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हैरान कर देगी बछेन्द्री पाल के गांव की दास्तान...
अमर उजाला, प्रमोद सेमवाल, गोपेश्वर
Updated Fri, 30 Aug 2013 05:00 PM IST
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उत्तराखंड के चमोली जिले के छिनका को भारत की पहली महिला एवरेस्ट विजेता बछेंद्री पाल जैसे सितारों का गांव होने का गौरव प्राप्त है।
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डेढ़ सौ भोटिया परिवारों वाले इस गांव की माटी ने सैकड़ों आला अफसर को भी जन्म दिया है, लेकिन अब गांव के तारे गर्दिश में हैं।
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बदरीनाथ हाईवे के दूसरे छोर पर अलकनंदा के किनारे बसा यह गांव भूस्खलन से तबाह हो चुका है। कई मकान जमीदोज हो गए हैं।
होटलों में दिन गुजारने को मजबूर
निचले क्षेत्र के ग्रामीण टूटे-ढहे मकानों को छोड़कर बिरही, बेडूबगड़, भीमतला के होटलों में दिन गुजारने को मजबूर हैं। खतरे को देखते हुए दो साल पहले छिनका को विस्थापित होने वाले गांवों की सूची में शामिल किया गया था। इसके बाद शासन-प्रशासन ने इसकी सुध नहीं ली है।
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गांव को बदरीनाथ हाईवे से जोड़ने वाली चमोली-मठ-छिनका रोड एक माह से बंद पड़ी है। अलकनंदा पर बना सैकड़ों वर्ष पुराना झूला पुल नदी के कटाव से खतरनाक स्थिति में पहुंच गया है।
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भवन पूरी तरह से जमीदोज
गांव के बचन सिंह, प्रताप सिंह, कमला देवी, वीरेंद्र सिंह के भवन पूरी तरह से जमीदोज हो गए हैं। पीड़ित ग्रामीण टेंटों में रात बिता रहे हैं।
गांव के ऊपरी भाग से भूस्खलन और गांव के नीचे अलकनंदा से भू-कटाव हो रहा है, जिससे गांव का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। आम रास्ते भू-धंसाव से तहस-नहस हो गए हैं।
70 डाक्टर, 45 बैंक मैनेजर और कई आला अफसर
छिनका बछेंद्री पाल के अलावा गांव ने देश को कई प्रतिभावान अधिकारी दिए हैं। इनमें 70 एमबीबीएस डॉक्टर और 45 बैंक मैनेजर शामिल हैं।
आर्केलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के डायरेक्टर केएस फोनिया, प्रांतीय पुलिस सेवा के अधिकारी दलीप कुंवर, लखनऊ में वरिष्ठ वैज्ञानिक देवेंद्र कुंवर, बदरीनाथ के पूर्व विधायक केदार सिंह फोनिया, सेवानिवृत्त आईजी नरेंद्र सिंह फोनिया, लोनिवि गोपेश्वर के अधिशासी अभियंता रमेश पाल इसी गांव के हैं। गांव में कोई समारोह होता है तो इनमें से कई गांव आना नहीं भूलते।
इनकी भी सुनिए
गांव के विस्थापन के लिए देवर-खडोरा में राजस्व भूमि चयनित की गई, लेकिन शासन ने भूमि चयन में देवर खडोरा गांव के ग्रामीणों से अनापत्ति लेने का पेच फंसा दिया है, जिससे विस्थापन नहीं हो पाया है। शासन से अब इसे संशोधित करवाने की मांग की गई है।
- केदार सिंह फोनिया, छिनका गांव निवासी व पूर्व विधायक, बदरीनाथ क्षेत्र
गांव में कई भवन जमीदोज हो गए हैं। जिलाधिकारी से शीघ्र गांव के विस्थापन की मांग की गई है।
- सतेश्वर सती, ग्राम प्रधान, छिनका
हमें भी अपने गांव छिनका के खतरे की जद में आने का दुख है। हमारा घर भी क्षतिग्रस्त हो गया है। मैं गांव के पुनर्वास के लिए चमोली के जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी से बात करूंगा। गांव का अन्यत्र विस्थापित होना बेहद जरूरी है।
- नरेंद्र कुंवर, चीफ फायर अफसर, अल्मोड़ा, छिनका गांव निवासी
गांव के विस्थापन के लिए बार-बार प्रशासन पर दबाव बना रहे हैं। जिला प्रशासन से गांव के विस्थापन की बात की गई। प्रभावितों को सुरक्षित स्थानों पर रहने के लिए भी कहा।
- रमेश पाल, लोनिवि के अधिशासी अभियंता, गोपेश्वर, छिनका गांव निवासी
विस्थापन की कार्रवाई शासन स्तर पर लंबित है। शासन की स्वीकृति मिलते ही गांव का विस्थापन किया जाएगा। तत्काल राहत के लिए गांव में टेंट, सोलर लालटेन, राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है।
- एसए मुरुगेशन, डीएम चमोली