस मंद‌िर का संबंध उस धनुष से माना जाता है ज‌िसे तोड़कर भगवान राम ने देवी सीता से व‌िवाह क‌िया था। सुल्तानगंज से जब कांवड़‌िया जल उठाता है तो यह माना जाता है क‌ि अजगैबीनाथ ने भक्त की मनोकामना ल‌िख ली है ज‌िसे देवघर में बाबा बैजनाथ पूरा करेंगे।

तस्वीरों में देख‌िए, यूं ही नहीं देवघर में लगता है भक्तों का तांता

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बाबा पर कांवड़ चढ़ाने के ल‌िए बोल बम का नारा लगाते कावंड़‌ियों को देख‌िए। यहां भक्तों का तांता लगे रहने का एक बड़ा कारण यह माना जाता है क‌ि द्वादश ज्योत‌िर्ल‌िंगों में यह आत्मल‌‌िंग है जो हर मनोकामना पूर्ण करता है। इसल‌िए इसे कामनाल‌िंग भी कहा जाता है।

तस्वीरों में देख‌िए, यूं ही नहीं देवघर में लगता है भक्तों का तांता

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देवघर में बाबा बैजनाथ  के प्रांगण में तीन द‌िशाओं में तीन द्वार है। उत्तर द्वार, पूर्वी द्वार और पश्च‌िमी द्वार। इनमें उत्तरी द्वार सबसे प्रमुख है यहां एक प्राचीन कूप यानी कुआं हैं। मान्यता है क‌ि इस कूप के जल से श‌िव का अभ‌िषेक करना गंगाजल से अभ‌िषेक करने के समान फलदायी होता है। इसल‌िए जो श्रद्धालु सुल्तानगंज से गंगा जल नहीं ला पाते है वह इस कुएं के जल से श‌िव का अभ‌िषेक करते हैं।

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झारखंड, ब‌िहार, पश्च‌िम बंगाल, उड़ीसा से पूरे साल कांवड़‌िए बैजनाथ धाम पहुंचते हैं। ले‌क‌िन सावन और नवरात्र के द‌िनों में यहां सबसे ज्यादा कांवड़ चढाए जाते हैं। इनमें सावन सबसे प्रमुख है जब कांवड़‌ियों का तांता लगा रहता है। बाबा के मंद‌िर में प्रवेश और न‌िकासी का एक ही द्वार है। द्वार इतना छोटा है क‌ि एक बार में एक आदमी ही न‌िकल सकता है। इसल‌िए सावन के महीने में कांवड़ चढ़ाने वालों की कतार कई क‌िलोमीटर तक पहुंच जाती है।

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तस्वीरों में देख‌िए, यूं ही नहीं देवघर में लगता है भक्तों का तांता

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यह है रावण की लघुशंका से बना तालाब। इस तालाब का प्रयोग कपड़े धोने के ल‌िए क‌िया जाता है। इसमें श्रद्धालु स्नान नहीं करते हैं। इस तालाब के पास ही एक अन्य तलाब है जो श‌िव गंगा तालाब के नाम से जाना जाता है। कहते हैं रावण ने लघुशंका के बाद पव‌ित्र होने के ल‌िए इस तालाब का न‌िर्माण अपने मुक्के के प्रहार से क‌िया था। इस तालाब में स्नान करने के बाद श्रद्धालु मंद‌िर प्रांगण में प्रवेश करते हैं।

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