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जैव विविधता को समेटे हैं ‘साइंस एक्सप्रेस’
Azamgarh
Updated Thu, 16 May 2013 05:30 AM IST
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आजमगढ़। छात्रों को विज्ञान के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से भारतीय रेल की तरफ से संचालित साइंस एक्सप्रेस मंगलवार की रात आजमगढ़ रेलवे स्टेशन पहुंची। इससे पूर्व यह गाड़ी 62 स्टेशनों पर छात्रों को जागरूक करने का कार्य कर चुकी है। ‘साइंस एक्सप्रेस’ में भारत की जैव विविधता व जलवायु परिवर्तन को समेटा गया है। बुधवार को दिनभर छात्र-छात्राएं इसके अवलोकन कर अपनी ज्ञान में इजाफा किए। साइंस कम्युनिकेटर प्रदर्शनी में आए लोगों को जीव-जंतुओं के विलुप्त होने से पर्यावरण संतुलन कैसे बिगड़ रहा है के बारे में बताया। किड्स जोन में प्रैक्टिकल व खेल का आनंद भी छात्र-छात्राएं ले रहीं हैं। प्रदर्शनी आज 16 मई को रात ग्यारह बजे मुगलसराय के लिए रवाना होगी।
‘साइंस एक्सप्रेस’ का उद्घाटन बीते 9 अप्रैल को दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित, पवन कुमार बंशल, पर्यावरण एवं वन मंत्री श्रीमती जयंती नटराजन ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। दिल्ली सफदरगंज, प्रगति मैदान, पटियाला, जालंधर सिटी, वेरका, पठानकोट, बजलता, अंब अन्द्वारा, अंबाला कैंटोन्मेंट, हरिद्वार, बरेली से होते ही यह ‘साइंस एक्सप्रेस’ 14 मई को रात 7.55 बजे रेलवे स्टेशन पर पहुंची। बुधवार को सुबह दस बजे से पांच बजे तक प्रदर्शनी देखने के लिए लोगों का तांता लगा रहा। 16 कोच की ‘साइंस एक्सप्रेस’ के आठ कोच में भारत की जैव भौगोलिक क्षेत्र में फैली असंख्य जैव विविधता का प्रदर्शन किया गया है। कोच नंबर एक से प्रदर्शनी में रजिस्ट्रेशन के बाद प्रवेश पर जैविक विविधता के बारे में, विलुप्त हो रहे जीव जंतु व जानवरों के बारे में बखूबी उकेरा गया है। जीव जंतुओं के विलुप्त होने से हमारा पर्यावरण संतुलन कैसे बिगड़ रहा है, इसके प्रति भी इस प्रदर्शनी के माध्यम से लोगों को जागरूक किया गया। इसके अलावा ट्रांस हिमालय और हिमालय, गंगा के मैदान, उत्तर-पूर्व भारत, रेगिस्तान और अर्द्ध शुष्क क्षेत्र, पश्चिमी घाट, डेक्कन प्रायद्वीप, तट और द्वीप शामिल हैं। प्रदर्शनी में संरक्षण चुनौतियों के अलावा समुद्री, तटीय, वन्य, माइक्रोबियल, कृषि जैव विविधता और उसके आजीविका के साथ के संबंधों को भी दर्शाया गया है।
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‘साइंस एक्सप्रेस’ का उद्घाटन बीते 9 अप्रैल को दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित, पवन कुमार बंशल, पर्यावरण एवं वन मंत्री श्रीमती जयंती नटराजन ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। दिल्ली सफदरगंज, प्रगति मैदान, पटियाला, जालंधर सिटी, वेरका, पठानकोट, बजलता, अंब अन्द्वारा, अंबाला कैंटोन्मेंट, हरिद्वार, बरेली से होते ही यह ‘साइंस एक्सप्रेस’ 14 मई को रात 7.55 बजे रेलवे स्टेशन पर पहुंची। बुधवार को सुबह दस बजे से पांच बजे तक प्रदर्शनी देखने के लिए लोगों का तांता लगा रहा। 16 कोच की ‘साइंस एक्सप्रेस’ के आठ कोच में भारत की जैव भौगोलिक क्षेत्र में फैली असंख्य जैव विविधता का प्रदर्शन किया गया है। कोच नंबर एक से प्रदर्शनी में रजिस्ट्रेशन के बाद प्रवेश पर जैविक विविधता के बारे में, विलुप्त हो रहे जीव जंतु व जानवरों के बारे में बखूबी उकेरा गया है। जीव जंतुओं के विलुप्त होने से हमारा पर्यावरण संतुलन कैसे बिगड़ रहा है, इसके प्रति भी इस प्रदर्शनी के माध्यम से लोगों को जागरूक किया गया। इसके अलावा ट्रांस हिमालय और हिमालय, गंगा के मैदान, उत्तर-पूर्व भारत, रेगिस्तान और अर्द्ध शुष्क क्षेत्र, पश्चिमी घाट, डेक्कन प्रायद्वीप, तट और द्वीप शामिल हैं। प्रदर्शनी में संरक्षण चुनौतियों के अलावा समुद्री, तटीय, वन्य, माइक्रोबियल, कृषि जैव विविधता और उसके आजीविका के साथ के संबंधों को भी दर्शाया गया है।
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