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हवाई यात्रा में 5 लाख फूके और मंत्री जी फुर्र
Almora
Updated Wed, 06 Mar 2013 05:31 AM IST
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अल्मोड़ा। प्रभारी मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी बागेश्वर और अल्मोड़ा जिलों में जिला योजना की समीक्षा के लिए हेलीकॉप्टर से आए और कुछ ही घंटों में औपचारिकता पूरी करके वापस लौट गए। हेलीकॉप्टर के में ही सरकार को पांच लाख से अधिक की चपत लगी लेकिन इस बैठक में किसी समस्या का हल नहीं निकला। मंत्री जी को कौन बताए कि जनता की समस्याएं हवाई दौरों से नहीं उन जिलों से दिल लगाने से हल होती हैं जिनके प्रभार उनके पास हैं।
प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी मंगलवार को हेलीकॉप्टर से अल्मोड़ा और बागेश्वर जिलों में जिला योजना के कार्यों की समीक्षा करने पहुंचे। दोनों जिलों में कुछ घंटे बैठक की औपचारिकता पूरी की और शाम को देहरादून के लिए उड़ गए। इन बैठकों में कोई ऐसा ठोस काम नहीं हुआ जिसे मंत्री जी कोई उपलब्धि के तौर पर गिना सकें और हेलीकॉप्टर लेकर आने की सार्थकता सिद्ध हो। पर्वतीय क्षेत्रों में स्थित अधिकांश अस्पतालों में डाक्टर नहीं हैं। अल्मोड़ा बेस और जिला अस्पतालों में विशेषज्ञ डाक्टरों के पद खाली पड़े हैं। स्थिति यह है कि न्यूरोलॉजिस्ट, कार्डियोलॉजिस्ट तो दूर की बात जिला मुख्यालय के अस्पतालों में फिजीशियन तक नहीं हैं।
विकास की स्थिति यह है कि वित्तीय वर्ष समाप्त होने के कुछ ही दिन बचे हैं लेकिन अधिकांश विभागों में स्वीकृत बजट का 60 फीसदी भी उपयोग नहीं हो सका है। सड़कों के लिए बरसों से धन मंजूर है लेकिन निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं। इसे लेकर खुद विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल बीते दिनों चिंता जता चुके हैं। हालत को पटरी पर लाने के लिए जिले के प्रभारी मंत्री ने विकास कार्यों की गंभीरता से समीक्षा करने के बजाय हवाई दौरा करके मात्र औपचारिकता पूरी कर ली। लोगों का कहना है कि यदि मंत्री जी को ऐसी ही बैठक करनी थी तो वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से देहरादून से ही निर्देश जारी कर लेते। इससे कम से कम हेलीकॉप्टर किराए के पांच लाख रुपये तो बचते और उन डाक्टरों को मानदेय मिलता जो धन के अभाव में लौट रहे हैं।
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प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी मंगलवार को हेलीकॉप्टर से अल्मोड़ा और बागेश्वर जिलों में जिला योजना के कार्यों की समीक्षा करने पहुंचे। दोनों जिलों में कुछ घंटे बैठक की औपचारिकता पूरी की और शाम को देहरादून के लिए उड़ गए। इन बैठकों में कोई ऐसा ठोस काम नहीं हुआ जिसे मंत्री जी कोई उपलब्धि के तौर पर गिना सकें और हेलीकॉप्टर लेकर आने की सार्थकता सिद्ध हो। पर्वतीय क्षेत्रों में स्थित अधिकांश अस्पतालों में डाक्टर नहीं हैं। अल्मोड़ा बेस और जिला अस्पतालों में विशेषज्ञ डाक्टरों के पद खाली पड़े हैं। स्थिति यह है कि न्यूरोलॉजिस्ट, कार्डियोलॉजिस्ट तो दूर की बात जिला मुख्यालय के अस्पतालों में फिजीशियन तक नहीं हैं।
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विकास की स्थिति यह है कि वित्तीय वर्ष समाप्त होने के कुछ ही दिन बचे हैं लेकिन अधिकांश विभागों में स्वीकृत बजट का 60 फीसदी भी उपयोग नहीं हो सका है। सड़कों के लिए बरसों से धन मंजूर है लेकिन निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं। इसे लेकर खुद विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल बीते दिनों चिंता जता चुके हैं। हालत को पटरी पर लाने के लिए जिले के प्रभारी मंत्री ने विकास कार्यों की गंभीरता से समीक्षा करने के बजाय हवाई दौरा करके मात्र औपचारिकता पूरी कर ली। लोगों का कहना है कि यदि मंत्री जी को ऐसी ही बैठक करनी थी तो वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से देहरादून से ही निर्देश जारी कर लेते। इससे कम से कम हेलीकॉप्टर किराए के पांच लाख रुपये तो बचते और उन डाक्टरों को मानदेय मिलता जो धन के अभाव में लौट रहे हैं।
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