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प्राचीन सूर्य मंदिर जहां होती है भक्तों की मुरादें पूरी
Tue, 28 Oct 2014 12:27 PM IST
Updated Tue, 28 Oct 2014 12:27 PM IST
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प्राचीन सूर्य मंदिर जहां होती है भक्तों की मुरादें पूरी
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राजस्थान के झुंझुनू जिले में स्थित लोहार्गल का सूर्य मंदिर भगवान सूर्य का घर माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि भगवान विष्णु की तपस्या से यहां सूर्यदेव को पत्नी छाया के साथ रहने के लिए स्थान मिला था। पाण्डवों को इसी तीर्थ में सगे-संबंधियों की हत्या के पाप से मुक्ति मिली थी। यहां स्थित सूर्य कूंड में स्नान करने से त्वचा संबंधी रोगों से मुक्ति मिलती है। सूर्यदेव संग इनकी पत्नी छाया की पूजा से सब प्रकार के मनोरथ भी पूरे होते हैं।
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यह सूर्य देव के प्राचीन मंदिरों में से एक है और कोणार्क के सूर्य मंदिर का समकालीन है। माना जाता है कि कत्यूरी वंश के राजा कटरमाल ने इस मंदिर का निर्माण करवाया था। लोगों की आस्था है कि यहां पर श्रद्घा पूर्वक जो भी मनोकामना मांगी जाती है वह पूरी होती है। पद्मासन की मुद्रा में बैठे भगवान सूर्य भक्तों को रोग और दुःखों से मुक्ति दिलाते हैं। यह मंदिर अलमोड़ा से करीब 20 किलोमीटर की दूरी पर बसा है।
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कश्मीर के अनंतनाग से पहलगाम के रास्ते में 1400 साल पुराना एक सूर्य मंदिर है। मंदिर का बड़ा हिस्सा टूट चुका है। लेकिन आज भी यह सैलानियों के लिए आकर्षण का केन्द्र है। इस मंदिर का निर्माण ललितादित्य ने करवाया था। माना जाता है कि राजा ललितादित्य सूर्योदय के समय इस मंदिर में पूजा अर्चना करने के बाद राजकाज के कार्य किया करते थे।
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बिहार राज्य के औरंगाबाद जिला में स्थित इस सूर्य मंदिर की खूबी है कि इसका मुख पूर्व दिशा की ओर न होकर पश्चिम की ओर है। पश्चिमाभिमुख देव सूर्य मंदिर देवार्क माना जाता है यानी यहां श्रद्धालुओं की मनोकामना जल्दी पूरी होती है। छठ पर्व के अवसर पर यहां श्रद्घालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है।
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उड़ीसा का कोणार्क मंदिर अपने निर्माण के समय से ही रहस्य का विषय रहा है। कहते हैं इस मंदिर से शाम ढ़लने के बाद पायल की आवाजें आती थी। इस मंदिर के आस-पास से गुजरने वाली जहाजें डूब जाती थी। लेकिन इस मंदिर की बड़ी मान्यता है इसलिए दूर-दूर से सैलानी यहां दर्शन के लिए आते हैं।
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