भारत के 12 भुतहा स्थान जहां दिन में भी जाने से डरते हैं लोग
भारत में कई ऐसे स्थान हैं जिन्हें भुतहा माना जाता है, यानी यह ऐसे स्थान हैं जहां जाने के बाद आपको रुहानी ताकतों या असामान्य सी स्थिति का एहसास होता है। इनमें कुछ ऐसे शहर भी शामिल हैं जहां देश दुनिया से छुट्टियां बिताने परिवार के साथ लोग आते हैं। तो आइए चलें उन स्थानों की सैर पर जहां सब कुछ सामान्य नहीं है। यहां कुछ नहीं होते हुए भी किसी अनजानी ताकत की मौजूदगी दिन में भी लोगों को डराती है।
भारत के 12 भुतहा स्थान जहां दिन में भी जाने से डरते हैं लोग
पश्चिम बंगाल के दार्जलिंग जिले में एक हिल स्टेशन है कुर्शियांग। यहां के डाउ हिल को भारत के प्रमुख भुतहा स्थानों में से एक माना जाता है। यहां के जंगलों में रात में तो दूर दिन में जाने के लिए भी बड़ा कलेजा चाहिए। यहां पर कई लोगों ने आत्महत्याएं की हैं। यहां के विक्टोरिया बॉयज स्कूल में छुट्टियों के दौरान किसी के चलने की असामान्य सी आवाजें आती हैं।
भारत के 12 भुतहा स्थान जहां दिन में भी जाने से डरते हैं लोग
यह है जैसलमेर के पास स्थित कुलधारा गांव। करीब 180 साल से वीरान इस गांव को भुतहा माना जाता है। कहते हैं एक बहुत ही सुंदर लड़की के कारण यह गांव एक रात में वीरान हो गया। अब यहां की स्थिति यह है कि रात तो रात दिन में भी लोग यहां जाने से डरते हैं। कई पारानार्मल एक्सपर्ट की टीमें भी यहां रिसर्च करने आ चुकी हैं और उन्होंने भी माना है कि यहां कुछ तो असामान्य जरूर है।
भारत के 12 भुतहा स्थान जहां दिन में भी जाने से डरते हैं लोग
यह है लांबी देहर माइंस जो मसूरी के बाहरी इलाके स्थित है। माना जाता है कि चूना पत्थर के इस खदान में नियमों की अनदेखी करके मजदूरों से काम लिया जाता था जिससे काफी संख्या में मजदूरों की मौत हो गई। माइंस में काम करने वाले कई ट्रक पर भी यहां पहाड़ी से गिरे। बाद में सुरक्षा कारणों से इस माइंस को बंद कर दिया गया लेकिन अब यह स्थान भूतहा माना जाता है। स्थानीय लोग बताता हैं कि यह माइंस अब भूतों का ठिकाना बन चुका है। रात के समय यहां से कई लोंगों के बातें करने की आवाजें आती हैं। कई बार यहां ट्रक भी दुर्घटनाग्रस्त हो चुके हैं।
भारत के 12 भुतहा स्थान जहां दिन में भी जाने से डरते हैं लोग
यह दिल्ली स्थित लोथियन कब्रिस्तान। माना जाता है कि यहां एक अंग्रेज सैनिक की आत्मा भटकती है जो किसी भारतीय महिला का प्रेमी था। वैसे इस कब्रिस्तान में 1857 के विद्रोह के दौरान कई सैनिकों को दफनाया गया था।