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बागपत में भी है तेंदुए की दहशत
Baghpat
Updated Tue, 25 Feb 2014 05:30 AM IST
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बागपत। एक तेंदुए ने मेरठ का चैन छीन लिया। एक और तेंदुआ है, जिसने बागपत की नींद हराम कर रखी है। गनीमत है कि यह शहरी आबादी की तरफ नहीं आया, लेकिन देहात को सालभर से सता रहा है। कभी किसी किसान पर हमला बोल देता है, तो कभी किसी जानवर को खा जाता है। एक बार तो सीओ की आंखों के सामने ही आ गया था। वन विभाग ने जाल भी खूब बिछाए, लेकिन एक बार भी पकड़ में नहीं आया। कभी खेकड़ा में दिखता है, तो कभी बिनौली में।
सबसे पहले पिलाना के भट्ठे पर नजर आया था। मजदूरों पर हमला बोला था। तीन लोग घायल हुए थे। फिर एक दूधिये पर झपटा। सबसे ताजा मामला सात दिन पहले का है। खेकड़ा के औरंगाबाद मोहल्ला के प्रदीप धामा और रामपुर मोहल्ला के संदीप को मुबारिकपुर में तेंदुआ नजर आया था।
सांकरोद, मुबारिकपुर के अलावा सुभानपुर, अब्दुलपुर में भी तेंदुआ दिख चुका है। एक बार हिंडन के पास दिखा। एक बार यमुना की पटरी पर। बिनौली के पास भी नजर आया था एक बार। सीओ खेकड़ा सोमदत्त शर्मा ने पिछले साल इसे सांकरोद में पुश्ते पर देखा था। उन्होंने बताया कि तेंदुए की लंबाई कुछ ज्यादा है और पतला सा है। आंखों में जीप की रोशनी पड़ने पर चला गया था।
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इसे पकड़ने के लिए वन विभाग की टीम दिल्ली से भी आई। एक बार कैमरे लगाने की योजना बनी, लेकिन इस पर काम नहीं हुआ। इसके अलावा जब भी वन विभाग के अधिकारी पहुंचे, तो तेंदुए के पंजों के निशान ही मिले, तेंदुआ कभी नजर नहीं आया। जिन गांवों में तेंदुआ दिख चुका है, वहां किसान डर के मारे या तो अकेले खेत नहीं जाते और अगर जाना पड़े तो हाथ में हथियार लेकर जाते हैं।
खेतों में जानवर खाता है
खेकड़ा से बिनौली तक नजर आ चुका यह तेंदुआ काफी उम्र का है। लोग बताते हैं कि एक तेंदुआ पांच साल पहले भी नजर आया था, वह बहुत छोटा था। हो सकता है, यह वही हो और बड़ा हो गया है। यह गन्ने के खेतों में छुपा रहता है, और हिरन, नीलगाय जैसे जानवर खाता है। अगर कोई इंसान सामने पड़ जाए तो उस पर हमला बोल देता है।
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सबसे पहले पिलाना के भट्ठे पर नजर आया था। मजदूरों पर हमला बोला था। तीन लोग घायल हुए थे। फिर एक दूधिये पर झपटा। सबसे ताजा मामला सात दिन पहले का है। खेकड़ा के औरंगाबाद मोहल्ला के प्रदीप धामा और रामपुर मोहल्ला के संदीप को मुबारिकपुर में तेंदुआ नजर आया था।
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सांकरोद, मुबारिकपुर के अलावा सुभानपुर, अब्दुलपुर में भी तेंदुआ दिख चुका है। एक बार हिंडन के पास दिखा। एक बार यमुना की पटरी पर। बिनौली के पास भी नजर आया था एक बार। सीओ खेकड़ा सोमदत्त शर्मा ने पिछले साल इसे सांकरोद में पुश्ते पर देखा था। उन्होंने बताया कि तेंदुए की लंबाई कुछ ज्यादा है और पतला सा है। आंखों में जीप की रोशनी पड़ने पर चला गया था।
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इसे पकड़ने के लिए वन विभाग की टीम दिल्ली से भी आई। एक बार कैमरे लगाने की योजना बनी, लेकिन इस पर काम नहीं हुआ। इसके अलावा जब भी वन विभाग के अधिकारी पहुंचे, तो तेंदुए के पंजों के निशान ही मिले, तेंदुआ कभी नजर नहीं आया। जिन गांवों में तेंदुआ दिख चुका है, वहां किसान डर के मारे या तो अकेले खेत नहीं जाते और अगर जाना पड़े तो हाथ में हथियार लेकर जाते हैं।
खेतों में जानवर खाता है
खेकड़ा से बिनौली तक नजर आ चुका यह तेंदुआ काफी उम्र का है। लोग बताते हैं कि एक तेंदुआ पांच साल पहले भी नजर आया था, वह बहुत छोटा था। हो सकता है, यह वही हो और बड़ा हो गया है। यह गन्ने के खेतों में छुपा रहता है, और हिरन, नीलगाय जैसे जानवर खाता है। अगर कोई इंसान सामने पड़ जाए तो उस पर हमला बोल देता है।