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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   conflicts in khurja three dead

UP: जातीय संघर्ष में तीन मरे, तनाव

Wed, 29 Jan 2014 08:40 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, खुर्जा (बुलंदशहर)
ब्यूरो/अमर उजाला, खुर्जा (बुलंदशहर) Updated Wed, 29 Jan 2014 08:40 AM IST
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conflicts in khurja three dead

उत्तर प्रदेश के खुर्जा के गांव सेहड़ा फरीदपुर में दलित किशोरी से छेड़छाड़ के बाद दो पक्षों में हुए संघर्ष में तीन लोगों की जान चली गई।

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भीड़ ने मौके पर पहुंची पुलिस के वाहनों में भी तोड़फोड़ की और एक महिला पुलिसकर्मी और दरोगा को पीट दिया। अगौरा चौकी इंचार्ज को सस्पेंड कर दिया गया है। गांव में पीएसी और पुलिस बल तैनात है।
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पुलिस के मुताबिक सोमवार को एक दलित किशोरी गांव में ही ठाकुर जाति के खेत में गन्ना काटने गई थी। इस दौरान गन्ना हटाने को लेकर हुए विवाद के बाद एक दबंग किशोर ने उससे छेड़छाड़ की।
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विरोध करने पर किशोरी के मामा को दबंगों ने पीटा और पुलिस बुला ली। किशोरी के परिजनों ने आरोप है कि पुलिस ने कार्रवाई की बजाय समझौता करा दिया।

किशोरी का दावा है कि मंगलवार सुबह वह गोबर पाथने गांव के बाहरी हिस्से में गई तो दूसरे पक्ष के 20-25 युवकों ने उसे दबोच लिया। फिर उन्होंने दलित परिवारों पर हमला बोल दिया।

मारपीट में एक पक्ष से धर्मपाल जाटव और दूसरे पक्ष से ओमप्रकाश ठाकुर घायल हो गए। सूचना पर पहुंची पुलिस ने कार्रवाई करने के बजाए लोगों को शांत करने का प्रयास किया। इससे भीड़ उग्र हो गई।

ग्रामीणों ने लाठी-डंडों से पुलिस की दोनों जीपें तोड़ दीं और महिला सिपाही सुमन और दरोगा श्रीनिवास को पीट दिया।

आरोप है कि इसी दौरान दबंगों ने इंद्रपाल जाटव (36) को दुकान से खींच कर गोली मारकर हत्या कर दी। इससे आक्रोशित दलितों ने बुर्जी में भूसा भर रहे बलवीर ठाकुर (45) के सिर में गोली मारकर हत्या कर दी।


घायल ओमप्रकाश (48) को पुलिस ने खुर्जा के जटिया अस्पताल में भर्ती कराया, जहां ओमप्रकाश की भी मौत हो गई।

पुलिस की मौजूदगी में बहा खून
गांव में मंगलवार को दो बजे के आसपास सबसे पहले इंद्रपाल जाटव की हत्या हुई। इसके बाद महज आधे घंटे में दूसरे पक्ष के बलवीर को मौत के घाट उतार दिया गया।

इंद्रपाल को गोली मारने के अलावा बलकटी से काटकर निर्मम हत्या की गई थी, जबकि मारपीट के दौरान घायल ओमप्रकाश ने इलाज के दौरान अस्पताल में शाम पांच बजे दम तोड़ दिया।

खास बात यह है कि गांव में खूनी खेल पुलिस बल की गांव में मौजूदगी के दौरान हुआ। पुलिस लोगों पर कड़ी कार्रवाई के बजाय उन्हें समझाने की कोशिश करती रही और भीड़ एक दूसरे के आमने-सामने आकर संघर्ष करती रही।

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