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कैफी आजमी ने मेजवां को दिलाई पहचान

Fri, 10 May 2013 05:30 AM IST
Azamgarh
Azamgarh Updated Fri, 10 May 2013 05:30 AM IST
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मेजवां। कैफी आजमी प्रगतिशील क्रांतिकारी शायर थे। क्षेत्र के विकास के लिए आखिरी सांस क्रांतिकारी लेखनी से संघर्ष करते रहे,वहीं जिले में रेल सेवा विस्तार के लिए भी संघर्ष करने से पीछे नहीं रहे। बड़ी रेलवे लाइन आंदोलन में उन्होंने बढ़-चढ़ कर भाग लिया। जिले में रेल सुविधाओं का विकास होने पर अपने पैतृक गांव मेजवां में शिक्षा की अलख जगाने के लिए प्राइमरी स्कूल की स्थापना की। साथ ही महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए चिकनकारी सेंटर आदि की स्थापना कर गांव को नई पहचान दी। मुंबई जैसे महानगर में रहते हुए भी उन्हें अपने जिले के पिछड़ेपन की याद हमेशा सताती रही। बाद में अपने गांव चले आए और 20 वर्ष तक मेजवां में रहकर सामाजिक सेवा से जुड़े रहे।
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ग्राम सभा बक्सपुर मेजवां के पूर्व प्रधान एखलाक अहमद ने कहा कि उनके प्रयास से वर्ष 1981-82 में फूलपुर मुख्य मार्ग से मेजवां गांव तक पिच मार्ग का निर्माण कराया गया। सीताराम का कहना है कि कैफी साहब की देन है कि आज मेजवां गांव आदर्श गंाव के रूप में जाना जाता है। अलीअंसर ने बताया कि कैफी आजमी के प्रयास से मऊ-शाहगंज के बीच मीटर गेज से ब्राड गेज लाईन बनी। आज इस पर लंबी दूरी की ट्रेनें कैफियात, गोदान,सहित कई ट्रेन चल रही है। संयोगिता ने बताया कि गांव में महिलाओं को रोजगार कैफी साहब ने दिलाया। गांव में सिलाई और चिकनकारी प्रशिक्षण केंद्र खोलकर गरीब महिलओं को आत्मनिर्भर बनाया।
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