फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   Other Archives ›   hindi spell check software

आ गया हिंदी का पहला देसी 'स्पेलिंग चेकर'

Tue, 29 Oct 2013 12:23 PM IST
Updated Tue, 29 Oct 2013 12:23 PM IST
विज्ञापन
hindi spell check software

कंप्यूटर पर हिंदी में टाइप करने के दौरान अगर आप शब्दों की गलतियों से परेशान हैं, तो आपके लिए यह अच्छी ख़बर हो सकती है।

विज्ञापन


वर्धा के महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीयहिंदी विश्वविद्यालय ने ‘सक्षम’ सॉफ्टवेयर लॉन्च किया है, जो माइक्रोसॉफ्ट वर्ड के साथ काम करता है और शब्द लिखने में की गई गलतियां पहचानकर उन्हें सुधारता है।

'सक्षम' यूनिकोड आधारित मानक हिंदी के लिए पहला स्पेलिंग चेक सॉफ़्ट्वेयर है, जिसे वर्धा के हिंदी विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफ़ेसर जगदीप सिंह दाँगी ने बनाया है।
विज्ञापन

मुंह का बैक्टीरिया बन जाएगा मोबाइल पासवर्ड!

विज्ञापन
विज्ञापन

बीबीसी हिंदी से बातचीत में जगदीप सिंह दाँगी ने बताया, “हिंदी लिखने के लिए ज्यादातर लोग अंग्रेज़ी की-बोर्ड का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन अंग्रेज़ी में ‘त’ और ‘ट’ के लिए अंग्रेज़ी कीबोर्ड के एक ही अक्षर ‘T’ का प्रयोग होता है। ऐसे में वर्तनी की ग़लतियां होना काफ़ी आम बात है। इसी तरह की ग़लतियों को सुधारने के लिए 'सक्षम' को बनाया गया है।”


तीन साल में बना 'सक्षम'


इससे पहले माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस ने भी अपने सॉफ्टवेयर्स में हिन्दी की स्पेलिंग चेक करने का विकल्प दिया था, लेकिन यूज़र्स को इसके लिए हिंदी का ही माइक्रोसॉफ्ट ऑफ़िस ख़रीदना पड़ता था जो काफ़ी महंगा है।

नया हिंदी स्पेल चेक साधारण माइक्रोसॉफ्ट वर्ड के साथ काम कर सकता है। टेबल में लिखा टेक्स्ट हो, चाहे रोमन हिंदी और देवनागरी मिलाकर लिखी गई हो, 'सक्षम' यूनिकोड हिंदी में लिखे टेक्स्ट को ढूंढकर चेक कर लेता है। सुधार से पहले 'सक्षम' अशुद्ध शब्द के लिए परिवर्तन का सुझाव भी देता है।

'सक्षम' को बनाने में तीन साल का वक्त लगा, जिसे महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा के कुलपति विभूति नारायण राय ने लॉन्च किया।

किफायती कीमत में ब्लैकबेरी जेड30 के ये हैं शानदार फीचर्स


फ़िलहाल सॉफ्टवेयर का ट्रायल वर्ज़न जारी किया गया है, जिसमें 69,000 हिंदी शब्द चेक करने की क्षमता है।

प्रोफ़ेसर दांगी का कहना है कि साल भर के भीतर शब्दों की संख्या दो लाख़ तक पहुंचा दी जाएगी, जिसके बाद 'सक्षम' का फ़ुल वर्ज़न भी लॉन्च कर दिया जाएगा।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed